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दिल धड़कने दो REVIEW : आलीशान नाव में लदा भारी भरकम सामान

दिल धड़कने दो REVIEW : आलीशान नाव में लदा भारी भरकम सामान

करीब डेढ़-सवा महीना पहले जारी इस फिल्म के ट्रेलर में आमने-सामने बैठे एक बाप-बेटे की बातों ने अचानक-से ध्यान खींचा था। बाप अपने बेटे को किसी लड़की में इंट्रस्ट लेने के लिए कह रहा है। बाप गंभीर है, पर लड़का फुद्दुओं की हंस रहा है और कह रहा है, मुझे उस लड़की में कोई इंट्रस्ट ही नहीं है पापा...तभी बाप तुरुप के इक्के की तरह एक डॉयलॉग मारता है, तुझे उस प्लेन में इंट्रस्ट है? प्लेन लेना है या नहीं, बोल... लड़के की फुद्दु-सी हंसी एक झटके में बंद हो जाती है।

दिमाग पर बहुत जोर देने के बाद भी याद नहीं पड़ता कि किसी फिल्म में बाप ने अपनी बात मनवाने के लिए अपने बेटे को इतनी बड़ी रिश्वत दी हो। जमीन-जायदाद से बेदखल कर देना या दे देना तो चलता था, लेकिन एक हवाई जहाज गिफ्ट में दे देना। और वो भी सिर्फ इसलिए कि उसके बेटे को हवाई जहाज उड़ाने का शौक है। हो सकता है कि ये बात आप सहजता से न लें, लेकिन अगर ये फिल्म देखेंगे और उस संदर्भ को समझेंगे तो प्लेन वाली बात उतनी बड़ी नहीं लगेगी। क्योंकि ‘दिल धड़कने दो’ में मेहरा परिवार ऐसी बहुतेरी चौंकाने वाली बातों से भरा पड़ा है।

मिलिए, दिल्ली के एक पंजाबी परिवार, मेहरा परिवार से। परिवार के मुखिया हैं श्रीमान कमल मेहरा (अनिल कपूर) जो बरसों की मेहनत से अपने दम पर अरबपति बने हैं। ये बात वो दिन में दस बार अपने दोस्तों, ऑफिस में और घर में जताना नहीं भूलते। इनकी पत्नी नीलम मेहरा (शेफाली शाह) को अब रईसी की ‘आदत’ पड़ गयी और अब ये शान-ओ-शौकत उन पर फबती भी है, लेकिन कमल साहब इन पर भी रैब झाड़ते रहते हैं और मोटा न होने के नसीहत देते रहते हैं। इनका बिगड़ा नवाब है कबीर मेहरा (रनवीर सिंह), जिसे प्लेन उड़ाने का शौक है पर जनाब को धंधे की रत्तीभर भी अक्ल नहीं है। कमल-नीलम की शादी की 30वीं सालगिरह पर इनकी बेटी आयशा (प्रियंका चोपड़ा) ने शहर के कुछ रईसों के साथ पानी के जहाज पर दो हफ्तों तक घूमने का एक बेहद खर्चीला प्रोग्राम बना डाला है।

आयशा की मुंबई में एक धनी परिवार में शादी को चुकी है। उसका पति है मानव सांगा (राहुल बोस) जो वैसे तो ठीक-ठाक दिखता है, लेकिन अपना पौरुष दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ता। अब मेहरा साहब का दिल देखिये। एक तरफ उनकी कंपनी घाटे में जा रही है, जिससे उबरने के लिए वह ललित सूद (परमीत सेठी) की बेटी नूरी (रिदिमा सूद) से कबीर की शादी करने का प्लान बना रहे हैं और दूसरी तरफ क्रूज पर पार्टी के लिए करोंड़ों खर्च कर रहे हैं। मेहरा परिवार में क्या हो रहा है, क्या नहीं, इससे कबीर को कुछ लेना-देना नहीं है। उसे तो बस अपना प्लेन दिखता है, जो अब शायद जल्द ही बिक जाए। क्रूज पर नया ट्विस्ट आता है फराह अली (अनुष्का शर्मा) की एंट्री से जो वहां परफार्म करने वाले एक डांस ट्रप की लीड सिंगर है।

कबीर को पहली ही नजर में फराह से प्यार हो जाता है, लेकिन उसके मां-बाप नूरी से उसकी शादी पर अड़े हैं और नूरी की आंख लड़ जाती है राणा (विक्रम मैसी) से। देखते ही देखते बहुत कन्फ्यूजन हो जाता है और तभी एंट्री होती है सनी गिल (फरहान अख्तर) की। आयशा का पूर्व प्रेमी, जिसके जहाज पर आते ही आयशा एक बड़ा फैसला लेती है और पूरा मेहरा परिवार एक अजीब स्थिति में फंस जाता है।

