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जागते रहो

कई राजनेताओं के बारे में प्रसिद्ध है कि वे बिना थके और बहुत कम सोकर लगातार काम कर सकते हैं। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में यह कहा जाता था कि वह रात में सिर्फ चार घंटे सोते थे। राजीव गांधी के बारे में भी कुछ इस तरह की बातें सुनी जाती हैं। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में यह कहा जाता है कि वह पूरे दिन में लगातार अठारह घंटे तक काम करते हैं। ऐसे में, सोने का वक्त उनके पास भी कम ही रहता होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा कहते हैं कि वह कोशिश करते हैं कि रात में कम से कम छह घंटे सो लें, लेकिन ऐसा कम ही मुमकिन हो पाता है। खास तौर पर चुनाव प्रचार में राजनेता जैसे दिन-रात काम करते हैं, उस दौरान भी कई राजनेता सोने का वक्त मुश्किल से निकाल पाते होंगे। डॉक्टर यह बताते हैं कि कम सोने से क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में, ये राजनेता कैसे काम चलाते हैं?

इसमें शक नहीं कि सत्ता और सफलता इंसान को अतिरिक्त ऊर्जा से भर देती है। महाभारत में भी उल्लेख है कि सफलता में ऐसा तत्व है कि इंसान थकान महसूस नहीं करता। कई राजनेता जब तक सत्ता में रहे हमेशा ऊर्जावान और सक्रिय दिखते थे, लेकिन जैसे ही सत्ता से बाहर हुए, तो अचानक उनकी ऊर्जा खत्म हो गई। दरअसल, शरीर और दिमाग का रिश्ता ऐसा है कि दोनों एक-दूसरे को अतिरिक्त क्षमतावान बना सकते हैं। दिमाग में कुछ रसायन होते हैं, जिन्हें एंडोर्फिन कहा जाता है। एंडोर्फिन जब ज्यादा मात्रा में होते हैं, तो इंसान खुश, आशावादी और सक्रिय महसूस करता है। इसका उल्टा भी सही है। सफलता या सत्ता का एहसास इंसानी दिमाग में एंडोर्फिन ज्यादा स्रावित करता है और इस वजह से इंसानी शरीर थकान या सुस्ती महसूस नहीं करता। इसीलिए सफलता का एहसास या सफलता की उम्मीद इंसान से बिना थके, बिना सोए काम करवा लेती है। इस वजह से यह संभव है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे या सत्ता के लिए संघर्ष करते हुए लोग कम नींद से काम चला लेते हों। इसके अलावा, यह आम अनुभव है कि जो व्यक्ति ऐसा काम कर रहा है, जो उसे प्रिय है, तो उसके अंदर काम को लेकर उत्साह रहता है, जिससे उसे नींद और थकान कम सताती है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति बेमन से या नीरस लगने वाला काम कर रहा हो, उसे नींद और थकान ज्यादा सताती है।

सोने और जागने की अवधारणा भी समय के अनुसार बदलती रही है। हाल-फिलहाल तक लोगों को कम सोने और जागने के उपदेश दिए जाते थे, लेकिन अब वैज्ञानिकों की फिक्र यह है कि लोग कम सो रहे हैं और इससे समाज की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। पहले बिजली नहीं होती थी, न टीवी और इस किस्म के मनोरंजन के साधन थे। जीवन भी इतना भागदौड़ वाला नहीं होता था। इसलिए लोग अंधेरा होने पर जल्दी सो जाते थे। अब बिजली ने रात में भी तेज रोशनी का इंतजाम कर दिया है, टीवी का प्राइम टाइम रात बारह बजे तक हो गया है, जिंदगी में भागदौड़ बढ़ गई है, इसलिए बड़ी संख्या में लोग सात घंटे से कम सोते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कम से कम सात घंटे की नींद हर वयस्क के लिए जरूरी है। नींद में सिर्फ शरीर को आराम नहीं मिलता, बल्कि दिमाग भी अपनी स्मृतियों, ज्ञान व जानकारी को व्यवस्थित करता है। जानवरों पर किए गए प्रयोगों से यह पता चला है  कि नींद में दिमाग ऐसे हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालता है, जो अल्जाइमर्स जैसे रोगों को पैदा करते हैं। इसलिए नेता हों या जनता, दोनों के लिए मुफीद यही है कि वे पूरी नींद लें। इससे दिमाग और शरीर, दोनों तरोताजा और स्वस्थ रहते हैं।

 

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