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ईशा फाउंडेशन को इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार

ईशा फाउंडेशन को इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिये दिये जाने वाले इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से तमिलनाडु के ईशा फाउंडेशन को सम्मानित किया गया है। इसके नाम एक ही दिन में आठ लाख से अधिक पौधारोपण करने का गिनीज विश्व रिकॉर्ड है।

जानेमाने आध्यात्मिक नेता सदगुरु जे वासुदेव के नेतृत्व वाले ईशा फाउंडेशन को वर्ष 2008 का इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार दिया गया। इस संगठन ने 17 अक्टूबर, 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में एक साथ 8.52 लाख पौधे रोपकर गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शनिवार को राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के आयोजन में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम मुख्य अतिथि थे और उन्होंने पांच लाख रुपये का यह पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र वासुदेव को दिया। कलाम ने वर्ष 2010 के युवा पर्यावरणविद पुरस्कार से इशिता विश्नोई और वर्ष 2008 के जानकी अम्माल राष्ट्रीय पुरस्कार से डा. वी जयचंद्रन नायर तथा डा. रामकृष्णन को सम्मानित किया।

इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारत उन 17 चुनिंदा देशों में शामिल है जहां अत्यधिक जैव विविधता है। लिहाजा, हमारे समक्ष जैव विविधता को विस्तार देने और पर्यावरण संरक्षण करने का एक महत्वपूर्ण मिशन है। इसे देखते हुए हमें पर्यावरण हितैषी विकास करने की जरूरत है। गौरतलब है कि वर्ष 1987 से इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार देने की शुरुआत हुई। पुरस्कार के लिये किसी एक संगठन या शख्सियत का चयन उपराष्ट्रपति की अध्यक्षता वाली समिति करती है।

कलाम ने पुरस्कार प्रदान करने से पहले दिये अपने संबोधन में कहा कि विश्व की कुल मत्स्य प्रजातियों में से 12 फीसदी और पक्षियों की कुल प्रजातियों में से 13.6 फीसदी भारत में पायी जाती हैं। कृषि के मामले में हम विश्व में सातवें स्थान पर हैं। उन्होंने तमिलनाडु स्थित अपने घर के निकट मौजूद 104 वर्ष पुराने अर्जुन के एक दरख्त को याद करते हुए जैव विविधता का उदाहरण दिया और कहा कि वह पेड़ भारी मात्रा में ऑक्सीजन देता है। उसमें मधुमक्खियां अपने छत्ते में 300 किलोग्राम तक शहद बनाती हैं और उस पर 100 से अधिक तोते रहते हैं। साथ ही अर्जुन के चिकित्सकीय लाभ भी हैं। यह दर्शाता है कि महज एक पेड़ जैव विविधता के लिहाज से कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

कलाम ने सुझाव दिया कि देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं जिन्हें जैव विविधता उद्यान के रूप में विकसित किया जा सकता है। देश की तीन सेनाओं ने भी कई पर्यावरण क्षेत्र विकसित किये हैं। उन्हें भी जैव विविधता उद्यान के मिशन में शामिल किया जा सकता है। कलाम और संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री सचिन पायलट की मौजूदगी में हुए इस पुरस्कार समारोह में पर्यावरण और वन राज्य मंत्री जयराम रमेश भी शामिल होने वाले थे, लेकिन किन्हीं कारणों से वह नहीं आ सके।

रमेश के स्थान पर बतौर विशेष अतिथि आये अल्पसंख्यक और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण पर तुरंत ध्यान दिये जाने की जरूरत है। अगर हम संरक्षण के प्रयासों में नाकाम रहे तो इसके नतीजे काफी भयावह होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और वन मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में काफी प्रयास किये हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की स्थापना और 2020 तक कार्बन उत्सर्जन के स्तर में 20 से 25 फीसदी तक कटौती लाने का लक्ष्य निर्णायक साबित हो सकता है।

खुर्शीद ने कहा कि एक समूह कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था निर्मित करने की दिशा में भी अध्ययन कर रहा है। पायलट ने कहा कि भारत के पास विश्व का 2.4 फीसदी भूभाग है लेकिन विश्व में पायी जाने वाली जैव विविधता में उसकी हिस्सेदारी आठ फीसदी है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट चिंता पैदा करती है जो कहती है कि जैव विविधता को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग पर्यावरण संरक्षण के लिये ज्यॉग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम विकसित कर प्रयास कर रहा है ताकि राज्य स्तर पर वन क्षेत्रों की निगरानी की जा सके।

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