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महाकुंभ में 400 करोड़ से ज्यादा होगा फूलों का कारोबार

महाकुंभ में 400 करोड़ से ज्यादा होगा फूलों का कारोबार

हरिद्वार में 14 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ में 400 करोड़ रुपए से भी अधिक फूलों का कारोबार होने की संभावना है और इसके लिए काफी पहले से ही उत्तराखण्ड के फूल उत्पादक किसानों और व्यापारियों ने तैयारी कर रखी है।

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने विशेष बातचीत में बताया कि चार महीनों तक चलने वाले महाकुंभ के दौरान करीब पांच से छह करोड़ लोगों के आने की संभावना है, जिसमें विदेश से हजारों की संख्या में लोग आ रहे हैं।

कुंभ मेले के दौरान गंगा के किनारे बने विभिन्न देवी देवताओं के मंदिरों की सजावट, विभिन्न धार्मिक पंडालों के सजावट, विभिन्न देवी देवताओं की मूर्ति पर चढा़ये जाने वाले फूल और मूर्तियों के श्रृंगार के लिए हजारों टन फूलों की जरूरत है।

देहरादून के फूल व्यापारी सुदेश चौहान ने बताया कि सबसे अधिक मांग गेंदा और देसी गुलाब की है। मुख्य रूप से लाल और पीले रंग के गेंदे और गुलाब के लिए अभी से बुकिंग हो चुकी है।

सुदेश ने बताया कि गेंदा और गुलाब के अलावा ग्लोडियस, रंजनीगंधा, चांदनी तथा कुछ अन्य फूलों की भी जबर्दस्त मांग है। इन फूलों से एक तो बडी़ बडी़ मालाएं बनाई जाती हैं जो विभिन्न विग्रहों पर चढा़ने के काम आती हैं इसके अतिरिक्त पंडालों और मंदिरों की सजावट के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

राज्य के सुगंध पौधा केन्द्र के वैज्ञानिक नपेन्द्र चौहान ने बताया कि केन्द्र की सेलाकुईं शाखा की ओर से पचास एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में किसानों ने गेंदे की बुआई की है। इसके लिए उन्हें मुफ्त में बीज और पौधे भी उपलब्ध कराये गये हैं।

उन्होंने बताया कि इसी तरह से हरिद्वार में भी इस वर्ष काफी अधिक क्षेत्र में फूलों की खेती की गई है और कुंभ के आने का इंतजार हो रहा है जब इस उपज से किसान लाभ कमा सकेंगे।

ऋषिकेश के संत रामेश्वर दास ने बातचीत में बताया कि इतनी भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी आस्था के तहत पूजा के लिए फूल उपलब्ध कराना भी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।

राज्य उद्यान विभाग के सूत्रों ने बताया कि पूरे राज्य में इस वर्ष विशेषतौर पर साढे़ दस लाख पौधों का वितरण किया गया है और 4565 हेक्टयर क्षेत्र में उद्यानों का विस्तार भी किया गया है। सूत्रों के अनुसार सुंगध पादप विकास योजना के तहत इस वर्ष किसानों को विशेष सहायता राशि भी दी गई है।

चमोली जिले में फूलों की खेती करने वाले किसान सत्यप्रकाश पुण्डीर ने बताया कि इस बार चमोली के उंचाई वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से फूलों की खेती की गई है जहां से अब फूलों को हरिद्वार लाया जायेगा। इस वर्ष महाकुंभ में कुंभ नगरी पूरे देश के फूल के कारोबारियों के लिए सबसे बडी़ मण्डी साबित होगी और इसमें उत्तराखण्ड के किसान किसी भी स्थिति में पीछे नहीं रहना चाहते हैं।

फूल के एक अन्य कारोबारी निलेश कुमार ने बताया कि फूलों की खरीदारी के लिए दिल्ली, उत्तरप्रदेश,  हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कनार्टक और महाराष्ट्र के भी कारोबारियों से सम्पर्क किया गया और इन राज्यों से फूलों की भारी आवक की संभावना है।

निलेश ने बताया कि पूरे चार महीने तक विभिन्न राज्यों के फूल कारोबारियों से मौसम के अनुसार फूलों की मांग की गई है।

हरिद्वार में महाकुंभ 14 जनवरी से 28 अप्रैल तक चलेगा और करीब चार महीनों के दौरान लगातार फूलों की खपत होगी। प्रयोग किये गये फूलों के अम्बार को साफ करना और उसे किसी अन्य जगह एकत्रित करना भी मेला प्रशासन के लिए एक अलग बडी़ चुनौती है।

महाकुंभ के दौरान आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु कम से कम एक माला अर्पित करना चाहेगा और इस तरह से कम से कम छह करोड मालाओं की आवश्यकता पडे़गी इसके अतिरिक्त सजावट और अन्य कार्यों के लिए हजारों टन फूलों की खपत होने की संभावना है।

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