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Hindi Newsनहीं रहे मशहूर साहित्यकार राजेन्द्र यादव

नहीं रहे मशहूर साहित्यकार राजेन्द्र यादव

हिन्दी के प्रख्यात लेखक एवं हंस पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव का सोमवार मध्य रात्रि निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। यादव की कल रात अचानक तबियत खराब हो गई और उन्हें सांस लेने की तकलीफ होने लगी।...

नहीं रहे मशहूर साहित्यकार राजेन्द्र यादव
नहीं रहे मशहूर साहित्यकार राजेन्द्र यादव
एजेंसीTue, 29 Oct 2013 01:12 PM
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हिन्दी के प्रख्यात लेखक एवं हंस पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव का सोमवार मध्य रात्रि निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे।

यादव की कल रात अचानक तबियत खराब हो गई और उन्हें सांस लेने की तकलीफ होने लगी। उन्हें 11 बजे के बाद फौरन एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

यादव के परिवार में उनकी लेखिका पत्नी मन्नू भंडारी के अलावा एक बेटी है। यादव के निधन से हिन्दी में नये कहानी आंदोलन का आखिरी स्तंभ ढह गया और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर तीन बजे किया जायेगा।

28 अगस्त 1929 को आगरा में जन्मे यादव की गिनती चोटी के लेखकों में होती रही है। वह मुंशी प्रेमचंद की पत्रिका हंस का 1986 से संपादन करते रहे थे जो हिन्दी की सर्वाधिक चर्चित साहित्यिक पत्रिका मानी जाती है और इसके माध्यम से हिन्दी के नये लेखकों की एक नई पीढ़ी भी सामने आई और इस पत्रिका ने दलित विमर्श और स्त्री विमर्श को भी स्थापित किया।

यादव के प्रसिद्ध उपन्यास सारा आकाश पर बासु चटर्जी ने एक फिल्म भी बनाई थी। उनकी चर्चित कृतियों में जहां लक्ष्मी कैद है..,छोटे छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल जैसे कहानी संग्रह और उखड़े हुये लोग, शह और मात, अनदेखे अनजान पुल तथा कुलटा जैसे उपन्यास भी शामिल है। उन्होंने अपनी पत्नी मन्नू भंडारी के साथ एक इंच मुस्कान नामक उपन्यास भी लिखा।

यादव ने विश्व प्रसिद्ध लेखक चेखोव तुर्गनेव और अल्वेयरकामो जैसे लेखकों के कृत्यों का भी अनुवाद किया था। यादव ने आगरा विश्वविद्यालय से एमए किया था और वह कोलकता में भी काफी दिनों तक रहे। वह संयुक्त मोर्चा सरकार में प्रसार भारती के सदस्य भी बनाये गये थे।