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पटना में चोरी, मुजफ्फरपुर में कटाई, दिल्ली में बिक्री

पटना पुलिस ने रविवार को आमलगंज थाने के बिस्कोमान गोलंबर के पास से चार अपराधियों को पकड़कर अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इनके चार साथियों को मुजफ्फरपुर से पकड़ा गया है। यह गिरोह पटना से लग्जरी वाहन चुराकर मुजफ्फरपुर में उसको कटता था। इसके बाद दिल्ली ले जाकर बेच देता था।

पकड़े गए आठों अपराधियों में मो. असलम उर्फ जूही (रतनपुरा, गायघाट, मुजफ्फरपुर), मुकेश कुमार (कांटी, मुजफ्फरपुर), विकास कुमार माली (गायघाट, आलमगंज), राजीव कुमार (गुड़ की मंडी, आलमगंज), मो. निजाम (मनियारी, मुजफ्फरपुर), मो. इसलाम (चंदबारा, मुजफ्फरपुर), शशिभूषण मिश्रा (सिकंदरपुर, मुजफ्फरपुर) व कुणाल साव (संपतचक, गौरीचक) शामिल हैं। इनके पास से दो देसी पिस्टल, चार कारतूस, सात मोबाइल, 24 चाबी, दो बाइक, लग्जरी चारपहिया वाहन के छह इंजन, चेचिस, नंबर प्लेट, स्र्टेंरग व कई तरह के कागजात मिले हैं।

एसएसपी जितेंद्र राणा ने बताया कि हाल के दिनों में पटना से टाटा सूमो व बोलेरो गाड़ी की चोरी की दर्जनों घटनाएं हुईं हैं। इसको देखते हुए सभी थानों को अलर्ट कर वाहन चेकिंग का निर्देश दिया गया। इसी क्रम में रविवार को पुलिस बिस्कोमान गोलंबर के समीप चेकिंग के दौरान मो. असलम, मुकेश कुमार, विकास कुमार माली व राजीव कुमार पकड़े गए। इनके पास से देसी पिस्टल, कारतूस, चोरी की बाइक, मोबाइल फोन व चाबियों का गुच्छा मिला है।

मुजफ्फरपुर में था गैरेज
एसएसपी के मुताबिक, अपराधियों ने पूछताछ में बताया कि वे सभी अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के सदस्य हैं। पटना से वाहन चुरा कर मुजफ्फरपुर के मुसहरी थाने के सगहरी अहलेदाद चक स्थित जाकिर हुसैन व मो. मुख्तार के गैरेज में लाकर कटाई करते हैं। बाद में इनकी निशानदेही पर जाकिर व मो. मुख्तार के गैरेज पर छापा मारा गया और मो. नेजाम, मो. इस्लाम, शशिभूषण मिश्रा व कुणाल साव को गिरफ्तार किया गया। गैराज करीब एक एकड़ में फैला है। यहां गाड़ियों का इंजन निकाला जाता था।

बाद में गाड़ियों के पार्ट्स को अलग किया जाता था। एसएसपी ने बताया कि पूरे गिरोह का सरगना अजीत उर्फ मामा है। वह चोरी के वाहनों को असलम सहित अन्य अपराधियों से खरीदता था। गैरेज में वाहनों की कटाई करने के बाद उसके इंजन को दिल्ली, मुंबई, कानपुर आदि शहरों में बेच देता था। हालांकि अजीत पुलिस के हाथ नहीं लग सका है। पटना में गिरोह का सरगना मो. असलम है। उसे एक गाड़ी पहुंचाने में 40 हजार रुपए मिलते थे। वहीं उसके साथियों को पांच-पांच हजार रुपए दिए जाते थे।

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