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बिहारः घोटाले के 19 साल बाद रिटायर न्यायाधीश समेत पांच पर चार्जशीट

बिहारः घोटाले के 19 साल बाद रिटायर न्यायाधीश समेत पांच पर चार्जशीट

राज्य के बहुचर्चित आवास घोटाला के मामले में लगभग 19 साल बाद चार्जशीट दायर की गयी है। रिटायर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह तत्कालीन विधि परामर्शी आवास बोर्ड रामजन्म सिंह समेत पांच रिटायर क्लर्क के खिलाफ विशेष अदालत में बुधवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने चार्जशीट किया है। घोटाले के इस मामले में बिहार राज्य आवास बोर्ड के तत्कालीन सहायक अवधेश, चन्द्रिका प्रसाद यादव, जगदीश प्रसाद, सिद्धेश्वर प्रसाद पर जालसाजी, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
 
ब्यूरो ने अपने चार्जशीट में कहा है कि बिहार राज्य आवास बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने निजी लाभ के लिए अपने पद का जमकर दुरुपयोग करते हुए आवास आवंटन प्रकिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता की है। अभियुक्तों ने बोर्ड के नियमों व कानून का जमकर उल्लंघन किया। इससे राज्य आवास बोर्ड को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हुई।

दो अभियुक्तों की हो चुकी है मौत

आवास घोटाले के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 10 सितंबर 1996 को एक प्राथमिकी दर्ज की और अनुसंधान शुरू किया जो लगभग 19 वर्षों तक चलता रहा। अनुसंधान के दौरान राज्य आवास बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष शंभू ठाकुर और वास्तुविद एसएन झा की मृत्यु हो गयी है।

चर्चित आवास घोटाला का खुलासा

विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में ब्यूरो ने आवास घोटाले का खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि राज्य आवास बोर्ड द्वारा लोहिया नगर में मध्यमवर्गीय लोगों के लिए बनाए गए आवास की आवंटन प्रक्रिया में जमकर अनियमितता की गई। सही दावेदारों को आवास नहीं देकर निजी लाभ वाले दावेदारों को आवंटन किया गया। सही आवंटन को रद्द कर दिया गया।

जो वरीयता सूची में नहीं थे उन्हें भी गलत तरीके से आवास का आवंटन कर दिया गया। कई व्यावसायिक प्लाट को आवासीय प्लॉट में बदल दिया गया। इलेक्ट्रिक सब स्टेशन की जमीन के आधे भाग को भी आवासीय में उपयोग कर आवंटित किया गया। लोहिया नगर डाक्टर्स को-ऑपरेटिव को जो भी जमीन दी गयी, इसे बहुत कम दाम पर आवंटित किया गया।   इससे आवास बोर्ड को 25 लाख का नुकसान हुआ था। इस जगह भी कई कीमती व्यावसायिक प्लॉट को आवासीय प्लाट में बदलकर बिक्री की गई जिससे आवास बोर्ड को 50 लाख रुपए की हानि हुई।

दहेज के रूप में भी किया गया था आवंटन 

मध्यवर्गीय मकान संख्या 275 को बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष शंभू ठाकुर ने अपने दामाद परमेश्वर पाण्डेय को दहेज के रूप में दिया था जबकि यह मकान किसी दूसरे को आवंटित होना चाहिए था। मकान संख्या 213 को आवास बोर्ड के विधि परार्मश सह भू संपदाधिकारी रामजन्म सिंह के नाम पर नाजायज ढंग से आवंटित किया गया। इसपर बोर्ड का 50 हजार रुपया अधिक खर्च हुआ।

आवेदन नहीं देनेवालों को भी मिला प्लॉट
पटना के कृष्णा नगर के कई व्यवसायिक उघोग की जमीन बिना निलामी कराए ही बेच दी गई। बहादुरपुर में निबंधित लोगों को जमीन देने में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता की गयी। जो निबंधित थे उनको जमीन नहीं दी गई। लेकिन वैसे लोगों को आवंटित किया गया जिन्होंने आवेदन भी नहीं दिया था। आदित्यपुर और जमशेदपुर में कई भूखंडों के आवंटन में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी की गई जिससे आवास बोर्ड को करोड़ों रुपए राजस्व की क्षति हुई।

10 सितंबर 1996 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने दर्ज की थी प्राथमिकी

चार्जशीट में क्या
-आवास बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों ने निजी लाभ के लिए पद का दुरुपयोग किया
-आवास आवंटन प्रकिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता 
-अभियुक्तों ने बोर्ड के नियमों व कानून का जमकर उल्लंघन किया
-इससे राज्य आवास बोर्ड को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हुई

लोहियानगर में ऐसा हुआ नुकसान
 -सही दावेदारों को आवास नहीं देकर निजी लाभ वाले दावेदारों को आवंटन
-सही आवंटन को रद्द कर दिया गया
 -जो वरीयता सूची में नहीं थे उन्हें भी गलत तरीके से आवास का आवंटन
 -कई व्यावसायिक प्लाट को आवासीय प्लॉट में बदल दिया गया
 -लोहिया नगर डाक्टर्स को-ऑपरेटिव को कम दाम पर प्लॉट का आवंटन

बहादुरपुर में खूब हुई मनमानी
 -निबंधित लोगों को जमीन देने में बड़े पैमाने पर अनियमितता
- जो निबंधित थे उनको जमीन नहीं दी गई
-वैसे लोगों को जमीन का आवंटन हुआ, जिन्होंने आवेदन भी नहीं दिया था

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