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मैनेजर पांडेय को मिलेगा हिन्दी अकादेमी का शलाका सम्मान

वरिष्ठ आलोचक मैनेजर पांडेय को दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादेमी द्वारा इस वर्ष का शलाका सम्मान दिया जाएगा। हिन्दी साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस पुरस्कार में पांच लाख रुपये की सम्मान राशि के साथ ही प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

हिन्दी अकादेमी ने सोमवार को अपने अकादेमी सम्मान 2016-17 की घोषणा की। इसमें मैनेजर पांडेय को सर्वोच्च शलाका सम्मान के लिए चुना गया है। जबकि, विशिष्ट सृजनात्मक योगदान के लिए हिन्दी अकादेमी दिल्ली शिखर सम्मान के लिए नूर जहीर को चुना गया है। इसी प्रकार, संतोष कोली स्मृति सम्मान जगमति सांगवान को, हिन्दी अकादेमी विशिष्ट योगदान सम्मान जयप्रकाश कर्दम को, हिन्दी अकादेमी काव्य सम्मान सविता सिंह को, हिन्दी अकादेमी गद्य विद्या सम्मान रमेश उपाध्याय को, ज्ञान-प्रौद्योगिकी सम्मान राजेश जैन को, बाल साहित्य सम्मान डॉ. प्रभाकिरण जैन को, नाटक सम्मान रामगोपाल बजाज को, हास्य व्यंग्य सम्मान सहीराम को, अनुवाद सम्मान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र को, इलेक्ट्रानिक मीडिया पत्रकारिता सम्मान नवीन कुमार को, प्रिंट मीडिया पत्रकारिता सम्मान मधुसूदन आनन्द को, हिन्दी सेवा सम्मान डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा को व हिन्दी सहभाषा सम्मान (बुंदेलखंडी) महेश कटारे सुगम को दिया जाएगा।

साहित्य से पाठकों का जुड़ाव है सबसे बड़ी चुनौती

शलाका सम्मान के लिए चुने जाने पर वरिष्ठ आलोचक मैनेजर पांडेय ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि साहित्य का समाज और पाठकों से जुड़ाव सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर साहित्य अपने पाठक से दूर होता जाएगा तो फिर उसकी अर्थवत्ता कुछ भी नहीं रहेगी। ऐसे ही आलोचना के केन्द्र में भी समाज को रखा जाना चाहिए।

पांडेय ने कहा कि पुस्तक मेले व अन्य जगहों पर आज भी सबसे ज्यादा प्रेमचंद को खरीदा और पढ़ा जा रहा है। इससे यही पता चलता है कि प्रेमचंद की प्रासंगिकता समाज में आज भी बनी हुई है। उन्होंने युवा लेखकों को अपनी रचनाओं को लेकर ज्यादा धैर्य रखने की सलाह देते हुए कहा कि निराला की रचनाओं पर भी उस समय के कुछ लेखक व्यंग्य किया करते थे। लेकिन बाद में उनकी कविताओं का जिक्र किए बिना उस समय के साहित्य पर चर्चा भी संभव नहीं रहा।

मैनेजर पांडेय एक परिचय

बिहार के गोपालगंज में 23 सितंबर 1941 में जन्में मैनेजर पांडेय ने हिंदी आलोचना के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान किया है। शब्द और कर्म, साहित्य और इतिहास दृष्टि, साहित्य के समाजशास्त्र की भूमिका, भक्ति आंदोलन और सूरदास का काव्य, अनभै सांचा, आलोचना की सामाजिकता, संकट के बावजूद जैसी उनकी रचनाओं ने हिन्दी आलोचना को अलग मुकाम दिया है। उन्हें अब तक दिनकर राष्ट्रीय सस्मान, गोकुलचंद आलोचना पुरस्कार, सुब्रहमण्यम भारती पुरस्कार व साहित्य सम्मान मिल चुका है।

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  • Web Title:shalaka samman