DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रिलीज हो गई है 'फोर्स 2', फिल्म देखने जा रहे हैं तो पहले पढ़ें REVIEW

रिलीज हो गई है 'फोर्स 2', फिल्म देखने जा रहे हैं तो पहले पढ़ें REVIEW

फिल्म: फोर्स 2

सितारे: जॉन अब्राहम, सोनाक्षी सिन्हा, ताहिर भसीन, नरेन्द्र झा, आदिल हुसैन, फ्रेडी दारूवाला
निर्देशक: अभिनय देओ
निर्माता: विपुल अमृतलाल शाह, जॉन अब्राहम, वॉयकॉम मोशन पिक्चर्स 
संगीत: अमाल मलिक
गीत: रश्मि विराग, कुमार 
कहानी: परवेज शेख, जसमीत के. रीन  
रेटिंग: 2.5 स्टार 

जॉन अब्राहम और इस फिल्म की टीम द्वारा 'फोर्स 2' देश के जवानों को समर्पित की गई है। खासतौर से देश के ऐसे रक्षकों को, जिनकी शहादत अकसर गुनामी के अंधेरों में गुम हो जाती है। लोग उनके बारे में कुछ जान ही नहीं पाते। 

शायद एक आमजन के जेहन में ये सवाल उठे कि आखिर देश के ऐसे कौन से रक्षक हैं और किस कार्य में जुटे हैं, जिनकी शहादत से लोग वाकिफ नहीं होते। ऐसे लोगों का बलिदान क्यों व्यर्थ चला जाता है? निर्देशक अभिनय देओ ने 'फोर्स 2' के जरिए उन एजेन्ट्स या कहिए जासूसों पर फोकस किया है, जो काम तो देश के लिए करते हैं, लेकिन जब देश को उनकी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है तो उनसे पल्ला झाड़ लिया जाता है। 

ये कहानी शुरू होती है चीन में एक के बाद एक तीन भारतीय एजेन्ट्स की हत्या से। भारतीय खुफिया एजेन्सी रॉ के अनुसार चीन में भारत के 20 एजेन्ट्स थे, जिसमें से अब 17 बचे हैं। मरने वाले तीन एजेन्ट्स में से एक एजेन्ट हरीश (फ्रेडी दारूवाला) मरने से पहले एक किताब मुंबई में अपने दोस्त एसीपी यशवर्धन उर्फ यश (जॉन अब्राहम) को कूरियर करता है। इस किताब से यश को कुछ कोड मिलते हैं, जिनकी निशानदेही पर उसे बुडापेस्ट भेजा जाता है। 

दरअसल यश को रॉ चीफ अंजन दास (नरेन्द्र झा) द्वारी गठित एक टीम का हिस्सा बना कर बुडापेस्ट भेजा गया है, जिसे लीड कर रही है एक अन्य एजेन्ट केके (सोनाक्षी सिन्हा)। ये दोनों मिल कर सबसे पहले बुडापेस्ट में भारतीय एम्बेसी के लोगों पर नजर रखते हैं। इन्हें शक है कि एजेन्ट्स के बारे में जानकारी यहीं से लीक हुई है। छानबीन के बाद इनका शक एम्बेसी के एक कर्मी शिव शर्मा (ताहिर भसीन) पर जाता है, जिसकी छवि बेहद साफ है। 

शिव को अपने कब्जे में लेने के बाद उसे भारत लाने की तैयारी की जाती है, लेकिन इसी बीच एक अन्य एजेन्ट की हत्या कर दी जाती है। ये साफ हो जाता है कि ये सब शिव ही करवा रहा है। मौका पाकर शिव, यश-केके के चंगुल से भी भाग जाता है। किसी को नहीं पता कि वह कहां गया है। पूरे यूरोप में वह कहीं भी जा सकता है। अपना नेटवर्क वह कहीं से भी ऑपरेट कर सकता है। 