बीते पन्द्रह सालों से फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी और जोया अख्तर मिल कर एक अलग तरह की शहरी फिल्मों का मुजाहिरा करते आ रहे हैं। ‘दिल चाहता है’, ‘लक्ष्य’, ‘हनीमून ट्रेवल्स’, ‘रॉक ऑन’, ‘लक बॉय चांस’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ सरीखी फिल्मों में एक तरह का ट्रेंड और ट्रीटमेंट देखने को मिला है। इस तिकड़ी की यह नई फिल्म भी ऐसी ही है। रिश्तों की डोर में बंधी ‘दिल धड़कने दो’ बेशक मौजूदा दौर की एक तस्वीर है, लेकिन ये फंडा है बहुत पुराना।

नया है तो इस फिल्म का ट्रीटमेंट। क्रूज पर छुट्टियां, तुर्की, फ्रांस, इटली, स्पेन जैसे देशों की सैर, स्टाइलिश मंहगे कपड़े, बड़े लोगों की बोल-चाल, उनका उठना-बैठना, वो अपने घरों में खाना कैसा खाते हैं, हंसते चेहरों के पीछे एक-दूजे की काट और कटाक्ष वगैराह इस फिल्म में सब कुछ है। लेकिन इस फिल्म से जो सबसे बड़ी उबर कर सामने आती है तो ये है कि उस धनाढय़ वर्ग की दिक्कतें भी मध्य वर्ग जैसी ही हैं। अपने घर की बेटियों-बहुओं, बेटों और उनके रिश्तों को लेकर मानसिकता भी लगभग मध्य वर्ग जैसी ही है।

फिल्म में एक सीन में आयशा अपनी मां से कहती है कि मां आपने पापा के बारे में सब जानते बूझते उनसे तलाक क्यों नहीं लिया। उसकी मां ने क्या कहा ये आप फिल्म में देखें तो बेहतर होगा, लेकिन टर्किश हमाम में फिल्माया गया ये सीन ये जता देता है कि हमाम में सब नंगे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि जोया अख्तर ने अपने किरदारों को पनपने को पूरा वक्त दिया है। उन्होंने किरदार गढ़े भी अच्छे से है, लेकिन 2 घंटे 51 मिनट की यह फिल्म कई जगह काफी सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ती है। इसकी लंबाई खिजाती-उकताती नहीं, लेकिन लगातार मनोरंजन भी नहीं करती। इसकी एक बड़ी वजह इसका कमजोर संगीत भी है।

अपनी पिछली फिल्मों की तरह अख्तर परिवार की इस फिल्म में कर्णप्रिय संगीत की कमी खटकती है। अभिनय की बात करें तो तमाम युवा चेहरों के बीच अनिल कपूर ने खुद को किसी स्तंभ की तरह पेश किया है। उनकी अदायगी बेहतरीन है और शेफाली शाह के साथ उनकी कैमिस्ट्री एक दम परफेक्ट रही है। इसके बाद रनवीर सिंह और प्रियंका चोपड़ा ने फिर से बांधे रखने का काम किया है। रनवीर के किरदार में हिचकिचाहट, खिलंदडमपन, उन्माद वगैराह है और प्रियंका एक जिम्मेदार और घुटन झेल रही महिला का चित्रण दर्शाने में कामयाब रही हैं। इन चार किरदारों के बल पर ‘दिल धड़कने दो’ एक अच्छी फिल्म बन पड़ी है। फिल्म विजुअली बेहद सुकून प्रदान करने वाली है और ये बताती है कि हम भारतीय किसी भी वर्ग के हों, हमारी दिक्कतें लगभग एक-सी ही होती हैं। चेहरे एक से भले न हो, लेकिन उनके पीछे छिपी मानसिकता तकरीबन एक-सी ही होती है। हम आज भी इस बात से ग्रस्त हैं कि ‘लोग क्या कहेंगे...’

कलाकार : प्रियंका चोपड़ा, रणवीर सिंह, अनुष्का शर्मा, फरहान अख्तर, अनिल कपूर, शेफाली शाह, राहुल बोस, रिदिमा सूद, परमीत सेठी, जरीना वहाब, विक्रम मैसी, मनोज पाहवा 
निर्देशन : जोया अख्तर
निर्माता : फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी
संवाद : फरहान अख्तर 
संगीत : शंकर-एहसान-लॉय
कहानी-पटकथा : रीमा कागती, जोया अख्तर
गीत : जावेद अख्तर
रेटिंग : 3.5 स्टार

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