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आवाज के जादू से राज कायम है अमिताभ का

सहस्राब्दि के महानायक के दुर्लभ खिताब से अलंकृत अमिताभ बच्चन के चार दशक से भारतीय सिनेमा जगत पर अखंड राज के पीछे उनकी शानदार आवाज का जादू भी रहा है।

फिल्मों में संवाद की प्रभावशाली अदायगी भरी लेकिन आकर्षक आवाज में उनके गीतों, लोकगीतों तथा उम्र की ढ़लान पर भक्तिमय हनुमान चालीसा के अलावा टेलीविजन पर 'कौन बनेगा करोड़पति' की मेजबानी, हर कहीं उनकी आवाज उनकी शख्सियत को मजबूत बुनियाद देती रही है।

लेकिन यह भी दिलचस्प बात है कि अपने करियर के शुरुआती दौर में अमिताभ आकाशवाणी में उद्घोषक बनने जा पहुंचे लेकिन उनकी भारी आवाज के कारण उन्हें नकार दिया गया था लेकिन नियति ने उसी आवाज को इतनी बुलंदी दे दी कि रेडियो पर शायद ही कोई दिन बीतता हो जब अमिताभ की आवाज न गूंजे।

अमिताभ की पहली सफल फिल्म जंजीर की शूटिंग के दौरान महान शोमैन राज कपूर ने अमिताभ की आवाज सुनकर उन्हें देखे बिना ही कह दिया था कि यह शख्स फिल्म जगत पर राज करेगा। दरअसल अमिताभ का फिल्म जगत में पदार्पण उस युग में हुआ था जब संवाद अदायगी की शैली और कलाकार आवाज बहुत अहमियत रखा करती थी। कुंदन लाल सहगल, गुरुदत्त देवानंद, दिलीप कुमार, राज कुमार और राजेश खना आवाज की इन्हीं खूबियों के बलबूते सफलता की सीढियां चढ़ सके थे। अमिताभ का फिल्म जगत में प्रवेश इसी कड़ी में हुआ।
 
फिल्म 'जंजीर' में उनके संवाद, 'यह पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं इसलिए सीधी तरह खड़े रहो' में उन्हें सफलता के उस मुकाम तक पहुंचा दिया जिस पर इससे पहले की दस फिल्मों में उनकी मेहनत नहीं पहुंचा पाई थी। अमिताभ को सफलता का यह मूल मंत्र मिला तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
 
अमिताभ बच्चन ने कई फिल्मों में गीत भी गाए है। उन्होंने सबसे पहले वर्ष 1979 मे प्रर्शित फिल्म 'मिस्टर नटवर लाल' में 'मेरे पास आओ मेरे दोस्तो' गीत गाया था। इस गीत के सफल होने के बाद उन्होंने 'मेरे अंगने मे तुम्हारा क्या काम है', लावारिस 'रंग बरसे भीगे चुनर वाली', सिलसिला 'तू मइके मत जइयो', पुकार 'जिधर देखूं तेरी तस्वीर', महान 'चल चल मेरे भाई', नसीब 'डोंट वरी बी हैप्पी', तूफान 'कितने बाजू कितने सर', मै आजाद हूं, पड़ोसन 'अपनी मुर्गी को रखना संभाल', जादूगर 'होली खेले रघुबीरा', बागवान और बंटी और बबली रैप सांग, 'बंटी और बबली' जैसे सुपरहिट गाने गाए है।

हिन्दी फिल्म जगत में अमिताभ बच्चन के आगमन के साथ उनके साथ काम करने वाले अभिनेताओं की चमक या तो धुंधली पड़ गई या वे गुमनामी के अंधरे में खो गए लेकिन अमिताभ बच्चन अपने बेमिसाल अभिनय के दम पर आज भी फिल्म इंडस्ट्री में उसी तरह सक्रिय है।
 
अमिताभ बच्चन का जन्म इलाहाबाद मे 11 अक्टूबर 1942 को हुआ था। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिन्दी और उर्दू साहित्य के जाने माने कवि थे जबकि उनकी माता तेजी बच्चन एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। अमिताभ बच्चन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के शेखुड कॉलेज से पूरी की। स्नातक की उपाधि हासिल करने के बाद उन्हें कलकत्ता में पहली नौकरी बतौर सुपरवाइजर मिली। जहां उन्हें 800 रूपए मासिक वेतन मिला करता था। वर्ष 1968 मे कलकत्ता की नौकरी छोड़ने के बाद मुंबई आ गए।
 
वर्ष 1969 में ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से अमिताभ बच्चन ने अपने सिने करियर का आगाज किया। वर्ष 1971 में अमिताभ बच्चन को ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'आनंद' में सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ काम करने का मौका मिला, जिसमें फिल्म में एक बंगाली डॉक्टर के छोटे से किरदार के जरिए अमिताभ बच्चन ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस फिल्म के लिए वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए।
 
