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प्रधानमंत्री ने कहा, साइंस करेगा सपना पूरा

प्रधानमंत्री ने कहा, साइंस करेगा सपना पूरा

विश्वविद्यालयों को अधिक अकादमिक स्वतंत्रता तथा स्वयत्तता दिए जाने की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के लिए अत्यधिक नियमन तथा कठिन प्रक्रियाओं को दूर करने का वादा किया।

विश्वविद्यालयों को मिलें अकादमिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता
मोदी ने यहां 102वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा, हम चाहते हैं कि हमारे वैज्ञानिक सरकार की प्रक्रियाओं की नहीं, बल्कि विज्ञान की गुत्थियां सुलझाएं। उन्होंने कहा, अनुसंधान के हमारे संस्थान अधिक व्यापक होने चाहिए। हमारे विश्वविद्यालयों के पास उच्च स्तरीय अकादमिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके एवज में विश्वविद्यालयों को अकादमिक उत्कृष्टता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को स्वीकार करना चाहिए।
 
कारोबार की तरह अनुसंधान में भी सहूलियत जरूरी
अनुसंधान के लिए धन मिलने एवं अनुमति की प्रक्रिया में विलंब सहित देश के वैज्ञानिक समुदाय की लालफीताशाही की शिकायतों के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने जोर दे कर कहा कि अनुसंधान करने की सहूलियत उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी महत्वपूर्ण कारोबार करने की सहूलियत है। मोदी ने कहा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बड़े स्रोत के तौर पर सरकार को अपनी ओर से यह करना चाहिए। जब मैं भारत में कारोबार करना आसान बनाने की बात करता हूं तो मैं इतना ही ध्यान भारत में अनुसंधान एवं विकास को आसान करने पर देना चाहता हूं।

वैज्ञानिकों को बनाएं रोल मॉडल
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, हमारे बच्चों को चाहिए कि खिलाड़ियों की तरह ही वे वैज्ञानिकों को भी रोल मॉडल के तौर पर देखें। भारतीय वैज्ञानिकों के काम की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने कई क्षेत्रों में हमें सबसे आगे रखा। उन्होंने कहा हमारे वैज्ञानिकों ने पहले ही प्रयास में मंगलयान को कक्षा में स्थापित कर दिया।

विज्ञान से ही प्रगति
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति और विकास विज्ञान से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी, नैनो विज्ञान, कृषि और क्लीनिकल अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास के लिए स्पष्ट नियामक नीतियों का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सरकारी विभाग में एक अधिकारी ऐसा होना चाहिए जो उसके कार्य क्षेत्र से संबंधित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करे तथा अपने बजट का एक फीसदी इन गतिविधियों के लिए आवंटित करे।

विज्ञान-प्रौद्योगिकी में हों निवेश
मोदी ने कहा कि देश में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को हमें विश्वविद्यालयी तंत्र में सबसे आगे रखना होगा।
प्रधानमंत्री ने भारतीय उद्योग जगत से उसके हितों को देखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के अपने फर्मास्युटिकल उद्योग ने विश्व में अपने लिए खुद जगह बनाई है, क्योंकि उसने अनुसंधान में उल्लेखनीय निवेश किया। मोदी ने कहा कि चीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी प्रगति के समानांतर दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा।

'मैं आपका समर्थक'
प्रधानमंत्री ने कहा आपको मुझसे बेहतर समर्थक नहीं मिलेगा। इसके एवज में मैं भारत में बदलाव लाने में आपकी मदद का आकांक्षी हूं। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से कहा कि उनकी उपलब्धियों का जश्न उसी तरह मनाया जाना चाहिए जिस तरह हम अन्य क्षेत्रों में अपनी सफलता का जश्न मनाते हैं।
मोदी ने कहा हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सबसे उपर रखने की जरूरत है। इससे भी आगे, हमें भारत में विज्ञान एवं वैज्ञानिकों का गौरव और प्रतिष्ठा बहाल करनी चाहिए।

गरीबों को मिले विज्ञान का लाभ
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक कामकाज का केंद्र बिंदु मानव विकास रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने हमें भूख पर विजय हासिल करने, बीमारियों का मुकाबला करने में मदद करने के साथ साथ स्वच्छ ऊर्जा भी दी है। मोदी ने वैज्ञानिकों से ज्यादा उचित, प्रभावी, टिकाऊ एवं किफायती प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए पारंपरिक स्थानीय ज्ञान का समावेश करने का आग्रह किया ताकि विकास एवं प्रगति में जबरदस्त योगदान मिल सके। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के नतीजे निर्धनतम, दूरस्थ स्थल पर रहने वाले एवं सर्वाधिक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचने चाहिए।

विज्ञान को मिले सर्वोच्च प्रथमिकता
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर नोबेल पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों तथा भारतीय वैज्ञानिकों का अभिनंदन भी किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं मानव विकास पर चर्चा को राजनीतिक फैसलों, सामाजिक विकल्पों और समानता, आचार संहिता तथा पहुंच से अलग नहीं किया जा सकता। मोदी ने कहा कि वित्त पोषण के प्रस्तावों की मंजूरी में ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए और वैज्ञानिक विभागों को अनुसंधान संबंधी गतिविधियों में निहित अनिश्चितता पर आधारित वित्त पोषण के फैसलों में लचीला रुख अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समद्ध भविष्य के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थितियों के अनुरूप कृषि, ग्रामीण इलाकों के लिए किफायती एवं समुचित प्रौद्योगिकियां, स्वास्थ्य की देखरेख में सुधार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी को किफायती बनाना, भारत को प्रमुख विनिर्माण देश बनाना और प्रौद्योगिकी प्रधान उद्योग आदि भारतीय वैज्ञानिकों के समक्ष प्रमुख लक्ष्य हैं।


वैज्ञानिकों ने दुनिया को दिखाया दम
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के वैज्ञानिक कामकाज में मानव विकास मुख्य एवं व्यापक उद्देश्य रहा है और विज्ञान ने आधुनिक भारत को आकार देने में मदद की है। दुनिया ने जब जब हमारे लिए अपने दरवाजे बंद किए तब तब भारतीय वैज्ञानिकों के मजबूती से खड़े होने के लिए प्रधानमंत्री ने उनकी सराहना की।
 
उन्होंने कहा कि जब दुनिया ने हमारा सहयोग चाहा तो भारतीय वैज्ञानिकों ने उसी खुलेपन से साथ दिया जो हमारे समाज में निहित है। प्रधानमंत्री ने चक्रवात हुदहुद का सटीक पूर्वानुमान लगा कर हजारों लोगों की जान बचाने के लिए भी भारतीय वैज्ञानिकों की सराहना की। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में हजारों की संख्या में बच्चों और युवाओं को शामिल करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा की गई पहलों का स्वागत किया।
   
मोदी ने कहा कि भारत को हमारे देश में विज्ञान एवं वैज्ञानिकों का गौरव एवं सम्मान बहाल किया जाना चाहिए, समाज में विज्ञान के लिए दीवानगी पुनर्जीवित करनी चाहिए, हमारे बच्चों में इसके लिए लगाव फिर से उत्पन्न करना चाहिए तथा हमारे वैज्ञानिकों को सपने देखने, कल्पना करने और रहस्यों की गुत्थी सुलझाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन प्रख्यात वैज्ञानिक वसंत गोवारीकर को श्रद्धांजलि देते हुए शुरू किया। गोवारीकर का कल पुणे में निधन हो गया था।

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