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भारत का दामाद हूं, घर में छला जाता हूं

लाइव हिन्दुस्तान टीम
Sat, 13 Feb 2010 08:20 PM
भारत का दामाद हूं, घर में छला जाता हूं

नेपाली भाषा में शपथ लेने के नेपाल के सुप्रीम कोर्ट का निर्देश मानने से इनकार करने पर उन्हें सजा भुगतनी पड़ी थी। हिन्दी में शपथ लेने पर परमानन्द झा को उपराष्ट्रपति के कई अधिकारों से वंचित कर दिया गया था। मधेशी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले श्री झा का भारत से निकट का रिश्ता है। उनकी ससुराल बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के बड़हरवा गांव में है। काठमांडू में नेपाल के उपराष्ट्रपति परमानन्द झा से रू-ब-रू हुए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के हिन्दी विभाग के शिक्षक डॉ. कल्याण कुमार झा।

पुन: उपराष्ट्रपति का दायित्व संभालने के लिए बधाई! हिन्दी में शपथ लेने के मामले के बारे में कुछ बताइए।
उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद मैंने हिन्दी में शपथ ली। इसका नेपाल के कुछ दलों ने पुरजोर विरोध किया। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सात दिनों के अन्दर पुन: शपथ लेने का आदेश दिया। शपथ नहीं लेने पर तमाम अधिकारों को निष्क्रिय करने का भी आदेश था। मैंने दोबारा शपथ नहीं ली। नतीजतन सात माह से उपराष्ट्रपति के दायित्वों से मुक्त रखा गया।

क्या अब यह कहा जा सकता है कि नेपाल में हिन्दी जीत गई?
शपथग्रहण से पहले मैं राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने की सूचना से अवगत करा चुका था। नेपाल की संसद ने सिर्फ हिन्दी ही नहीं, अपनी मातृभाषाओं को सम्मानित किया है। नेपाली संविधान में 92 मातृभाषाओं का उल्लेख है। इनमें हिन्दी का 16वां स्थान है। यह बहुत खुशी की बात है कि नेपाल में कोई भी जनप्रतिनिधि अब अपनी मातृभाषा में शपथ ले सकेगा।

आप उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। अधिकार से वंचित हुए। फिर अधिकार प्राप्त हुए। इस घटनाक्रम पर आपकी क्या प्रतिक्रिया?
देखिए! सच्चाई यह है कि नेपाल में गणतंत्र अभी शैशव अवस्था में है। भारत में 1950-55 में जो स्थिति थी, फिलहाल वही नेपाल की है। वैसे नेपाल के अंतरिम संविधान में जनता की भाषा, मातृभाषा और जनांदोलनों की भाषा को विशेष महत्व दिया गया है।

उपराष्ट्रपति के अधिकार से वंचित होने में अन्दर की कहानी क्या है?
हिन्दी में शपथ ग्रहण तो एक बहाना है। नेपाल में मधेशी अरसे से शोषित हैं। मधेशियों को अपमानित होने और दर्द सहने की आदत सी पड़ गई है। नेपाल में पहाड़ी और तराई का विभेद अभिशाप बन गया है। तराईवासी होने के कारण मुझे यह दिन देखना पड़ा। नेपाल में खुशहाली तभी संभव है, जब पहाड़ी और तराई का विभेद मिटेगा।

नेपाल में हिन्दी की वास्तविक स्थिति क्या है?
हिन्दी नेपाल में सबसे बड़ी सम्पर्क भाषा है। नेपाल में हिन्दी की उपेक्षा संभव नहीं है। यहां 40 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलते-समझते हैं। तराई क्षेत्र में यह सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा है। तराई क्षेत्र में हिन्दी के अतिरिक्त भोजपुरी, मैथिली और अवधी बोली जाती है।

हाल में नेपाल में भारत विरोधी स्वर उठने लगे हैं। आपका क्या कहना है?
भारत और नेपाल का संबंध बहुत पुराना है। इन दोनों देशों में बेटी-रोटी, शादी-ब्याह का रिश्ता है। नेपाल-भारत की 750 किमी की खुली सीमा रेखा है। नेपाल की तराई क्षेत्रों के बाशिन्दे और भारत की सीमावर्ती जिलों के निवासियों के बीच जाति और गोत्र के आधार पर आज भी शादी-ब्याह होते हैं। मेरी ससुराल भी भारत में है। इस रिश्ते से मैं भारत का दामाद हूं।

पर आपको इस रिश्ते का लाभ हुआ या नुकसान?
(हंसते हुए) भारत का दामाद हूं, इसलिए नेपाल में भी मुझे भारत का दामाद कहा जाता है। ससुराल से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन अपने घर नेपाल में ही छला जाता हूं। मेरे ससुर नर्मदेश्वर झा पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता हैं।

आप न्यायाधीश भी रहे हैं। इस पूरे प्रकरण पर कोई कानूनी टिप्पणी?
अन्तत: सत्य की जीत होती है।

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