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बेटे के गले में जंजीर बांधने को मजबूर है मां की ममता

उस मां पर क्या गुजरती होगी जब उसे अपने ही बेटे के गले में जंजीर बांधनी पड़ती होगी। इतना ही नहीं जंजीर भी किसी  ऐसे स्थान पर बांधनी होती है कि वह इसे लेकर कहीं भाग न निकले। कहने की जरूरत नहीं कि इस मजबूरी में भी एक मां की ममता छिपी है। न सिर्फ ममता बल्कि इसे तो ममता की पराकाष्ठा ही कही जा सकती है।

मेसकौर के रसलपुरा की रहने वाली इस बेवा मां को अपने मानसिक बीमार बच्चे दीपक में कहीं कुछ कमी नजर नहीं आती। दीपक आज भी उसका दुलारा बेटा है। उसे वह कभी भी अकेला नहीं छोड़ती। यों तो दीपक समेत उसके तीन बेटे हैं और पति की मौत के बाद से सबकी जिम्मेवारी उसके ऊपर आ गयी है परंतु  दीपक आज भी उसे घर का असली चिराग ही लगता है। इस लाचार मां को अब भी भरोसा है कि उसका दीपक ठीक हो जाएगा और एक दिन कुल दीपक बन कर दिखाएगा।

मध्य बिहार ग्रामीण बैंक की हिसुआ नगर स्थित रसलपुरा शाखा में कुछ काम से सोमवार को पहुंची इस मां ने जब एक दुकान के शटर से लगा कर अपने कलेजे के टुकड़े को जंजीर से बांधा तो आसपास के लोग चौंक पड़े। पूछने जुटे लोगों को देखकर वह इतना डर गयी कि खामोश हो गई। बहुत पूछने पर बस गांव और बेटे का नाम ही वह बता सकी। सबसे यह जरूर पूछती रही कि क्यों पूछताछ कर रहे हैं और किसलिए फोटो खींच रहे हैं। ऐसा मत करिए, मेरे बेटे के साथ कुछ मत करिए। इस मां की तड़प से वहां मौजूद सभी विचलित हो उठे। दीपक और उसकी मां की लाचारी पर सभी दु:खी दिखे।

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  • Web Title:बेटे के गले में जंजीर बांधने को मजबूर है मां की ममता