वर्ष 1973 मे निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी 'जंजीर' फिल्म के लिए अभिनेता की तलाश कर रहे थे। पहले तो उन्होंने इस फिल्म के लिए देवानंद से गुजारिश की और बाद में अभिनेता राजकुमार से काम करने की पेशकश की लेकिन किसी कारणवश दोनो अभिनेताओं ने जंजीर में काम करने से इन्कार कर दिया। बाद में अभिनेता प्राण के कहने पर प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन को बतौर नायक चुन लिया।

फिल्म 'जंजीर' के निर्माण के दौरान एक दिलचस्प वाकया हुआ, स्टूडियो में फिल्म की शूटिंग के दौरान राजकपूर भी अपनी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे। उसी दौरान राजकपूर ने अमिताभ की आवाज सुनी लेकिन तब तक वह नहीं जानते थे कि यह किसकी आवाज है। उन्होंने कहा कि एक दिन इस दमदार आवाज का मालिक फिल्म इंडस्ट्री का बेताज बादशाह बनेगा।
 
वर्ष 1975 में अमिताभ बच्चन को रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी फिल्म 'शोले' में काम करने का अवसर मिला जो हिन्दी सिनेमा जगत के इतिहास की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई। इसी वर्ष प्रदर्शित फिल्म 'दीवार' के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित कर दिया कि राजेश खन्ना के बाद फिल्म इंडस्ट्री को नया सुपरस्टार मिल चुका है।
 
वर्ष 1976 में प्रदर्शत फिल्म 'दो अनजाने' यूं तो अमिताभ बच्चन की कम चर्चित फिल्मों मे गिनी जाती है लेकिन यह वहीं फिल्म थी। जिसमें अमिताभ और रेखा की सुपरहिट जोड़ी ने एक साथ काम किया था। वर्ष 1976 में अमिताभ बच्चन की एक और सुपरहिट फिल्म 'अदालत' प्रदर्शित हुई जिसमें उनका डबल रोल दर्शकों को काफी पसंद आया।
 
वर्ष 1976 में ही अमिताभ बच्चन ने फिल्म 'कभी कभी' में रूमानी किरदार निभाकर दर्शकों को अंचभित कर दिया। माना जाता है कि अमिताभ बच्चन ने गीतकार साहिर लुधियानवी की जिंदगी से जुड़े पहलुओं को रूपहले पर्दे पर पेश किया था।
 
वर्ष 1977 में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' प्रदर्शित हुई। मनमोहन देसाई की फिल्म में अपने दमदार अभिनय से अमिताभ बच्चन 'वन मैन इंडस्ट्री' के रुप में विख्यात हो गए। वर्ष 1981 में अमिताभ बच्चन की 'नसीब', 'लावारिस' और 'नमकहलाल' जैसी सुपरहिट फिल्म प्रदर्शित हुई। फिल्म इंडस्ट्री मे फिल्म 'नसीब' मील का पत्थर के रूप में आज भी याद की जाती है। इस फिल्म में पहली बार एक गाने 'जॉन जॉनी जर्नादन' में कई सितारों को एक साथ दिखाया गया।
 
'नसीब' और 'लावारिस' जैसी फिल्मों में जहां अमिताभ बच्चन ने अपनी एंग्री यंग मैन की छवि बरकरार रखी वहीं 'नमकहलाल' में उन्होंने हास्य अभिनय से दर्शकों को हंसाते हंसाते लोटपोट कर दिया। उसी वर्ष अमिताभ बच्चन की फिल्म 'सिलसिला' प्रदर्शित हुई। माना जाता है कि इस फिल्म में अमिताभ और रेखा के जीवन को रूपहले पर्दे पर दर्शाया गया है। 'सिलसिला' अमिताभ और रेखा की जोड़ी वाली आखिरी फिल्म साबित हुई।
 
अमिताभ बच्चन का ख्वाब था कि वह अपने आदर्श दिलीप कुमार के साथ भी काम करे। वर्ष 1982 में प्रदर्शित फिल्म 'शक्ति' में उन्हें दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका मिला। पिता और पुत्र के द्वंद्व पर आधारित इस फिल्म में दोनों कलाकारों का टकराव देखने लायक था।
 
सुपर स्टार के रूप मे अमिताभ बच्चन किस ऊंचाई पर पहुंच चुके थे इसका सही अंदाज लोगों को तब लगा जब 1982 में निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई की फिल्म 'कुली' की शूटिंग के दौरान वह गंभीर रूप से घायल होने के बाद लगभग मौत के मुंह मे पहुंच गए। इसके बाद देश के हर मंदिर, मस्जिद और गुरूदारे मे हर जाति और धर्म के लोगो ने उनके ठीक होने की दुआएं मांगी मानो अमिताभ बच्चन उनके हीं अपने परिवार का कोई अंग हों।
 
