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जानिए आखिर इनकी सफलता का लोहा क्यों मानती है दुनिया...

जानिए आखिर इनकी सफलता का लोहा क्यों मानती है दुनिया...

इन महिलाओं ने अपने क्षेत्रों में अहम मुकाम बनाया है। इन महिलाओं ने हिन्दुस्तान का परचम पूरे विश्व में फहराया है। इनके नाम शायद कम लोग जानते हों, लेकिन इनके आम से खास बनने की कहानी काफी रोचक है। शायद यही कारण है कि हिन्दुस्तान की इसी प्रतिभा का लोहा सुपर पावर अमेरिका भी मानता है। विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन करने में ये भारतीय महिलाएं कभी पीछे नहीं रहीं। आइये आपको मिलाते हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं से, जो हैं अपने-अपने क्षेत्रों की दिग्गज...

1. शिखा शर्मा
MD और CEO, एक्सिस बैंक
जब पूरी दुनिया मंदी के दौर से जूझ रही हो, ऐसे में किसी कर्मचारी को दो करोड़ रुपये सालाना वेतन मिलना मायने रखता है। लेकिन भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाली शिखा शर्मा को एक्सिस बैंक ने इस वेतन पर साल 2009 में बतौर एमडी और सीईओ नियुक्त किया। आईसीआईसीआई समूह में 28 साल काम करने वाली शिखा को ही बैंक के पर्सनल फाइनेंस कारोबार की नींव डालने का श्रेय दिया जाता है। उन्हें अगस्त 1998 में आईसीआईसीआई पर्सनल फाइनेंस सर्विसेज का प्रबंध निदेशक बनाया गया था। खूबसूरत साड़ियों की शौकीन शिखा शर्मा रोमांटिक उपन्यास पढ़ना पसंद करती हैं और शास्त्रीय गायिका भी हैं। उनके साथ काम करने वाले लोगों का मानना है कि इतना व्यस्त रहने के बावजूद उन्हें शायद ही कभी दबाव में देखा हो।

2. प्रीता रेड्डी
प्रबंध निदेशक, अपोलो हॉस्पिटल
अपोलो की प्रबंध निदेशक प्रीता रेड्डी न सिर्फ बिजनेस डील को अपने हक में मोड़ने में माहिर हैं, बल्कि उनका टाइम मैनेजमेंट भी कमाल का है। बिजनेस की दुनिया में कदम रखने से पहले प्रीता रेड्डी शादी के बाद बेहद शांत जीवन जी रही थीं। जहां न किसी से आगे निकलने की होड़ थी और न ही बैलेंस शीट की चिंता। वह भले ही पेशे से डॉक्टर नहीं हैं, लेकिन डॉक्टर और मरीज के रिश्ते को बखूबी समझती हैं। काम के पहले ही दिन हड़ताली कर्मचारियों का सामना करने वाली इस महिला उद्यमी ने वक्त के साथ न केवल उनका, बल्कि मरीजों का भी विश्वास जीता है। ईश्वर में गहरी आस्था रखने वाली प्रीता ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने खुद चमत्कार होते देखे हैं, जिसने ईश्वर में उनके विश्वास को मजबूत ही किया है। निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में अपोलो एशिया में पहले और दुनिया में तीसरे स्थान पर है, इतने कम समय में मिली यह कामयाबी भी किसी चमत्कार से कम नहीं है।

3. प्रिया पॉल
चेयरपर्सन, एपीजे सुरेंद्र होटल
भारतीय होटल कारोबारी प्रिया पॉल ने अपने पिता की हत्या के बाद कारोबार संभाला और नए होटलों की श्रृंखला खड़ी की। वर्ष 1990 में केवल 23 साल की उम्र में प्रिया एपीजे सुरेंद्र ग्रुप के हास्पिटेलिटी डिवीजन की चेयरपर्सन बन गईं। नब्बे के दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था जिस हालत में थी, उसे देखकर देश में डिजाइनर होटल्स की शुरुआत करने की सलाह कोई भी अर्थशास्त्री नहीं देता, लेकिन प्रिया अपना रास्ता खुद चुनने में यकीन करती हैं। वह जोखिम भरे फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटती हैं और इस कारण आज उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ उद्यमियों में गिना जाता है। प्रिया पॉल को जब पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया तो उन्‍होंने एक पार्टी रखी, जो दिल्‍ली की सबसे बेहतरीन पार्टियों में से एक बन गई। अपने होटल के जरिए उन्‍होंने गोवा के कलंगुट बीच पर छुट्टियां बिताने का मजा दोगुना कर दिया है।

4. कमला प्रसाद बिसेसर
प्रधानमंत्री, त्रिनिदाद एंड टोबेगो
 
कमला प्रसाद बिसेसर के पूर्वज बिहार से संबंध रखते हैं। त्रिनिदाद और टोबेगो की सातवीं प्रधानमंत्री कमला इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। वे यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस की नेत्री हैं और पीपुल्स पार्टनरशिप का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। कमला एच. वूडलिंग लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हैं। कॉलेज के दिनों में उन्होंने एक शिक्षिका के तौर पर काम किया हैं। इसके अलावा उन्होंने इंग्लैंड के चिल्ड्रन्स चर्च सोसाइटी के लिए एक समाज सेवी के रूप में भी काम किया है। हाल ही में बिसेसर ने भारत यात्रा भी की थी।

