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निगम-जिप विवाद से बेकारबांध सौंदर्यीकरण पर ग्रहण

नगर निगम और जिला परिषद विवाद के कारण शहर के बीचोबीच स्थित बेकारबांध तालाब के सौंदर्यीकरण पर ग्रहण लगता दिख रहा है। पिछले हफ्ते मेयर शेखर अग्रवाल ने तालाब सौंदर्यीकरण योजना का शिलान्यास किया था। लेकिन जिला परिषद द्वारा मालिकाना हक को लेकर किए गए विवाद से सौंदर्यीकरण पर ग्रहण लगता दिख रहा।

नगर निगम द्वारा बेकारबांध तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए तीन करोड़ की योजना बनाई गई है। लेकिन इसी बीच जिला परिषद ने नगर निगम को तालाब सिर्फ सौंदर्यीकरण के लिए ही एनओसी देने को तैयार है। तालाब पर मालिकाना हक छोड़ने के लिए तैयार नहीं।

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शहर के तालाबों पर है नगर निगम का दावा

राज्य सरकार ने शहर के सभी तालाबों को नगर निगम को हैंडओवर करने का आदेश दिया है। लेकिन जिला परिषद यह आदेश मानने को तैयार नहीं है। नगर आयुक्त ने सरकार के आदेश की प्रति लगाकर पत्र लिखा है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। शहर में 80 सरकारी तालाब हैं जिनपर नगर निगम ने अपना दावा किया है। पब्लिक सेक्टर की कंपनियों और निजी तालाब पर नगर निगम का दावा नहीं बनता है।

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बेकारबांध तालाब में क्या-क्या बनेगा

- तालाब में जितनी नालियां गिरती है उसे एक चैनल से जोड़कर मुहाने पर सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा।

- तालाब के एक छोर पर स्थित मंदिर के बगल में फूड कोर्ट बनाया जाएगा, जहां तरह-तरह के व्यंजन मिलेंगे।

- जेल की दीवार की ओर सब्जी बागान है, इसे हटाकर वहां चिल्ड्रेन पार्क बनाया जाएगा।

-ऑपेन थियेटर का भी निर्माण होगा जहां समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

- तालाब के चारो ओर साइकिल ट्रैक और मोर्निंग वाकर के लिए जोगिंग ट्रैक बनाया जाएगा।

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वर्जन

मनोज कुमार, नगर आयुक्त धनबाद :- सरकार का आदेश है कि निगम क्षेत्र की तालाब पर नगर निगम का हक रहेगा। बेकारबांध का टेंडर होने के बाद जिला परिषद उसपर दावा कर रहा है। संवेदक भी डर से काम नहीं शुरू कर पा रहे हैं।

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  • Web Title:Eclipse on unmodified beautification by corporation-zip controversy