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रेपो रेट में कटौती, एसबीआई ने भी बेस रेट 0.15 प्रतिशत घटाया

रेपो रेट में कटौती, एसबीआई ने भी बेस रेट 0.15 प्रतिशत घटाया

इस साल मानसून सामान्य से कम रहने की चिंता के बावजूद रिजर्व बैंक ने निवेश और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आज नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत कटौती की। इस साल इस तीसरी कटौती के बाद रेपो दर 7.25 प्रतिशत पर आ गयी है। इधर भारतीय स्टेट बैंक ने भी आधार दर 0.15 प्रतिशत घटाकर 9.70 प्रतिशत किया जो आठ जून से प्रभावी होगी।

रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को नकदी की फौरी जरूरत के लिए उधार देता है। इसमें कमी से बैंकों के धन की लागत कम होगी और उम्मीद है कि इससे वे आवास, वाहन की खरीद और उद्यग धंधे चलाने के लिए दिया जाने वाला कर्ज सस्ता कर सकेंगे।  

रिजर्व बैंक ने हालांकि, इसके साथ ही निकट भविष्य में दर में और कटौती नहीं किये जाने का संकेत दिया है। उसका कहना है कि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगतार तेजी और भू राजनैतिक जोखिमों के साथ बारिश कम होने से मुद्रास्फीति का दबाव बढने का खतरा है।

संभवत: रिजर्व बैंक के इसी अनुमान की वजह से शेयर बाजार को झटका लगा और नीतिगत घोषणा के बाद प्रमुख शेयर सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गयी। केंद्रीय बैंक ने जनवरी 2016 तक मुद्रास्फीति का अनुमान बढा कर 6 प्रतिशत कर दिया है।

मानसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान और इस स्थिति का मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की आशंका के बावजूद रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने वित्त मंत्री अरण जेटली की मांग पर गौर करते हुये वर्ष की शुरुआत में दर में कटौती का कदम उठाया है। जनवरी से अब तक रेपो दर में तीन बार 0.25-0.25 प्रतिशत कटौती की जा चुकी है।

रिजर्व बैंक गवर्नर ने बैंकों से नीतिगत दर में कटौती का लाभ आम जनता और उद्योगों तक पहुंचाने को कहा है। ज्यादातर बैंकरों का मानना है कि रेपो दर में आज की कटौती से रिजर्व बैंक ने कर्ज और जमा दर को कम करने की संभावना बढ़ा दी है। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र का इलाहाबाद बैंक पहला बैंक बन गया है जिसने कर्ज पर ब्याज दर में 0.3 प्रतिशत कटौती की है।

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा में आज रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 7.25 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर 6.25 प्रतिशत, स्थायी सीमांत सुविधा और बैंक दर 8.25 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि, बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को चार प्रतिशत और सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को 21.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया।

रिजर्व बैंक ने वैश्विक कारकों और सामान्य से कम मानसून के संभावित असर के मददेनजर चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि का अनुमान अप्रैल के 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। मुद्रास्फीति को लेकर रिजर्व बैंक की बनी हुई है। बैंक का मानना है कि मुद्रास्फीति अगस्त तक नीच बनी रहेगी पर उसके बाद जनवरी 2016 तक यह बढ़कर 6 प्रतिशत तक हो जायेगी।

रिजर्व बैंक ने सरकार से इस स्थिति से निपटने के लिये आकस्मिक आपात योजना तैयार रखने को कहा है ताकि कमजोर मानसून की वजह से कम खाद्यान्न उत्पादन के प्रभाव से बेहतर ढंग से निपटा जा सके। रिजर्व बैंक के लिये दूसरी चिंता कच्चे तेल के बढ़ते दाम की है। अप्रैल की मौद्रिक समीक्षा के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 9 प्रतिशत बढ़ गये हैं।

मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के तुरंत बाद बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 400 से अधिक अंक गिर गया। हालांकि, बाद में बाजार में कुछ सुधार देखा गया। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने कहा, रिजर्व बैंक के कदम अर्थव्यवस्था के रक्षानों के अनुरूप हैं। मजबूती के साथ घटती मुद्रास्फीति, नियंत्रण के दायरे में चालू खाते का घाटा और राजकोषीय अनुशासन की दिशा में उठाये जा रहे कदम इसमें सहायक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक इस बात पर सहमत हैं कि आर्थिक वद्धि में सुधार का रख है ऐसे में अर्थव्यवस्था को नीतिगत समर्थन की जरूरत है, हालांकि बाहरी परिवेश अभी कमजोर बना हुआ है।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुये राजन ने कहा, घरेलू क्षमता के कम इस्तेमाल के साथ ही सुधार के मामले में संकेतक मिश्रित हैं, निवेश और ऋण वद्धि हल्की है, इसलिये आज नीतिगत दर में कटौती का तर्क बनता है।

वृहद आर्थिक स्थिति के बारे में रिजर्व बैंक ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां नरम बनी हुई है, मार्च में देश के ज्यादातर हिस्सों में बेमौसम वर्षा आलोवृष्टि से कृषि क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा निराशाजनक है। राजन ने कहा कि अप्रैल में मुद्रास्फीति के समक्ष जिस जोखिम की पहचान की गई थी लगातार दूसरे वर्ष सामान्य से कम मानसून की भविष्यवाणी से संकट के बादल छा सकते हैं। उन्होंने मानसून के असफल रहने की स्थिति में संभावित मुद्रास्फीतिक प्रभाव से निपटने के लिये मजबूत खाद्य प्रबंधन पर जोर दिया।

राजन ने नीतिगत दर में कटौती के फैसले को स्पष्ट करते हुये कहा, प्रस्तावित मुद्रास्फीति में नरमी के रास्ते :2018 में 4 प्रतिशत: पर बने रहने के लिये मध्यम अवधि के दौरान कमजोर निवेश और आपूर्ति अड़चनों को दूर करने के लिये यह बेहतर होगा कि शुरआत में ही आज दर में कटौती की जाये और उसके बाद आंकड़े आने और अनिश्चितता के छंटने की प्रतीक्षा की जाये।

गवर्नर ने कहा कि उम्मीद है कि बैंक नीतिगत दर कटौती का लाभ व्यक्तियों और कंपनियों को पहुंचायेंगे। मौद्रिक नीति घोषणा के तुरंत बाद स्टेट बैंक की प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि ब्याज दरों को लेकर गिरावट का रुख है और दर कटौती को आगे पहुंचाने की मंशा बनी हुई है। उन्होंने कहा मुद्रास्फीति कम हो रही है और रिजर्व बैंक दर में 0.75 प्रतिशत की कमी (तीन बार में) कर चुका है, बैंक दरों में कटौती पर गौर करेंगे।

बैंक ऑफ बडौदा की कार्यवाहक सीईओ और प्रबंध निदेशक राजन धवन ने कहा, अगले दो-तीन सप्ताह में दर में कटौती की उम्मीद है। बैंक आफ बडौदा के मुख्य कार्यकारी और प्रबंध निदेशक राजन धवन ने भी इसी तरह की टिप्पणी करते हुए कहा, हमारी तरफ से भी 2-3 सप्ताह में दर में कटौती की उम्मीद है।

 

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