लोगों की दुआएं रंग लाई और अमिताभ जल्द ही ठीक को गए। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद उन्होंने 'कुली' की शूटिंग पूरी की जिसके सफल होने के बाद उन्होंने 'अंधा कानून' गिरफ्तार और आखिरी रास्ता जैसी सफल फिल्मों मे भी काम किया।

वर्ष 1983 में ही अमिताभ बच्चन की फिल्म 'महान' प्रदर्शित हुई। इस फिल्म को टिकट खिड़की पर व्यवसायिक सफलता नहीं मिली लेकिन अमिताभ ने पहली बार तिहरी भूमिका निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 1984 में प्रकाश मेहरा की बॉक्स ऑफिस सुपरहिट 'शराबी' ने अमिताभ के करियर को लोकप्रियता के एक नए पायदान पर ला खड़ा किया।
 
वर्ष 1986 में प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म 'आखिरी रास्ता' के बाद अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री से कुछ समय तक किनारा कर लिया और राजनीति में चले गए। राजनीति की दुनिया रास नहीं आने के कारण अमिताभ बच्चन एक बार फिर से 1988 में प्रदर्शित फिल्म 'शंहशाह' के जरिए फिल्म इंडस्ट्री में वापस लौटे। दिलचस्प बात है कि काफी लंबे अरसे से दर्शको को उनकी वापसी का इंतजार था और उनकी मांग को देखते हुए मुंबई के सिनेमाहॉल में इसे प्रदर्शन के एक दिन पहले रिलीज करना पड़ा।
 
वर्ष 1990 में अमिताभ बच्चन की फिल्म 'अग्निपथ' प्रदर्शित हुई। मुकुल एस, आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म हांलाकि बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही लेकिन अमिताभ बच्चन सर्वश्रेष्ठ अमिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किए गए।
 
वर्ष 1992 में बढ़ती उम्र और तकाजे को देखते हुए अमिताभ बच्चन ने फिल्म 'खुदागवाह' के प्रदर्शन के बाद इंडस्ट्री से किनारा कर लिया। लगभग पांच वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद उन्होंने अपनी होम प्रोडक्शन 'ए.बी.सी.एल' में बनी फिल्म 'मृत्युदाता' के जरिए कम बैक करने का प्रयास किया लेकिन दुर्भाग्य से फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई।
 
वर्ष 2000 मे अमिताभ बच्चन को यश चोपड़ा की फिल्म 'मोहब्बतें' मे काम करने का मौका मिला। फिल्म की सफलता के बाद अमिताभ बच्चन एक बार फिर से अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गए। वर्ष 2000 में वह पहली बार टेलीविजन पर उतरे। टीवी प्रोग्राम 'कौन बनेगा करोड़पति' से उनकी लोकप्रियता को जबरदस्त ऊंचाई मिली। इसके बाद अब तक इस सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता पर आधारित कार्यक्रम के पांच संस्करण आ चुके हैं। एक बार शाहरुख खान को छोड़कर चार बार अमिताभ ही इसके होस्ट रहे।

रजत पटल पर वर्ष 2005 में अमिताभ बच्चन ने 'ब्लैक' और 'सरकार' जैसी सफल फिल्मों मे जबरदस्त अभिनय कर बता दिया कि फिल्म इंडस्ट्री के असली सरकार वही है। इसके साथ ही फिल्म 'ब्लैक' में दमदार अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। उसी वर्ष अमिताभ ने अपने उम्र से काफी कम कम की नायिका के साथ फिल्म 'निशब्द' में काम कर दर्शकों को निशब्द कर दिया।
 
वर्ष 2009 में अमिताभ बच्चन के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म 'पा' प्रदर्शित हुई। दिलचस्प बात है कि इस फिल्म में उन्होंने प्रोजेरिया से ग्रस्त एक ऐसे लड़के की भूमिका निभाई, जो बचपन के दिनों में ही बूढ़ा दिखाई देने लगता है। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए वह अपने करियर में तीसरी बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किए गए।
 
अमिताभ बच्चन ने कई फिल्मों मे दोहरे किरदार निभाए है। जिसमें बंधे हाथ 'अदालत', 'कस्मे वादे', 'डॉन', 'द ग्रेट गैम्बलर', 'सत्ते पे सत्ता', 'देश प्रेमी', 'आखिरी रास्ता', 'तूफान', 'लाल बादशाह', 'सूर्यवंशम' और 'बड़े मियां छोटे मियां' शामिल है।
 
अमिताभ बच्चन को सात बार फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजा गया। उन्हें सबसे पहले 1971 में प्रदर्शित फिल्म 'आनंद' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। इसके बाद 1973 में 'नमकहराम' फिल्म के लिए वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता ,1977 में 'अमर अकबर ऐंथनी' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, 1978 में 'डॉन' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, 1991 में 'हम' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, 2000 में फिल्म 'मोहब्बते' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और 2005 में फिल्म 'ब्लैक' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए। इन सबके साथ ही उन्हें 'शताब्दी के महानायक' पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

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