DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शराबबंदी में भेदभाव कर रही बिहार सरकार

राज्य में ताड़ी को छोड़ सभी प्रकार के शराब पर प्रतिबंध लगाया जाना कानून के तहत भेदभाव करने के बराबर है। ऐसा क्यों किया गया, इसे सरकार ही बता सकती है। सुप्रीम कोर्ट से आए सीनियर वकील बलबीर सिंह ने बीमा कंपनियों की ओर से मंगलवार को हाईकोर्ट में बहस करते हुए यह दलील दी।

उनका कहना था कि राज्य सरकार ने सूबे में लीकर की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। ताड़ी में अल्कोहल की मात्रा पाए जाने पर इसे उत्पाद कानून में लीकर की श्रेणी में रखा है। बावजूद इसकी बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई गई है। लीकरों का वर्गीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में सरकार ने सूबे में ताड़ी के व्यवसाय एवं बिक्री की अनुमति कैसे दे रखी है। इस भेदभाव के चलते सूबे में पूर्ण शराबबंदी नहीं कहा जा सकता है।

शराबबंदी को लेकर दायर याचिकाओं पर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी व न्यायमूर्ति नवनीत प्रसाद सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। मामले की सुनवाई के दौरान सिंह ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 47 लोक कल्याण के शराबबंदी का अधिकार देती है। दवा और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी में इस्तेमाल किए जाने वाले को छोड़कर सरकार सभी पर प्रतिबंध लगा सकती है।

बलबीर सिंह का कहना था कि शराब पर प्रतिबंध लगाने के पूर्व सरकार ने तीन महीने का समय लगाया। इसके लिए हर पहलू पर विचार विमर्श किया गया, लेकिन विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगाए जाने के पहले ऐसा कुछ नहीं किया गया। दो दिन पहले तक सरकार ने लाइसेंस जारी किया। इसके बाद एकाएक शराब से संबंधित सभी प्रकार के कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया।

उन्होंने सरकार के पूर्ण शराबबंदी की अधिसूचना को कानूनी रूप से गलत करार दिया। अदालत ने सिंह की ओर से पेश दलील पर कई सवाल खड़े किए। कहा कि पेड़ के नीचे ताड़ी की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाने के बारे में सरकार जवाब दे। राज्य सरकार 16 मई को आवेदकों की ओर से दी गई दलील का जवाब देगी। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:temperance differentiated in bihar