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दून लिटरेचर फेस्ट में जुटे जाने-माने रंगकर्मी, गायक और कवि

दून लिटरेचर फेस्ट में जुटे जाने-माने रंगकर्मी, गायक और कवि

दून लिटरेचर फेस्ट में जाने-माने रंगकर्मी, गायक और कवि शिरकत करने पहुंचे। आखिरी दिन पीयूष मिश्रा और डॉ. अशोक चक्रधर सरीखी साहित्य और रंगक्षेत्र की हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। दो दिन फेस्ट में लेखकों के कुल 16 सत्रों की विशेष भूमिका रही।

ओएनजीसी के ऑफिसर्स क्लब में मुक्ताकाश मंच में रंगकर्मी, गायक और कवि के बहुआयामी व्यक्तित्व वाले पीयूष मिश्रा ने अपनी पुस्तक कुछ इश्क किया कुछ काम किया.. पर श्रोताओं के साथ बातचीत की। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पिछले बीस साल की अवधि में कविताओं के प्रति प्रेम, काम और बैचेनी का संकलन है। पीयूष ने बताया कि वह अपने मुताबिक काम चाहते हैं, इसलिए बहुत कम फिल्में कर पाते हैं। इससे पहले फेस्ट के दूसरे दिन की शुरुआत आई एम टीन, आई डांट ग्रो अप सत्र से हुई। इसमें लेखिका प्राची जौहर जोशी, ऋचा सांभी, पल्लवी कोदान ने किशोरवय पाठकों के लिए मौजूदा साहित्य की स्थिति पर चर्चा की। सांभी ने कहा कि लगातार पढ़ने से अपनी एक शैली विकसित होती है। इससे युवा लेखकों के सीखने की भी क्षमता बढ़ती है। प्राची जोशी ने कहा कि किसी भी फिल्म, पुस्तक के समीक्षक उसके सही या गलत होने के निर्णायक नहीं होते। आइज वाइड शट में लेखिका असफिया रहमान, रूबी गुप्ता, नितिन जुगरान बहुगुणा ने सनसनीखेज साहित्य की विद्या व विषयों पर चर्चा की। पौराणिक कथाओं पर आधारित सत्र इम्पेक्ट ऑफ लिटरेचर ऑन आर्ट्स में डॉ. उषा आरके, युगल जोशी, सुरजीत नाथ ने पौराणिक कथाओं की खोज पर चर्चा की। अपूर्वा लाहिरी की भरतनाट्यम की प्रस्तुति दिलकश रही। मौके पर शत्रुजीत नाथ, रणधीर अरोड़ा, अनुराग चौहान, सम्रान्त विरमानी, निमीष, धर्मेंद्र सेठी आदि मौजूद थे।

पुस्तकों का अनावरण

फेस्ट में लेखिका सुचित्रा कृष्णमूर्ति की पुस्तक घोस्ट ऑन द लेज का अनावरण भी किया गया। दिव्य प्रकाश दुबे ने अपनी स्टोरी बाजी को पढ़कर सुनाया। राजशेखर के साथ स्वरूप बत्रा ने मंजनू का टीला कहानी का नाट्य रूपांतरण किया। मंजनू का टीला में कुछ छोटी कहानियों, कविता और लाइव संगीत का मिश्रण शानदार था। जिसमें पुरानी यादें, आधुनिक दिनों की परेशानियां, नए व पुराने प्रवास शामिल थे।

हमें हिकारत से न देखे समाज : त्रिपाठी

लेखक व एक्टिविस्ट लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का कहना है कि वह खुशकिस्मत रहीं कि उन्हें अच्छे अभिभावक मिले। जिन्होंने थर्ड जेंडर होने पर भी उनके लालन पालन में कमी नहीं की। उन्हें अच्छी शिक्षा दी जिससे वह अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकीं। हिन्दुस्तान से बातचीत में उन्होंने कहा कि थर्ड जेंडर समाज को अधिकारिक रूप से तीसरे लिंग की मान्यता मिलने के बाद भी स्थिति अधिक बदली नहीं है। इस जीत ने थर्ड जेंडर समाज को सरकारी नौकरी, शिक्षा और अन्य अल्पसंख्यक समूहों में समान कोटे का हक दिया है। दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद चर्चाओं में आई लक्ष्मी की कहानी को भी दुनियाभर ने जाना। इन्हीं चर्चाओं की बदौलत उन्हें बिग बॉस सीजन पांच में एंट्री मिली। अब उन्हें समाज एक ट्रांसजेंडर से कहीं आगे एक लेखक, एक्टिविस्ट, अभिनेत्री और भरतनाट्यम नृत्यांगना के रूप में जानता है। वह दो पुस्तक मी हिजड़ा-मी लक्ष्मी, और लाल लिपिस्टक लिख चुकी हैं। लक्ष्मी ने मुताबिक लिंग किसी भी व्यक्ति की जगह समाज में सुनिश्चित करता है जो कि गलत है। समाज को हिजड़ा समाज को हिकारत से देखना बंद करना चाहिए।

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  • Web Title: Dun Literature Fest theater, singer and poet arrived