5. रेणु खटोर
अध्यक्ष, हॉस्टन यूनिवर्सिटी
 
रेणु खटोर यूनिवर्सिटी ऑफ हॉस्टन सिस्टम की 8वीं चांसलर और यूनिवर्सिटी ऑफ हॉस्टन की 13वीं प्रेसीडेंट हैं। इस पद पर आसीन होने वाली विदेशी मूल की वे पहली महिला हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट रेणु ने पुर्दुए यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स किया है। रेणु ने अपने करियर कई पदों पर काम किया है। जनवरी 2011 में फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ डालास ने उन्हें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल किया।

6. झुम्पा लाहिड़ी
पुलित्जर पुरस्कार विजेता बांग्ला लेखिका
अपनी पहली शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन 'इंटरप्रेटर ऑफ मालाडीज' के लिए वर्ष 2000 का पुलित्जर पुरस्कार पाने वाली झुम्पा लहिड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आर्ट्र एंड ह्यूमैनिटी कमेटी की सदस्य हैं। 2003 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'द नेमसेक' पर इसी नाम से फिल्म निर्माण भी हुआ है। झुम्पा ने एचबीओ टेलीविजन के 'इन ट्रीटमेंट' कार्यक्रम के तीसरे सीजन के लिए भी काम किया है। उन्हें 2009 में उनकी किताब 'अनअकस्टम्ड अर्थ' के लिए एशियन-अमेरिकन लिटरेरी अवॉर्ड भी मिला है।

7. नैना लाल किदवई
डायरेक्टर, HSBC
बचपन में एक दिन एक प्रसिद्ध बीमा कंपनी में बतौर सीईओ कार्यरत अपने पिता की कुर्सी पर बैठीं नैना के दिमाग में भी किसी कंपनी का प्रमुख बनने की इच्छा जगी। इसी धुन का नतीजा है कि आज वे बैंकिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी 'एचएसबीसी' (हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) की भारत प्रमुख और डायरेक्टर हैं। शिमला से स्कूली शिक्षा और दिल्ली यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद नैना लाल किदवई ने 'हावर्ड बिजनेस स्कूल' से एमबीए किया। साल 1982 में ‘स्टैंडर्ड चाटर्ड बैंक’ से करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने कुछ दिन ‘मोर्गन स्टेनले बैंक’ में काम किया और फिर एचएसबीसी से जुड़ गईं। विदेशी बैंकों द्वारा भारत में निवेश कराने वाली वे पहली भारतीय महिला हैं।

8. कल्पना मोरपारिया
CEO, जेपी मॉर्गन इंडिया
'जेपी मॉर्गन' में इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कल्पना मोरपारिया कंपनी के निवेश बैंकिंग, संपत्ति प्रबंधन और दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व करती हैं। भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक मोरपारिया जेपी मॉर्गन से पहले आईसीआईसीआई बैंकिंग बोर्ड की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। इसी बैंक में उन्होंने साल 2001 से 2007 तक संयुक्त प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम किया। बॉम्बे विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक मोरपारिया ने भारत सरकार की कई महत्वपूर्ण समितियों में भी बतौर सदस्य काम किया है।

9. नीलम धवन
प्रबंध निदेशक, ह्यूलेट पैकर्ड इंडिया
आईटी कंपनी 'ह्यूलेट पैकर्ड इंडिया' की प्रबंध निदेशक नीलम धवन भी भारत की उन प्रमुख उद्यमी महिलाओं में से हैं, जो अपनी कंपनी के शीर्ष पद पर हैं। नई दिल्ली के 'सेंट स्टीफेंस कॉलेज' से अर्थशास्त्र में स्नातक नीलम धवन इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की प्रबंध निदेशक थीं। उन्होंने दिल्ली के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से एमबीए किया है। एचसीएल और आईबीएम जैसी भारत की अग्रणी आईटी कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने सफलता के कई अध्याय जोड़े। फॉर्चून पत्रिका ने उन्हें साल 2009 में दुनिया की 50 सबसे प्रभावशाली महिला उद्यमियों में शामिल किया था।

10. मल्लिका श्रीनिवासन
अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मैसी फार्ग्युसन ट्रैक्टर
मैसी फार्ग्युसन ट्रैक्टर और कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनी टीएएफई की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मल्लिका श्रीनिवासन फोर्ब्स की एशिया की 50 सबसे ताकतवर कारोबारी महिलाओं में चुनी गई हैं। टैफे की प्रमुख होने के अलावा मल्लिका श्रीनिवासन को हाल ही में अमरिका के एजीसीओ कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल के लिए चुना गया है। एजीसीओ वैश्विक स्तर पर कृषि उपकरणों को बनाने और वितरण करने वाली कंपनी है।

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