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समुद्र में डूबा सिंधुरक्षक, 18 नौसैनिकों के मरने की आशंका

समुद्र में डूबा सिंधुरक्षक, 18 नौसैनिकों के मरने की आशंका

नौसेना को उस समय बड़ा झटका लगा जब मंगलवार मध्यरात्रि के बाद यहां एक पनडुब्बी में विस्फोट होने के बाद आग लग गई और वह डूब गई। इस हादसे में तीन अधिकारियों समेत 18 नौसैनिकों के मरने की आशंका है।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि रूस में निर्मित सिंधुरक्षक पनडुब्बी में मध्यरात्रि के कुछ ही देर बाद विस्फोट होने से भयंकर आग लग गई। हादसे की टीवी फुटेज में कोलाबा इलाके में आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई गई हैं। कोलाबा में ही नौसेना गोदी स्थित है। 

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि डीजल जनरेटर और विद्युत बैटरी से चलने वाली 2300 टन की इस पनडुब्बी में 18 लोग सवार थे। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने किलो वर्ग के युद्धपोत आईएनएस सिंधुरक्षक में आग लगने से लोगों की मौत होने की पुष्टि की है लेकिन उन्होंने हताहतों की संख्या की कोई जानकारी नहीं दी।

एंटनी ने मुंबई के रवाना होने से पहले संसद में संवाददाताओं से कहा कि मैं नौसेना के उन जवानों के लिए दुखी हूं जिन्होंने देश की सेवा में अपनी जान गंवा दी। यह नौसेना के बड़ी त्रासदी है।

इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दुर्घटना की जानकारी दी। नौसेना के चीफ एडमिरल डीके जोशी भी मुंबई पहुंच चुके हैं। नौसेना के सूत्रों ने बताया कि धमाका 16 साल पुरानी पनडुब्बी के आगे के भाग में हुआ जिसमें विस्फोटक रखे हुए थे। उन्होंने बताया कि नौसेना ने विस्फोट होने और इसके बाद उसमें आग लगने की घटना की जांच के लिए बोर्ड ऑफ इनक्वायरी के आदेश दिए हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि नौसेना गोदी और मुंबई फायर ब्रिगेड के दमकलकर्मियों को तत्काल राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया। रक्षा विभाग ने एक बयान में कहा कि विस्फोट के कारण पनडुब्बी डूब गई, इसका सिर्फ एक हिस्सा ही जल की सतह के ऊपर दिखाई दे रहा है। यह पनडुब्बी तीन से चार महीने पहले रूस में बड़े उन्नयन कार्यक्रम के बाद वापस लौटी थी और उसमें शक्तिशाली हथियार थे। नौसेना सूत्रों ने कहा कि दुर्घटना के समय आईएनएस सिंधुरक्षक सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था। यह घटना ऐसे समय हुई है जब नौसेना पनडुब्बी बेड़ों के कम होने की समस्या से जूझ रही है।

आईडीएसए के निदेशक कोमोरेड (सेवानिवृत्त) उदय भास्कर ने कहा कि नौसेना के पनडुब्बी बेड़े कम हो रहे है और परिचालन बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिंधुरक्षक के साथ दुर्घटना के नकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे। इस बीच वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) एके सिंह ने कहा कि पनडुब्बी में आंतरिक विस्फोट का कारण किसी वस्तु का खराब हो जाना या मानक परिचालन प्रक्रिया का पालन नहीं करना हो सकता है।

उन्होंने संदेह जताया कि बैटरियों को चार्ज करने के दौरान हाइड्रोजन गैस पैदा होने से आग लग सकती है जो युद्धपोत के मिसाइल कक्ष तक फैल गई होगी जिससे विस्फोट हुआ होगा। आईएनएस सिंधुरक्षक में 2010 में भी आग लगी थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो अन्य लोग घायल हो गए थे। यह दुर्घटना बैटरी बाक्स में विस्फोट के कारण हुई थी।

1980 के दशक की शुरुआत में हुए समझौते के तहत भारत 2300 टन की पनडुब्बी रूस से लाया था और इसे 1997 में परिचालन में लाया गया था। नौसेना के पूर्व चीफ एडमिरल (सेवानिवृत्त) सुशील कुमार ने कहा कि सिंधुरक्षक का दुर्घटनाग्रस्त होना बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

सिंधुरक्षक की सर्विस हिस्ट्री : खास बातें

* INS सिंधुरक्षक [S 63] सिंधुघोष वर्ग की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी
* इसका निर्माण रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एडमिरल्टी शिपयार्ड के द्वारा
* फरवरी 2010 में भी विशाखापत्तनम में तैनाती के दौरान लगी थी आग जिसमें एक नौसैनिक की मौत हुई थी और दो घायल हुए थे
* 2010 में आग पनडुब्बी के बैटरी कंपार्टमेंट में विस्फोट के कारण लगी थी
* इस आग से हुई क्षति की मरम्मत तथा इसे और बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने  रूस के जेजडोचका शिपयार्ड के साथ 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर [करीब 500 करोड़ रुपए] का करार किया
* करीब ढाई वर्षों तक चले मरम्मत और आधुनिकीकरण के बाद अक्टूबर 2012 में इसका पुन: ट्रायल शुरू हुआ
* मरम्मत और आधुनिकीकरण के बाद 27 जनवरी, 2013 को इसे भारत को सौंपा गया और इसकी सेवा अवधि 10 वर्ष आंकी गई थी।

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