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हॉस्पिटेलिटी, सत्कार में है भविष्य की संभावना

जब से ट्रैवलिंग का स्कोप बढ़ा है और टूरिज्म एक बड़ी इंडस्ट्री के तौर पर स्थापित हुआ है, हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट का क्षेत्र एक नए और बेहतर करियर के तौर पर विकसित हो रहा है।

हॉस्पिटेलिटी वास्तव में मेजबान और मेहमान के बीच का एक रिश्ता है। यात्रा के दौरान जब आप होटल, रेस्तरां या क्लब आदि जगहों पर रुकते हैं तो वहां आपको किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो आपकी तमाम सुविधाओं का खयाल रखे। इसमें रिसेप्शनिस्ट से लेकर वेटर और टूरिस्ट गाइड तक शामिल हो सकते हैं। यह काम जितना प्रोफेशनल है, उतना ही मानवीय भी। अगर आपमें मेहमान का खयाल रखने, उसका सम्मान करने और अपने स्थान के बारे में संजीदगी से बताने की कला है तो आप इसमें करियर बना सकते हैं।

हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट इसी कला का व्यवस्थित अध्ययन है। मोटे तौर पर इसे होटल मैनेजमेंट या टूरिज्म का ही हिस्सा माना जाता है। इसके दायरे में होटल, रेस्तरां, समुद्री जहाज की यात्रा, एम्यूजमेंट पार्क, कन्वेंशन सेंटर, कंट्री क्लब आदि में दी जाने वाली हॉस्पिटेलिटी आती है। इस पेशे में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो सामने रह कर अतिथि या ग्राहक की सेवा करते हैं जैसे रिसेप्शनिस्ट, वेटर और टूरिस्ट गाइड आदि तो कुछ ऐसे, जो सामने तो नहीं आते, पर जिनका काम काफी महत्त्वपूर्ण होता है। इनमें प्लानर्स यानी योजना बनाने वाले लोग, जो एक साथ होटल या किसी दूसरी जगह पर रुकने वाले पूरे ग्रुप की हॉस्पिटेलिटी की जिम्मेदारी संभालते हैं।

जहां तक काम करने के विकल्पों का सवाल है तो इसमें आप अपनी रुचि के हिसाब से होटल, रेस्तरां या कैफे  में काम कर सकते हैं। इसके अलावा रिजॉर्ट और म्यूजियम (संग्रहालय) में भी मौके निकल सकते हैं। अगर आपको काम के साथ ही यात्रा का भी शौक है तो समुद्री जहाज पर काम करने का विकल्प भी हो सकता है। जाहिर है कि यह एक मुश्किल और जरूरत का काम है, इसलिए इसमें दक्ष लोगों की काफी मांग रहती है।
यह एक संजीदा तथा दूसरों को संतुष्ट करने का काम है, इसलिए सैलरी अच्छी होती है और समय -समय पर आपको काम का इनाम भी मिलता रहता है। फिर भी आप कितना पैसा कमा पाएंगे, यह पूरी तरह आपके काम की दक्षता और काम के प्रति आपके समर्पण पर निर्भर करता है। अगर आप निजी स्तर पर यह काम करना चाहें तो भी यह बेहतर विकल्प हो सकता है।

अगर आपने टूरिज्म में स्पेशल कोर्स किया है तो अपनी ट्रैवल एजेंसी भी खोल सकते हैं। इसमें अलग-अलग  काम के लिए अलग तरह के कोर्स और डिग्री की जरूरत पड़ती है। अगर आप होटल हाउसकीपिंग का काम करना चाहते हैं तो इसके लिए केवल हाईस्कूल पास होना जरूरी है, लेकिन अगर आप किसी होटल में शेफ बनना चाहते हैं तो इसके लिए पाक कला की डिग्री जरूरी है। अगर आप इस क्षेत्र में और आगे बढ़ना चाहते हैं तो साथ में होटल मैनेजमेंट कोर्स भी जरूरी होता है। टूरिज्म में डिग्री आपके करियर को आगे बढ़ाने में काम आ सकती है।

फैक्ट फाइल

संस्थान

ओबेरॉय सेंटर ऑफ लर्निग एंड डेवलपमेंट, दिल्ली, www.oberoihotels.com
आईएचएम, मुंबई, www.ihmctan.edu
आईएचएम, दिल्ली, www.ihmpusa.net
आईएचएम, औरंगाबाद,www.ihma.ac.in
आईएचएम, बेंग्लुरू www.ihmbangalore.kar.nic.in
आईएचएम, मद्रास
इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड फ्यूचर मैनेजमेंट ट्रेंड्स, चंडीगढ़, www.itftindia.com
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट, www.iittm.org

स्कॉलरशिप
लगभग सभी संस्थानों में स्कॉलरशिप की व्यवस्था होती है, जिसके लिए छात्र संबंधित संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं।

एजुकेशनल लोन
लगभग सभी बैंक डिग्री कोर्सेज के लिए लोन की सुविधा देते हैं, जिनकी राशि 10 लाख रुपये तक है। लोन की इस रकम में छात्रों के कोर्स की टय़ूशन फीस के अलावा, कंप्यूटर की खरीद, वाहन खरीद व विदेश में शिक्षा के लिए जाने वालों के लिए एक बार हवाई यात्रा का खर्च भी शामिल होता है।

