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पितृपक्ष मेला गया की एतिहासिक धरोहर: वंदना किनी

पितृपक्ष मेला गया की एतिहासिक धरोहर है। देश विदेश के लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की चीर शांति के लिए यहां पहुंचते हैं। पिछले वर्ष इसे राजकीय मेला का दर्जा मिला। तीर्थ यात्री तर्पण को आएं और सुंदर अनुभव लेकर जाएं, हमलोगों की यही मनोकामना है। रविवार को पितृपक्ष मेला महासंगम-2015 के उद्घाटन के मौके पर प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किनी ने ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि यहां पदस्थापना से पहले भी गया जी के बारे में काफी पढ़ने और जानने का मौका मिला। इस वैज्ञानिक युग में लाखों श्रद्धालु यहां जुटते हैं। उनके ठहरने, बिजली, पानी की आदि की व्यवस्था की गई है। इस मौके पर डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि चुनाव के कारण पितृपक्ष बाधित न हो, इसका पूरा ख्याल रखा गया है। सभी कर्मचारी पदाधिकारी डबल ड्यूटी कर मेला को सफल बनाने में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि लोग यहां अपनों की याद लेकर आते हैं। दुख का भाव होता है। उन्हें बेहतर सुविधा मिले, तो वे खुशी-खुशी लौटेंगे और दूसरों को भी बताएंगे। मेला में 2000 से अधिक पुलिसकर्मी, 200 मजिस्ट्रेट, एक हजार सफाई कर्मी लगाए गए हैं। सभी सेवाभाव से काम कर रहे हैं। स्वयं सेवी संगठन भी अपनी तरफ से मदद का प्रयास कर रहे हैं।

इससे पहले प्रमंडलीय आयुक्त ने फीता काटकर मेला का शुभारंभ किया। रानी अहिल्याबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। फिर दीप जलाया गया। कार्यक्रम के दौरान गया अनुग्रह कन्या प्लस टू की छात्राओं ने स्वागत गान पेश किया।

मौके पर डीआईजी रंत्न संजय, एसएसपी मनु महाराज, डीडीसी संजीव कुमार, नगर आयुक्त विजय कुमार, सिटी एसपी रविरंजन, साहित्यकार गौवद्र्धन प्रसाद सदय, अमरनाथ धोकड़ी, जगत गुरू राघवाचार्य के अलावा कई अधिकारी मौजूद थे। धन्यवाद ज्ञापन डीडीसी ने किया।

बच्चे को बचाने वाला तैराक सम्मानित
शनिवार को अक्षय वट में तैराकी प्रतियोगिता में डूब रहे बच्चे को बचाने वाले तैराक विकास कुमार को सम्मानित किया गया। आयुक्त वंदना किनी ने उन्हें 11 सौ रुपये और प्रशस्ति प्रत्र प्रदान किया। डीआईजी रत्न संजय ने कहा कि मेला में हमें सबों का सहयोग मिल रहा है।

स्मारिका का लोकार्पण
मेला के शुभारंभ के मौके पर स्मारिका तर्पण का लोकार्पण किया गया। तर्पण के संपादक गौवद्र्धन प्रसाद सदय ने कहा कि इसमें गया धाम से जुड़ी कई जानकारी है। बाहर से आने वाले लोगों को इससे बहुत फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि 1995 से इसका लोकार्पण हो रहा है। गया में तीर्थों का प्राण है। यहां आने वालों को अपने पन का भाव मिले यही हमसबों की कामना है। इस मौके पर अमरनाथ धोकड़ी ने कहा कि यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

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