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जानिए खाद्य सुरक्षा बिल की 10 सबसे अहम बातें...

देश की दो-तिहाई आबादी को जल्द ही हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज सस्ती दर पर मिलने लगेगा। इसमें तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये प्रति किलो गेहूं और एक रुपये प्रति किलो ज्वार मिलेगा।...

जानिए खाद्य सुरक्षा बिल की 10 सबसे अहम बातें...
लाइव हिन्दुस्तान टीमSat, 06 Jul 2013 11:18 AM
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देश की दो-तिहाई आबादी को जल्द ही हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज सस्ती दर पर मिलने लगेगा। इसमें तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये प्रति किलो गेहूं और एक रुपये प्रति किलो ज्वार मिलेगा। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को मंजूरी दी गई है।

अब राष्ट्रपति से हरी झंडी मिलने के बाद यह अध्यादेश खाद्य सुरक्षा कानून के रूप में लागू हो जाएगा। यूपीए सरकार ने चार साल पहले अपने चुनावी घोषणा-पत्र में सबको भोजन की गारंटी देने का वादा किया था। इससे पहले 13 जून को भी यह अध्यादेश कैबिनेट की बैठक में आया था, लेकिन यूपीए के घटक दलों में इसे लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। बैठक में तय हुआ था कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत करेगी और विधेयक को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाएगी।

सरकार ने संसद के बजट सत्र में भी यह विधेयक पारित कराने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका था। हालांकि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने मानसून सत्र को समय से पहले बुलाकर इस विधेयक पर चर्चा करने की बात कही थी।

आइये आपको बताते हैं इस बिल की दस खास बातें...

1. खाद्य सुरक्षा बिल की खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा कानून बनने से देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता अनाज मिलेगा। मौजूदा वक्त में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को 7 किलो गेहूं 4.15 रुपये प्रति किलो और चावल 5.65 रुपये प्रति किलो के आधार पर हर महीने मिलता है। इस एक्ट के अमल में आने के तीन साल बाद कीमतों में फिर से संशोधन किया जाएगा।

2. इस विधेयक के कानून में बदल जाने के बाद अनाज की मांग 5.5 करोड़ मिट्रिक टन से बढ़कर 6.1 मिट्रिक टन हो जाएगी। फूड सब्सिडी लागू होने पर सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ करीब 20,000 करोड़ रुपये होगा। इसके लिए करीब 6.123 करोड़ टन फूडग्रेन्स की जरूरत होगी। फूड सब्सिडी बिल पर कुल फूड सब्सिडी कवर करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये होगा।

3. इस बिल के तहत देश की 67 फीसदी आबादी को हर महीने 5 किलो अनाज प्रति व्यक्ति के हिसाब से मार्केट से कम दाम पर दिया जाएगा। बिल में कहा गया है कि 3 रुपये प्रति किलो के हिसाब से चावल और 2 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गेहूं और बाकी अनाजों को 1 रुपये प्रति किलो के आधार पर देश की 75 फीसदी ग्रामीण आबादी और 50 फीसदी शहरी आबादी को दिया जाएगा।

4. इस स्कीम को आधार स्कीम के साथ लिंक्ड किया जाएगा। इसके तहत हर नागरिक को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा, जो कि डाटाबेस से लिंक्ड होगा। इसमें हर कार्डहोल्डर का बॉयोमीट्रिक्स डाटा होगा।

5. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत आने वाले लगभग 2.43 करोड़ निर्धनतम परिवार कानूनी रूप से प्रति परिवार के हिसाब से हर महीने 35 किलोग्राम खाद्यान्न पाने के हकदार होंगे।

6. लोकसभा में दिसंबर, 2011 में पेश मूल विधेयक में लाभार्थियों को प्राथमिक और आम परिवारों के आधार पर विभाजित किया गया था। मूल विधेयक के तहत सरकार प्राथमिकता श्रेणी वाले प्रत्येक व्यक्ति को सात किलो चावल और गेहूं देगी। चावल तीन रुपये और गेहूं दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से दिया जाएगा। जबकि सामान्य श्रेणी के लोगों को कम से कम तीन किलो अनाज न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधे दाम पर दिया जाएगा।

7. फूड बिल में संशोधन संसदीय स्थाई समिति की रिपोर्ट के अनुसार किए गए हैं, जिसने लाभार्थियों को दो वर्गों में विभाजित किए जाने के प्रस्ताव को समाप्त करने की सलाह दी। पैनल ने एकसमान कीमत पर हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम अनाज दिए जाने की वकालत की। शुरू में इस योजना को देश के 150 पिछड़े जिलों में चलाया जाएगा और बाद में इस सब्सिडी को पूरे देश में लागू किया जाए।

8. संयुक्त राष्ट्र द्वारा परिभाषित गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या भारत में 41 करोड़ है। यह संख्या उन लोगों की है, जिनकी एक दिन की आमदनी 1.25 डॉलर से भी कम है।

9. कुछ राज्य सरकारों ने बिल को लेकर अपनी आशंका जतायी है, जबकि कई अन्य राज्यों का कहना है कि प्रस्तावित कानून के आलोक में जो खर्चे बढ़ेगे, उसका जिम्मा केंद्र सरकार खुद उठाये, उन्हें राज्यों के ऊपर ना डाले। गैर-सरकारी संगठनों की मुख्य आलोचना यह है कि बिल में मौजूदा बाल-कुपोषण से निपटने के प्रावधानों को विधिक अधिकार में बदला जा सकता था, जबकि सरकार ने ऐसा नहीं किया है।

10. मार्च, 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुछ बदलावों के साथ विधेयक को मंजूरी दी थी। हंगामे के बीच लोकसभा में खाद्य सुरक्षा बिल 6 मई को पेश किया गया, लेकिन सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दों पर हंगामें के चलते बिल पारित नहीं हो सका।

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