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योजनाएं देरी से हुई और जुर्माना भी नहीं लगा

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददातादिल्ली की योजनाओं को लोक निर्माण विभाग ने सही प्रकार से तैयार नहीं किया। इस वजह से सरकार ने योजनाओं के लिए सलाहकारों की मदद ली और योजनाओं में बदलाव भी किया। योजना में देरी नहीं हो और वक्त पर पूरी हो। इसके लिए सलाहकारों से करार में सख्त प्रावधान थे। लेकिन दिल्ली सरकार ने इन पर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक इससे इन योजनाओं मे करीब 241 .20 करोड़ बचा जा सकते थे। ये बतौर जुर्माने से वसूले जाने थे।

विभाग ने 2011-16 के बीच 12 भवन व 10 फ्लाइओवर के निर्माण पर कार्य किया था। इनकी जांच सीएजी ने की है। इस जांच के दायरे में करीब 40 कार्य थे और इन पर 2924.13 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सलाहकार से किए गए अनुबंध के मुताबिक काम में देरी, योजना में खराबी व बार- बार पैसा बढ़ने की स्थिति पर सलाहकार पर जुर्माना लगाया जाना था। प्रावधान के तहत यह प्रति माह देरी पर 1.5 प्रतिशत की दर से तय था और अधिकतम 10 प्रतिशत प्रतिदिन तक लिया जा सकता है। जांच में सामने आया है कि 9 कार्यो में से तीन कार्यो में दंड का प्रावधान ही नहीं थी। चार कार्यो में सरकार की तरफ से कोई जुर्माना नहीं लगाया गया जबकि करार में प्रावधान था। इसके अतिरिक्त दो कार्य बीच में ही छोड़ दिए गए।क्या किया विभाग ने

- तीन मामलों में दंड का प्रावधान नहीं था, नुकसान 70.58 करोड़

- परामर्श दाता ने ड्राइंग में 33 से 93 दिन की देरी की, 48.48 का जुर्माना नहीं लगाया

- सिग्नेचर व बीआरटी कॉरिडोर की वजह से कुछ योजनाओं के लिए सलाहकार जरूरी नहीं थे। 1.30 करोड़ रुपये की अनावश्यक राशि जारी की गई

इन कार्यो में लग सकता था जुर्माना

- कॉलेज, मंडोली जेल परिसर, अकादमी ब्लॉक

- रोहिणी सुखदेव कॉलेज में हुई देरी

- शहीद सुखदेव कॉलेज

- ऊवकासपुरी से मीराबाग, मंगोलपुरी से मधुबन चौक, मधुबन चोक से मुकरबा चौक

- पुस्ता चंदगी राम अखाड़ा तक, सोनिया विहार से जगतपुरी मार्ग तक

- बीआरटी कॉरिडोर

- नेशनल स्टेडियम से गाजीपुर

- आंनद विहार से कनॉट प्लेस

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