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बड़े खिलाड़ियों की सलाह

भारतीय क्रिकेट को नियंत्रित करने वाली संस्था बीसीसीआई ने सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण का सलाहकार मंडल बनाकर एक अच्छा काम किया है। बीसीसीआई के मुताबिक, खेल से संबंधित हर विषय पर इस मंडल की राय ली जाएगी और इसके अलावा टीम के युवा खिलाड़ी भी इन वरिष्ठ खिलाडि़यों से सलाह ले सकते हैं। इन तीनों खिलाडि़यों की उपलब्धियों पर कोई शक नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, इन खिलाडि़यों की ख्याति विनम्र और सुसंस्कृत होने के लिए भी है। ये ऐसे खिलाड़ी हैं, जो भारतीय क्रिकेट की ग्लैमर और पैसे की दुनिया के शीर्ष पर रहे हैं, फिर भी जिनके पैर हमेशा जमीन पर बने रहे। ऐसे में, नए खिलाडि़यों के लिए ये खिलाड़ी मिसाल की तरह हैं। इस सलाहकार मंडल के बनाए जाने से शायद सौरव गांगुली के भारतीय टीम के कोच बनने की संभावना खत्म हो गई है। इस बात की चर्चा थी कि शायद सौरव गांगुली को टीम इंडिया का कोच बनाया जा सकता है। गांगुली कोच बनने के लिहाज से अच्छी पसंद थे। गांगुली भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से रहे हैं और उनकी नेतृत्व क्षमता पर किसी को शक नहीं हो सकता। वह खेल की बारीकियों को समझते हैं और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रख सकते हैं। लेकिन हो सकता है कि बीसीसीआई मौजूदा इंतजाम को ही जारी रखने की सोच पर चल रहा हो, जिसमें रवि शास्त्री सहायक कोचिंग स्टाफ के सहारे क्रिकेट निदेशक बने हुए हैं।

वरिष्ठ खिलाडि़यों के अनुभव का लाभ बीसीसीआई को जरूर उठाना चाहिए, लेकिन यह सलाहकार मंडल सिर्फ दिखावे के लिए न रह जाए या इसे छोटे-मोटे बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारतीय क्रिकेट इस वक्त विश्व क्रिकेट का पॉवर हाउस बना हुआ है, लेकिन उसमें बुनियादी बदलावों की जरूरत है। सबसे बड़ी जरूरत यह है कि क्रिकेट और पैसे में क्रिकेट का वर्चस्व कायम होना चाहिए। इस नजरिये से भारत को अपना अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर नए सिरे से तय करना चाहिए, ताकि खिलाड़ी ताजा दम बने रहें और दर्शकों में भी उत्साह बना रहे। इस कैलेंडर को बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, हर साल कुछ वक्त तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भी जरूर खेलें। इससे घरेलू प्रतियोगिताओं का आकर्षण और महत्व बढ़ेगा, जो दिनोंदिन घटता जा रहा है। अगर क्रिकेट की बुनियाद और दर्शकों के प्रति प्रतिबद्धता का ख्याल नहीं रखा गया, तो इसका दूरगामी असर क्रिकेट पर अच्छा नहीं होगा। बीसीसीआई के नए अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के पिछले कार्यकाल के दौरान ही भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौजूदा हैसियत हासिल हुई थी। डालमिया क्रिकेट राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं, लेकिन खेल और खिलाडि़यों के प्रति उनका लगाव भी जाहिर है। अपने इस कार्यकाल में भारतीय क्रिकेट की विश्वसनीयता को फिर से बनाना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए, इन बड़े खिलाडि़यों का अनुभव और साख इस नजरिये से बहुत उपयोगी है।

भारतीय क्रिकेट बल्लेबाजों पर केंद्रित है और हमारे पास अच्छे गेंदबाजों की कमी है। बिना अच्छी गेंदबाजी के ठीकठाक टीम तो बन सकती है, लेकिन लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली बड़ी टीम नहीं बन सकती। अच्छा होता, अगर गेंदबाजों का भी एक ऐसा मंडल बनाया जाता या इस मंडल में किसी गेंदबाज को भी शामिल किया जाता। भारत में और भी कई बड़े खिलाड़ी हैं, जिनके अनुभव का फायदा बीसीसीआई को लेना चाहिए। खेल को चलाने में खिलाडि़यों की भूमिका जितनी ज्यादा होगी, उतना ही खेल के लिए अच्छा होगा।

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  • Web Title:बड़े खिलाड़ियों की सलाह