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रानी की वाव विश्व विरासत घोषित

गुजरात में 11वीं शताब्दी के रानी की वाव (सीढ़ीदार कुंआ) को यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल के तौर पर मंजूरी दी है। यूनेस्को ने इसे भूजल संसाधनों का उपयोग करने में प्रोद्यौगिकी विकास का विशिष्ट उदाहरण माना है। संस्कृति मंत्रालय ने रविवार को बताया कि रानी की वाव को विश्व विरासत सूची में जगह देने के लिए मंजूरी दी गई है। यह मान्यता यूनेस्को ने कतर की राजधानी दोहा में हाल में विश्व विरासत समिति के सत्र के दौरान दी।

रानी की वाव भारतीय भूमिगत स्थापत्य ढांचे का अनोखा उदाहरण है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी की वाव को विश्व विरासत सूची में जगह देने के यूनेस्को के फैसले की सराहना करते हुए इसे गर्व का विषय बताया। मोदी ने ट्वीट में कहा, गुजरात के पाटन में रानी की वाव को यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल किया गया है। अगली बार आप गुजरात जाएं तो रानी की वाव जरूर जाएं।

इसके अलावा यूनेस्को ने प्राचीन रेशम मार्ग (सिल्क रूट) और चीन के बीजिंग स्थित विश्व के सबसे कृत्रिम जलमार्ग ग्रेट कैनाल को भी अपनी सूची में शामिल किया है। रेशम मार्ग दो हजार साल पहले एशिया और यूरोप के बीच व्यापार एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का रास्ता रहा है।

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