अधिक जानकारी के लिए बैंकों के लोन विभाग से संपर्क किया जा सकता है।

संभावनाएं

होटल और संबंधित उद्योग में मैनेजमेंट ट्रेनी
होटल और अन्य सेवा क्षेत्र में अतिथि या कस्टमर रिलेशन एग्जिक्यूटिव
फास्ट फूड चेन्स में एग्जिक्यूटिव
होटल मैनेजमेंट या फूड क्राफ्ट संस्थानों में शिक्षक
एयरलाइंस में केबिन क्रू
क्रूज लाइंस में शेफ या केटरिंग ऑफिसर
होटल में मार्केटिंग या सेल्स एग्जिक्यूटिव
बार टेंडर
रिजॉर्ट्स या पर्यटन विकास निगमों में एग्जिक्यूटिव
टूर एंड ट्रैवल्स कंपनियों में एग्जिक्यूटिव या कंसल्टेंट
ट्रैवल एंड टूर बीपीओ
टूरिस्ट इंफॉर्मेशन ऑफिसर
एयरलाइंस ग्राउंड स्टाफ या राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड के प्रतिनिधि
अपना रेस्तरां या टूर कंपनी

वेतन का ग्रोथ चार्ट

छोटे शहरों में भी डिग्री या मैनेजमेंट कोर्स करने पर शुरुआती वेतन 10 हजार रुपये हो सकता है।
शॉर्ट टर्म, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करने पर शुरुआती वेतन 8 हजार रुपये हो सकता है।
किसी खास क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के साथ वेतन में 5 से 7 हजार की वृद्धि हो सकती है।
दो से तीन साल के अनुभव के साथ ही वेतन शुरुआती स्तर से 1.5 गुना हो जाता है।

एक्सपर्ट व्यू
इस क्षेत्र में ग्रोथ की बहुत उम्मीद
मनोज वर्मा, असिस्टेंट डीन, एआईटीएम, गुड़गांव

इस फील्ड में मुख्यत: चार सेक्शन होते हैं, जिनमें स्टूडेंट अपना करियर बना सकते हैं। फ्रंट ऑफिस, फूड एंड बेवरेजेज (सर्विस), फूड एंड बेवरेजेज (प्रोडक्शन), हाउस कीपिंग हॉस्पिटेलिटी के मेन पार्ट हैं। इसमें से किसी में भी आप कोर्स करने के बाद स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं।

भारत जैसे विविधताओं से भरे विकासशील देश में हॉस्पिटेलिटी के क्षेत्र में संभावनाओं के रास्ते दिन ब दिन खुलते ही जा रहे हैं। फूड एंड बेवरेजेज (सर्विस) में एक वेटर से शुरुआत करके जनरल मैनेजर तक तरक्की करते हुए जा सकते हैं। फूड एंड बेवरेजेज (प्रोडक्शन) सेक्शन में शुरुआत कॉमी (किचन में काम करने वाला कर्मी) से लेकर एग्जिक्यूटिव शेफ तक प्रमोशन होता है, जिसकी सैलरी भी काफी मोटी होती है।

हाउस कीपिंग से स्टार्ट करने वाला एग्जिक्यूटिव हाउसकीपर तक बन सकता है। इसी तरह से फ्रंट ऑफिस से करियर शुरु करने वाला स्टूडेंट भविष्य में जनरल मैनेजर तक की पोस्ट होल्ड कर सकता है। इसके अलावा होटल मैनेजमेंट का कोर्स करके छात्र अपना करियर सेल्स और मार्केटिंग में भी बना सकते हैं।

होटल के अलावा एविएशन, हॉस्पिटल, क्लब और ट्रैवल इत्यादि अनेक ऐसे ऑप्शन मौजूद हैं, जहां आप अपना करियर संवार सकते हैं। लेकिन इन सबके लिए लेंग्वेज पर पकड़ होना बहुत ही जरूरी है।

सक्सेस स्टोरी
नौकरी और बिजनेस साथ-साथ
मनीष सिंह, मैनेजर, रॉक्स होटल, लखनऊ

मनीष सिंह के पेरेंट्स नहीं चाहते थे कि वे हॉस्पिटेलिटी की फील्ड में जाएं, लेकिन मनीष अपना करियर इसी क्षेत्र में बनाना चाहते थे। इसके लिए किसी तरह उन्होंने अपने घर वालों को राजी किया और एक वर्षीय होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कोर्स करने के बाद गोरखपुर के एक थ्री स्टार होटल में बतौर असिस्टेंट काम शुरू किया।
बकौल मनीष, वे चाहते थे कि हॉस्पिटेलिटी के फील्ड में अपना कुछ बिजनेस शुरू कर सकें, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उनको सिर्फ 4000 रुपए में नौकरी जॉइन करनी पड़ी। लेकिन साथ ही उन्होंने अपने यार-दोस्तों से कुछ पैसों का प्रबंध करके अपनी ट्रैवल एजेंसी खोल दी।

शुरुआत में दो गाड़ियों से काम करने वाले मनीष की एजेंसी में आज 17 गाड़ियां शामिल हो चुकी हैं। मनीष ने अपने ट्रैवल बिजनेस को सुचारु रूप से चलाने के लिए नौकरी से किनारा कर लिया था। जब उनका बिजनेस जम गया तो उन्होंने कानपुर के एक होटल में दोबारा नौकरी जॉइन कर ली। मनीष बताते हैं कि इससे एक पंथ और दो काज करने में काफी सहायता  मिली। उन्होंने अपनी कम्युनिकेशन स्किल को बढ़ाने के लिए एक लोकल कोचिंग की भी सहायता ली, जिसके बाद उनको कई बड़े होटलों और हॉस्पिटल में इंटरव्यू देने में काफी मदद मिली। महज छह साल की मेहनत में ही वे आज होटल मैनेजर की पोस्ट तक पहुंच गए।

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