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थोक मुद्रास्फीति थोड़ी चढ़ी, अब भी शून्य से 2.36 प्रतिशत नीचे

थोक मुद्रास्फीति थोड़ी चढ़ी, अब भी शून्य से 2.36 प्रतिशत नीचे

थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति मई माह में उससे पिछले महीने के मुकाबले थोड़ी चढ़ कर शून्य से नीचे 2.36 अंक पर आ गई। मुख्य तौर पर खाद्य उत्पादों और ईंधन एवं विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट के चलते थोक मुद्रास्फीति सात माह से शून्य से नीचे है।

विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति की गति बारिश की दशा पर निर्भर करेगी। थोकमूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में शून्य से 2.65 प्रतिशत नीचे थी। यह नवंबर 2014 से शून्य से नीचे चल रही है। पिछले साल मई में मुद्रास्फीति 6.18 प्रतिशत थी।

मुद्रस्फीति का यह ताजा आंकड़ा इस साल मानसून की बारिश औसत से कम रहने के अनुमानों के बीच आया है। भारतीय मौसम विभाग के 12 प्रतिशत कम बारिश के अनुमान के उलट अब तक मानसून काफी मजबूत रहा है।

सिटीग्रुप ने कहा कि कुल मिलकार मानसून अभी भी जोखिम का मुददा है लेकिन हमारा मानना है कि खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई के जनवरी 2016 तक के लिए तय अनुमान से 0.4 प्रतिशत कम ही रहेगी और 2015-16 में इसका औसत पांच प्रतिशत रहेगा। इससे चालू वितत वर्ष में रिजर्व बैंक के लिए नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की और कटौती की गुंजाइश है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मई में आंशिक रूप से बढ़कर पांच प्रतिशत से अधिक हो गई जो पिछले महीने 4.87 प्रतिशत थी।

सरकार द्वारा आज जारी आंकड़ों के मुताबिक मई में सब्जियों की थोक कीमतें सालाना आधार पर 5.5 प्रतिशत कम रहीं जबकि आलू की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 52 प्रतिशत नीचे हैं।

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