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आगाज से पहले खतरे में पड़ी बीएसएनएल की फ्री रोमिंग

आगाज से पहले खतरे में पड़ी बीएसएनएल की फ्री रोमिंग

बीएसएनएल की 15 जून से शुरू होने वाली देशव्यापी फ्री रोमिंग खतरे में पड़ सकती है। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने इस पर आपत्ति प्रकट की है। ट्राई ने बीएसएनएल से पूछा है कि उसकी अनुमति के बगैर क्यों फ्री रोमिंग शुरू की जा रही है। खबर है कि बीएसएनएल ने इस मसले को दूरसंचार मंत्रालय के समक्ष उठा दिया है।

दूरसंचार मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। मंत्रालय का कहना है कि ट्राई निजी कंपनियों के दबाव में बीएसएनएल की फ्री रोमिंग सेवा की राह में रोड़े अटका रहा है। आमतौर पर फ्री सेवाओं एवं पैकेजों में बदलाव के लिए कंपनियां स्वतंत्र होती हैं। इसी कड़ी में बीएसएनएल ने 15 जून से देश भर में रोमिंग को मुफ्त करने का ऐलान किया था। संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेस में इसकी घोषणा की थी।

सूत्रों के अनुसार नौ जून को ट्राई ने इस मुद्दे पर बैठक की, जिसमें बीएसएएनएल के अधिकारियों को बुलाया गया था। बैठक में बीएसएनएल से पूछा गया कि मुफ्त रोमिंग सेवा क्यों शुरू की जा रही है। ट्राई का कहना है कि इससे सभी कंपनियों को लेबल प्लेइंग का मौका नहीं मिलेगा। लेकिन बीएसएनएल अधिकारियों ने कहा कि रोमिंग फ्री करने का यह फैसला कंपनी का है, जिसकी घोषणा सरकार कर चुकी है, इसलिए इससे पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।

ट्राई के इस रुख के बाद बीएसएनएल ने इस बारे में संचार मंत्रालय को सूचित किया है। मंत्रालय ने बीएसएनएल को अपनी घोषणा पर कायम रहने को कहा है। संचार मंत्रालय बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सरकारी कंपनियों को नए सिरे से खड़ा करने के लिए प्रयासरत है।

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