फोटो गैलरी

Hindi Newsलातेहार में एसपी अमरजीत बलिहार से बेहद परेशान थे नक्सली

लातेहार में एसपी अमरजीत बलिहार से बेहद परेशान थे नक्सली

वर्ष 2005 से पहले लातेहार नक्सलियों के आतंक से खून के आंसू रो रहा था। सरकार की काफी फजीहत हो रही थी। तब डीएसपी रहे अमरजीत बलिहार ने खुद वहां जाने की इच्छा जाहिर की थी। 2005 से 2007 के बीच लातेहार में...

लातेहार में एसपी अमरजीत बलिहार से बेहद परेशान थे नक्सली
लाइव हिन्दुस्तान टीमWed, 03 Jul 2013 02:57 PM
ऐप पर पढ़ें

वर्ष 2005 से पहले लातेहार नक्सलियों के आतंक से खून के आंसू रो रहा था। सरकार की काफी फजीहत हो रही थी। तब डीएसपी रहे अमरजीत बलिहार ने खुद वहां जाने की इच्छा जाहिर की थी। 2005 से 2007 के बीच लातेहार में अमरजीत ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। उसी वक्त से वे नक्सलियों की हिटलिस्ट में थे। पेश है एक रिपोर्ट...

अमरजीत बलिहार नक्सलियों के घोर विरोधी रहे थे। बतौर डीएसपी जब वे लातेहार में तैनात थे, तब उन्होंने वहां नक्सलियों के विरुद्ध बड़ा अभियान चलाया था। नक्सलियों का साथ देने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। उस समय से ही नक्सलियों ने इन्हें हिटलिस्ट में रखा था।

लातेहार में तब नक्सलियों द्वारा डीएसपी के खिलाफ पोस्टर भी जारी किए गए थे। घटना वर्ष 2005 से 07 के बीच की है। उस समय लातेहार में पुलिस प्रशासन का नहीं बल्कि नक्सलियों का दबदबा था। सरकार की काफी फजीहत हो रही थी, तो डीएसपी ने खुद लातेहार जाने की इच्छा जाहिर की थी। सरकार ने उनकी बात मान ली और उन्हें भेजा गया था।

अमरजीत ने राजद नेता ज्ञानचंद पांडेय, बस मालिक सत्यवान सिंह के खिलाफ पोटा लगा दिया था। अनुसंधान के क्रम में इनके विरुद्ध आरोप प्रमाणित भी हुए थे। उस समय भी डीएसपी काफी चर्चा में आए थे। लातेहार में एक बार यह सूचना मिली थी कि नक्सली लातेहार थाना में अटैक कर सकते हैं। तब रात के डेढ़ बज रहे थे। एक हाथ में टार्च और दूसरे में राइफल लेकर वे खुद थाने पहुंच गए थे।

बलिहार को तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी माना जाता था। उनकी इस काबिलियत को ही देखकर उन्हें मुख्यमंत्री सुरक्षा का भी प्रभारी बनाया गया था। ये जैप-1 में भी पदस्थापित रहे थे। बाद में जैप-2 के कमांडेंट बने थे। 17 मई को उन्हें पाकुड़ का एसपी बनाया गया था। राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार ने जैप-2 के कमांडेंट के पद से हटाकर उन्हें कहा था कि बड़ी जवाबदेही मिलने वाली है। उन्हें वैसे जिले का एसपी बनाया गया, जहां नक्सली सिर उठा रहे थे।

पाकुड़ में जाते ही उन्होंने नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। पांच नक्सली पकड़े गए थे। संथालपरगना के छह जिलों को शांत माना जाता है। नक्सली दुमका और पाकुड़ में क्षेत्र में विस्तार कर रहे हैं। बलिहार के पदस्थापन के बाद नक्सलियों को लगा कि हो सकता है उन्हें बैकफुट पर जाना पड़े। बलिहार विशेष शाखा में भी तैनात रह चुके थे।

रांची आने का किया था वादा
आईपीएस अधिकारी अमरजीत बलिहार की गिनती राज्य के बेहतरीन पुलिस अफसरों में होती थी। मई 2013 में अधिकारियों को पोस्टिंग मिली तो पहली बार अमरजीत को बतौर एसपी पाकुड़ पोस्टिंग दी गई। सर्विस में पहली बार जिला एसपी की पोस्टिंग से वे काफी खुश थे।

अमरजीत के चचेरे भाई सुधांशु बलिहार ने बताया कि पाकुड़ का माहौल अमरजीत को काफी अच्छा लगा था। वह कहता था कि दादा बहुत शांत हैं पाकुड़ के हमारे आवास में आम और लीची के पेड़ हैं। बड़ा अच्छा लगता है। वहीं अमरजीत के बचपन के दोस्त प्रोफेसर जयंत अग्रवाल ने कहा कि तीन चार दिन पहले अमरजीत से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने तब कहा था कि पाकुड़ का माहौल काफी अच्छा है।

रांची में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में भी तैनात रहे
एसपी अमरजीत बलिहार बिहार लोक सेवा आयोग के 31वें बैच (1986) से पुलिस सेवा में बहाल हुए थे। बहाली के बाद उनकी पहली पोस्टिंग जहानाबाद में हुई थी। इसके बाद मुंगेर, खूंटी, जहानाबाद, पटना, राजगीर, हवेली खड़गपुर, लातेहार, चक्रधरपुर में बतौर डीएसपी तैनात रहे।

साल 2003 में उन्हें आईपीएस कैडर मिला। इसके बाद उनकी पोस्टिंग रांची में हुई। रांची में वह पहले सीएम की सुरक्षा में रहे। फिर जैप-1 में डिप्टी कमांडेंट, जैप-2 में कमांडेंट रहे। बतौर जिला एसपी मई 2013 में उनकी पहली पोस्टिंग पाकुड़ में हुई थी।

घटना के थोड़ी देर पहले ही एसपी ने पत्नी से की थी बात
शांत स्वभाव, वादे और इरादे के पक्के एसपी अमरजीत बलिहार ने मरकर भी पत्नी को किया वादा निभाया। दोपहर दो बजे पत्नी सुमनलता ने बलिहार को फोन किया। हाल-चाल पूछा। बेटे अविनाश के बारे में पूछा, बिटिया अपराजिता और शालिनी की पढ़ाई और खैरियत पूछी। पत्नी ने रांची आने की बात की तो जवाब दिया, कल आ रहा हूं। अभी मीटिंग खत्म होने के बाद पाकुड़ जा रहा हूं। चंद लम्हों के बाद अमरजीत के शहीद होने की खबर ने परिवार को स्तब्ध कर दिया।

शाम चार बजे तक सिल्ली (रांची) के डीएसपी आनंद जोसेफ तिग्गा सबसे पहले अमरजीत बलिहार के पत्थलकुदवा स्थित आवास पहुंचे। परिजनों को तब तक घटना की खबर नहीं थी। बाहर खड़े गार्ड और पड़ोस के परिचितों को घटना के बारे में बताया गया।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें