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मैगी से मोहभंग

लोकप्रिय उत्पाद मैगी में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) और सीसे की अधिक मात्रा पाए जाने पर जितनी खलबली मची है, उसकी वजह मैगी की असाधारण लोकप्रियता है। मैगी में हानिकारक तत्वों के पाए जाने से समाज के बहुत बड़े हिस्से को सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक झटका लगा है। मैगी यूं तो बाजार में पाए जाने वाले तमाम फास्ट फूड उत्पादों में से एक है, लेकिन उसकी स्थिति अलग इसलिए है कि उसने घर-घर की रसोई में अपनी जगह बना ली थी। देश में अनेक नौजवानों के लिए वह एक बड़ा सहारा थी, खासकर जो अकेले रहते हैं। कई दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों के लिए सिर्फ मैगी मिलती है, क्योंकि इसका भंडारण करना और इसे पकाना बहुत आसान है। मैगी के विज्ञापनों का जोर ही 'सिर्फ दो मिनट' पर था, यानी इसमें सिर्फ उबलता हुआ पानी डालना है और दो मिनट में यह तैयार हो जाएगी। ज्यादातर भारतीयों को नूडल्स खाना मैगी ने ही सिखाया, बहुत से लोग तो किसी भी किस्म के नूडल्स को मैगी ही कहते हैं।
यह भारत की कई प्रयोगशालाओं में पता चला है कि मैगी में एमएसजी और सीसे की अधिक मात्रा है और यह इसे बनाने वाली कंपनी की लापरवाही को दिखाता है। यह समझना थोड़ा मुश्किल है कि मैगी में सीसा कहां से आया? हो सकता है कि जो मसाले मैगी में मिलते हों, उनमें सीसा हो या जिस पानी का इस्तेमाल इसके उत्पादन में होता हो, उसका स्रोत प्रदूषित हो। हालांकि कुछ हद तक सीसा कृषि उत्पादों में पाया जाता है, लेकिन उससे ज्यादा यह खतरनाक हो जाता है। एमएसजी की स्थिति अलग है। एमएसजी या अजीनोमोटो के सुरक्षित होने पर विवाद है और यह अंतिम फैसला नहीं हो पाया है कि स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर होता है या नहीं। लेकिन सावधानी के चलते हर जगह यह कहा जाता है कि इसका एक सीमा से ज्यादा इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। हम लोग आमतौर पर मानते हैं कि मीठा, कड़वा, खट्टा, कसैला, नमकीन और तीखा, ये छह स्वाद होते हैं। लेकिन अब माना जाता है कि एक सातवां स्वाद भी होता है, जिसे 'उमामी' कहते हैं। जिन खानों में स्वाभाविक रूप से यह स्वाद नहीं होता, उनमें इस स्वाद के लिए अजीनोमोटो डाला जाता है। भारतीय 'उमामी' के बारे में ज्यादा नहीं जानते, लेकिन यह स्वाद भारतीयों में बहुत लोकप्रिय है। इसीलिए हमारे खानों में टमाटर का बड़ा महत्व है। लैटिन अमेरिका से आया यह फल यूरोप में इतना लोकप्रिय नहीं हो पाया, उसका कैचअप बनाने के आगे यूरोपीय नहीं बढ़े, लेकिन भारतीयों ने दाल, सब्जी, चटनी हर चीज में टमाटर का खूब इस्तेमाल किया। भारत में कथित चीनी खानों की लोकप्रियता का राज भी यही स्वाद है। देश में पांच सितारा होटल से लेकर सड़क किनारे नूडल्स और बर्गर बेचने वाले ठेले तक में अजीनोमोटो उदारता से इस्तेमाल होता है।

बेशक, बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए, लेकिन वास्तविकता यह है कि ज्यादातर कंपनियां जिस देश में जितनी कड़ाई हो, उतनी ही हद तक नियमों का पालन करती हैं। आमतौर पर हम अपने पर्यावरण या अपने खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता और शुद्धता के प्रति बहुत सतर्क नहीं हैं, तो किसी एक कंपनी के किसी एक उत्पाद की गुणवत्ता पर विवाद खड़ा करने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा। और क्यों मैगी में गड़बड़ी पाने के लिए बाराबंकी के किसी फूड इंस्पेक्टर की सतर्कता पर निर्भर रहना पड़े, ऐसे उत्पादों की केंद्रीय स्तर पर नियमित जांच का इंतजाम भला क्यों नहीं होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता आश्वस्त रह सकें?

 

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  • Web Title:मैगी से मोहभंग