तभी यश को एक सुराग मिलता है। उसे पता चलता है कि शिव एक फर्जी पहचान और कागजातों के जरिए दूतावास में नौकरी पर लगा था। दरअसल उसका असली नाम रुद्रप्रताप है और उसका मकसद केवल एजेन्ट्स की हत्या करना नहीं, बल्कि देश के एक बड़े मंत्री को अपने निशाने पर लेना है। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि ये कहानी एक बार नहीं कई बार उत्साह भरती है। खासतौर से इंटरवल से पहले इस दो घंटे आठ मिनट की फिल्म की स्पीड काफी अच्छी। कुछ सोचने और समझने का मौका कम मिलता है, जिसकी वजह है कहानी में लगातार आते ट्विस्ट और इसका एक्शन। कोई और बात करने से पहले 'फोर्स 2' के सबसे मजबूत पक्ष यानी इसके एक्शन के बारे में बात करते हैं। 

बुडापेस्ट में जॉन, सोनाक्षी और ताहिर एक कार में हैं और तभी कुछ लोग उन पर हमला कर देते हैं। स्टेयरिंग सोनाक्षी के हाथों में है। ये पूरी चेजिंग बहुत दिलचस्प है और इसे निर्देशक ने भरपूर रोमांच से भर डाला है। इससे करीब 5-7 मिनट पहले एक और सीन है, जॉन और ताहिर के बीच। ये चेज सीन घरों की छतों पर है। इस लोकेशन पर कई अंग्रेजी फिल्मों की शूटिंग भी हुई है। इंटरवल से पहले के ये दो सीन पैसा वसूल हैं। 

एक्शन का रोमांच अंत तक बना रहता है, लेकिन जिस ढंग से फिल्म बाद में करवट लेती है, उससे मायूसी होती है। जॉन का किरदार केवल तब तक आप पचा सकते हैं, जब आप ये मानते रहेंगे कि एसीपी से एजेन्ट्स बने इस किरदार को जॉन अब्राहम जैसे 'शक्तिशाली' इंसान ने निभाया है। ये किरदार केवल उनके 'माचोइज्म' पर केन्द्रित है और उसी पर टिका भी है, इसलिए निर्देशक ने रॉ जैसे विषय संग डील करने के लिए जॉन के अलावा किसी चीज पर बहुत गहराई से फोकस ही नहीं किया है। यही वजह है कि फिल्म में केके जैसे किरदार के लिए वह सोनाक्षी सिन्हा को कास्ट कर बैठे।

सोनाक्षी इस रोल के लिए बिलकुल मिसफिट लगी हैं। इस किरदार में फुर्ती ही नहीं दिखती। ऐसा लगता है कि किसी कॉन्वेंट स्कूल की लड़की अपने रसूखदार पिता से जिद करके रॉ में भर्ती हो गई है। केके का किरदार देख अक्षय कुमार की फिल्म 'बेबी' में तापसी पन्नू द्वारा निभाया गया प्रिया सूर्यवंशी का किरदार याद आता है, जो बेहद तेजी के साथ आता है और चला जाता है। पर देर तक याद रह जाता है। सोनाक्षी की भरी पूरी काया पहली बार खटकी है। 

दूसरी तरफ शिव के किरदार में ताहिर भसीन एक कलाकार के रूप में जरूर थोड़ा बहुत प्रभावित करते हैं, लेकिन एक किरदार के रूप में वह प्रभावित नहीं कर पाते। ऐसी कोई वजह नहीं दिखती कि इस किरदार के उद्देश्य पर शक न किया जाए। आखिर एक चोट खाया इंसान इस स्तर पर इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है। फिल्म में ऐसी कुछेक असंभव और असहज सी बातें, जिसकी वजह से यह फिल्म एक औसत दर्जे की ही हो कर रह गई है। 

'फोर्स 2' केवल अपने एक्शन सीन्स की वजह से आकर्षित करती है। इसकी गति तेज है, ये इसका प्लस प्वाइंट हो सकता था। लेकिन यश का किरदार जॉन की अपनी बलशाली छवि से बाहर ही नहीं आ पाया है, इसलिए ये फिल्म जवानों के साथ-साथ जॉन अब्राहम के नाम... 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:film review john abraham force 2 is full of action and suspense