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झुमका गिरा रे, साहित्य के बाजार में

चाहे कवि धिक्कारें या आलोचक शाप दें, लेकिन मुझे हिंदी का सबसे बड़ा कवि मिल गया है। मैं उसके गीत पर रिसर्च करने जा रहा हूं। उसे डिकंस्ट्रक्ट करने जा रहा हूं। फिर पाप कल्चर के बीच उसकी आइकनिंग को तय करने जा रहा हूं। मैं उसमें सबाल्टर्न का तड़का भी लगाऊंगा, गीत की नायिका व झुमका, दोनों की गति सबाल्टर्नी हैं। इसमें स्त्रीत्ववादी पाठ की पूरी संभावना है, क्योंकि इस गीत में मर्दाना मिसोजिनिस्टिक पाठ सक्रिय है।

बरेली की जनता अब तक झुमका संबंधी सवालों से परेशान रहती थी। कोई टूरिस्ट बरेली आता, तो पहला सवाल यही पूछता कि साधना का झुमका बरेली के कौन से बाजार में गिरा था? लाजवाब बरेली वाले मुंह ताकते रह जाते थे। उनको पता ही नहीं कि झुमका कहां गिरा था?

झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में  नामक गीत मूलत: साठोत्तरी है, जिसे राजा मेहदी अली खां ने लिखा था। इसमें साठोत्तरी कविता के सारे तत्व मौजूद हैं। 1966 में मेरा साया  फिल्म के इस गीत की धुन मदन मोहन ने बनाई थी, जिसे आशा भोंसले ने गाया था। बिनाका गीतमाला ने पूरे साल इसे चार्ट बस्टर की तरह बजाया था। गाना लोगों की जुबान पर इतना चढ़ा कि खुद बरेली वाले पूछते कि किस बाजार में गिरा?
 जो सवाल सन छियासठ में राजा मेहदी अली खां ने उठाया, उसका जवाब अब लगभग पांच दशक बाद मिला। लंबी रिसर्च के बाद तय पाया गया है कि वह बरेली के डेलापुर के तिराहे पर गिरा। बरेली वालों ने तय किया है कि उसी डिजाइन के झुमके को डेलापुर के उसी तिराहे पर चौदह मीटर की जगह में रखा जाए, जहां वह गिरा था। वे उसे वहां बड़े साइज में लटकाने जा रहे हैं, ताकि कोई पूछे, तो कहा जा सके कि उसका स्मारक बना है, जाकर देख लो।

लेकिन मेरी रिसर्च इस बिंदु से आगे जाती है। अब कुछ नए सवाल पूछे जाने हैं, ताकि झुमके के गिरने संबंधी तमाम संदर्भ खुल जाएं।
पहला सवाल यह है कि उस इतिहास प्रसिद्ध झुमके का कारीगर कौन था? दूसरा, वह  कितने तोले का था? उसका सोना कितने कैरेट का था? झुमका किस कान से गिरा- दाएं वाले से कि बाएं वाले से? यह एक जरूरी आइडियोलाजिकल सवाल है। क्या उसका गिरना नायिका ने महसूस किया? क्या इसकी रपट थाने में लिखवाई गई?

इस पाइंट से मेरी रिसर्च फेमिनिज्म व कुछ झुमके की पालिटिकल इकोनामी की ओर मुड़ती है, जिसमें पहला सवाल उठता है कि क्या झुमके का कांटा ढीला था कि गिर गया? नायिका ने उसकी शिकायत क्यों नहीं की? सुनार से ठीक क्यों नहीं करवाया? गाना बताता है कि 'वा की छोरी'  का झुमका 'जोरा जोरी' में गिरा, तो क्या किसी मर्दवादी ने सरेआम 'जोरा जोरी' की? तब उसकी रपट क्यों नहीं लिखवाई गई? यह उसका शोषण नहीं, तो और क्या है? गाने से पता चलता है कि घर की छत पर मैं खड़ी गली में दिलवर जानी  और हंसके बोले नीचे आ, अब नीचे आ दीवानी।  जब नायिका ने रेजिस्ट किया, तो ढीठ मर्द पूछता है- फिर क्या हुआ? सताई नायिका रिपीट करती है- झुमका गिरा रे... गीत का यह स्थायी मर्दवादी मिसोजिनिस्टिक व्यवहार का परिणाम था, और है। यह सब होता रहा, और लोग देखते रहे। क्यों? इसकी भी जांच हो कि कहीं झुमका स्त्री की कैद तो नहीं या कि उसका अपना नया स्पेस है, जिस पर मर्दवाद का दबाव है, जिससे फाइट है।

ध्यान रहे कि गिरने वाला वह झुमका शुद्ध 'मेक इन इंडिया' था। उसे 'रिवाइव' किया जाए और बरेली को 'झुमका रत्न' से सम्मानित किया जाए।

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  • Web Title:jhumka gira re in literature market