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राजीव रौशन हत्याकांड में शहाबुद्दीन को बेल नहीं

चर्चित तेजाब कांड के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन हत्याकांड में पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन को जमानत नहीं मिली। एडीजे चार अजय कुमार श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। अब शहाबुद्दीन जमानत के लिए हाई कोर्ट जाएंगे। 

बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभय कुमार राजन ने शहाबुद्दीन की जमानत के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में तीन सप्ताह पहले अर्जी दाखिल की थी। डीजे ने अर्जी को एडीजे चार के यहां ट्रांसफर कर दिया था। 11 जून को दोनों पक्षों ने बहस की थी। बचाव पक्ष ने कहा था कि शहाबुद्दीन जेल में घटना होने के पहले से बंद है, उन्हें फंसाया गया है।

राजीव रौशन हत्याकांड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह माना जाएं कि इसमें शहाबुद्दीन की  संलिप्तता है। इसलिए उन्होंने कोर्ट से जमानत देने के लिए आग्रह किया था। प्रभारी पीपी रवीन्द्र शर्मा ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि मुदई व गुप्तचर के आधार पर शहाबुद्दीन का नाम आया है। उसी दिन दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो गईं। लेकिन उसदिन फैसला नहीं सुनाया गया। दो दिन कोर्ट बंद हो जाने के कारण सोमवार को फैसला सुनाया गया।

शहाबुद्दीन के अधिवक्ता ने कहा कि जल्द ही जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी। दो चार दिन नकल निकालने में समय लगेगा, उसके बाद बेल के लिए हाईकोर्ट जाया जाएगा। मालूम हो कि चर्चित तेजाब कांड के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की हत्या 16 जून 2014 को डीएवी मोड़ पर अपराधियों ने गोली मारकर कर दी थी। इसमें जेल में बंद मो. शहाबुद्दीन का नाम आया था।

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