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बिहारः गलत नियुक्‍ित के आरोप के बाद स्‍वास्थ्य मंत्री की बेटी ने दिया इस्‍तीफा

पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में लाइब्रेरियन के पद पर हाल ही में नियुक्त स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह की पुत्री अनीता कुमारी ने मंगलवार को देर शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया। संस्थान के निदेशक प्रो. एन आर विश्वास ने इस्तीफा मंजूर करने की पुष्टि की। मंत्री पुत्री का इस्तीफा भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी के उस वक्तव्य के कुछ घंटे बाद आया, जिसमें श्री मोदी ने यह आरोप लगाया था कि नियमों को ताक पर रख स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी पुत्री की नियुक्ति आईजीआईएमएस में करायी।

पिछले एक पखवाड़े से इस प्रकरण पर विवाद चल रहा था। दो हफ्ते पहले जब इस बाबत स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह से पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि नियुक्ति में कोई धांधली नहीं हुई। नियुक्ति के लिए निकले विज्ञापन पर कोई भी आवेदन को स्वतंत्र है। विवाद के मूल में यह है कि स्वास्थ्य मंत्री आईजीआईएमएस के शासी निकाय के अध्यक्ष हैं। मंत्री पुत्री के इस्तीफे के बाद जब रामधनी सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने यह कहवा दिया कि वह पता करा रहे हैं कि उनकी पुत्री ने इस्तीफा दिया है या नहीं?   

इससे पहले दोपहर में जनता दरबार के बाद प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने दबाव डालकर और नियम से परे जाकर अपनी बेटी की नियुक्ति कराई है। यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि ऐसे स्वास्थ्य मंत्री को बर्खास्त करें।

मोदी के आरोप : स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने अपनी पुत्री अनीता कुमारी को न्यूनतम योग्यता नहीं रहते हुए प्रावधानों का उल्लंघन कर आईजीआईएमएस में लाइब्रेरियन के पद पर नियुक्त किया।  नियुक्ति संविदा पर हुई और इसके लिए कोई विज्ञापन भी नहीं हुआ। बाद में संविदा पर हुई इस नियुक्ति को स्थायी कर दिया गया। बहाली की आयुसीमा 18 से 30 है जबकि अनीता 37 साल छह माह की हैं। इस पद के लिए बीएससी और लाइब्रेरी साइंस की डिग्री चाहिए लेकिन अनीता बीएससी नहीं है। श्री मोदी ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के साथ समझौता कर रहे हैं।

क्या था मामला
स्वास्थ्य मंत्री की बेटी अनीता कुमारी की नियुक्ति संस्थान में संविदा पर बतौर लाइब्रेरियन ग्रेड थ्री के पद पर तीन माह पूर्व हुई थी। संस्थान के निदेशक प्रो. एनआर विश्वास की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी ने 17 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया था। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया जा रहा था कि स्वास्थ्य मंत्री की बेटी के लिए संस्थान में नियमावली का बदलाव किया गया है जिसमें योग्यता और न्यूनतम उम्र सीमा कम कर दी गई जिससे मंत्री की बेटी को लाभ हुआ।

विपक्ष का यह भी आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्री ने संस्थान के चेयरमैन होते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया है। यह भी आरोप है कि 17 अभ्यर्थियों में से कई ऐसे थे जिनका अनुभव और योग्यता स्वास्थ्य मंत्री की बेटी से अधिक था इसके बावजूद उनकी नियुक्ति की गई।  इस मामले में संस्थान के निदेशक समेत साक्षात्कार बोर्ड पर तलवार लटक गई है। बता दें कि आईजीआईएमएस में इससे पूर्व भी नियुक्ति में फर्जीवाड़ा के कई मामले विवादों में रहा है।
 
स्वास्थ्य मंत्री की बेटी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया है। बोर्ड ने साक्षात्कार को पारदर्शी तरीके लिए किया है। मैं किसी प्रकार की जांच के लिए तैयार हूं। संविदा पर जिस प्रकार एम्स में नियुक्ति होती है उसी प्रकार संस्थान में भी किया गया था। नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
प्रो. एनआर विश्वास, निदेशक, आईजीआईएमएस।

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