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स्मार्ट बनेगा मेरा शहर

मैं जिस शहर का बाशिंदा रहा हूं भारत में, वहां के अधिकतर लोगों की कुलजमा पूंजी ही फुरसत है, यानी आराम। मेरा शहर अजब मिजाज के लोगों का शहर है। साइकिल होते हुए भी उसे हाथ से लुढ़काते हुए पैदल चलने वालों का शहर, सब्जी-भाजी खरीदने जाने को भी काम समझने वालों का शहर और ऐसे काम पर जाते वक्त भी 10 मिनट पुलिया पर बैठकर सुस्ताने वालों का शहर।

सुबह से चाय की दुकान पर बैठ अखबार पढ़कर उसकी खबरों का विश्लेषण करते-करते शाम के अखबार के इंतजार में दिन बिता देने वालों का शहर। बाप-दादाओं के छोड़े मकान और दुकान से आने वाले किराये पर सारा जीवन गुजार देने वालों का शहर। दोस्ती और रिश्तेदारी निभा ले जाने वालों का शहर।

मुहल्ले की शादी, मरनी-करनी में अपने घर-द्वार की चिंता किए बिना नि:स्वार्थ हफ्तों आहुत कर देने वालों का शहर। आप सोच रहे होंगे कि मैं आखिर अपने शहर का इतना बखान करने में क्यों लगा हूं? दरअसल, हमारे शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चुना गया है। इस शहर में 1997 में भयंकर भूकंप आया था, मगर यह भूकंप के पहले जैसा था, वैसा ही उसके बाद भी रह गया... कहते हैं कि सरकार ने 300 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा था। स्मार्ट सिटी के लिए कितने का बजट प्रावधान है, पता करता हूं आज ही!
 उड़न-तश्तरी में समीर लाल ‘समीर’
 

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  • Web Title:my city will become smart