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सांप्रदायिकता का जहर घोल रही भाजपा: पवार

सांप्रदायिकता का जहर घोल रही भाजपा: पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि हुकूमत के जरिए सांप्रदायिक विचारधारा का प्रसार इस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। केंद्र शिक्षा के भगवाकरण की कोशिश कर रहा है। नई पीढ़ी के मन में जहर घोलने की साजिश चल रही है। एनसीपी देश की एकता और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए काम करेगी। सांप्रदायिक शक्तियों का विरोध किया जाएगा।

बुधवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के खुले सत्र में श्री पवार ने कहा कि समाज में सद्भाव में कमी आई है। अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों पर आक्रमण किया जा रहा है। घर वापसी और लव जिहाद जैसे आपत्तिजनक नारों को बुलंद किया जा रहा है।

देश की जनता ने बदलाव के लिए नरेंद्र मोदी को बहुमत दिया था। एक साल में ही जनता का मोहभंग होने लगा है। भाजपा ने देश के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। दूसरे देशों में जाकर जो राजनीति की जा रही है उससे देश की छवि धूमिल हो रही है। देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने का वादा करने वाली सरकार विकास के नाम पर अपना राजनैतिक एजेंडा थोप रही है।

कहा कि कृषि बजट में भारी कटौती की गई है, जो चिंता का विषय है। इसका असर राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पूर्वोत्तर भारत में हरित क्रांति और राष्ट्रीय बागवानी मिशन पर पड़ेगा। नरेंद्र मोदी हर बात में आर्थिक विकास की बात दोहराते हैं लेकिन किसी भाषण या मन की बात में देश की जनता की बदहाली का जिक्र नहीं करते हैं। भाजपा के घोषणा पत्र में लिखा था कि किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50 फीसदी लाभ मिलना सुनिश्चित करेगी।

मोदी सरकार ने फसलों का जो समर्थन मूल्य घोषित किया वह यूपीए सरकार के समर्थन मूल्य से भी कम है। कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए नया भूमि अधिग्रहण विधेयक लाया गया। विधेयक किसानों के लिए नहीं, चंद अमीर घरानों के लिए है। सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के चार फीसदी तक लाकर अपनी पीठ थपथपा रही है।

यह उपलब्धि कर राजस्व में वृद्धि के बूते नहीं, बल्कि योजना मद में कटौती के सहारे हासिल की गई है। मनरेगा समेत तमाम योजनाओं के आवंटन घटा दिए गए हैं। इसके अलावा एनसीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में यह तय हुआ कि बिहार का चुनाव देश की राजनीति की दिशा तय करेगी। पार्टी की जिम्मेदारी है कि सभी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष दलों को एक मंच पर लाकर भाजपा की हार सुनिश्चित की जाए।

विस्तारित कार्यसमिति द्वारा मंगलवार को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रस्ताव जो तैयार किए गए थे, उसे खुले सत्र के दौरान सर्वसम्मति से पास किया गया। अधिवेशन के दौरान महासचिव सांसद तारिक अनवर, सांसद सुप्रिया सुले, सांसद मो. फजल, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, पीतांबरन मास्टर, डीपी त्रिपाठी, राजेश टोपे, जयंत पाटिल, प्रदेश अध्यक्ष बिहार मोहन लाल अग्रवाल, जिमी जॉर्ज, परवेज अहमद, संजय सिंह, उदय सम्राट आदि ने विचार व्यक्त  किया।

अधिवेशन में लिए गए संकल्प
राजनीतिक : एनडीए सरकार के एक साल के क्रियाकलाप से स्पष्ट है कि यह सरकार सांप्रदायिकता और भेदभाव की पक्षधर है। देश का माहौल यह है कि अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। महत्वपूर्ण संस्थानों में संघ समर्थित लोगों को पदासीन किया जा रहा है। पाठ्यक्रमों की धर्मनिरपेक्षता में हस्तक्षेप किया जा रहा है।

इस राजनैतिक माहौल से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए एनसीपी संगठन को मजबूत किया जाने का प्रस्ताव पास किया गया। भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध किया गया। एनसीपी ने सरकार से मांग की है कि इस नये अध्यादेश पर राष्ट्रव्यापी विचार मंथन हो और सभी पक्षों के हितों का ख्याल रखकर ही इस अध्यादेश को कानून की शक्ल दी जाए।

आर्थिक : एनसीपी का विश्वास है कि किसी देश का आर्थिक विकास सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद से नहीं मापा जा सकता है। आर्थिक समृद्धि अनिवार्य है लेकिन यह समृद्धि ऐसी होनी चाहिए कि उसका लाभ देश के कमजोर तबके तक पहुंचे। रोजगार  के पर्याप्त अवसर बनाने, किसानों, भूमिहीनों, श्रमिकों, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लोगों के कल्याण की योजनाओं को प्राथमिकता देने, खेतिहर मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी कानून को पूरी तरह लागू कराने की प्राथमिकता तय की गई।

सामाजिक : महिलाओं को समाज में प्रगति के पर्याप्त अवसर मिले, इसके लिए जरूरी है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में पास हो और कानून बने। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिले। अल्पसंख्यकों व पिछड़े वर्ग का कल्याण हो और उनमें आत्मविश्वास का संचार हो। गांव शहर के बीच असंतुलन कम किया जाए। स्मार्ट सिटी की कल्पना अच्छी है, लेकिन गांवों को भी स्मार्ट बनाया जाए। गांवों की उपेक्षा कर बेहतर शहर बनाने का एनसीपी विरोध करेगी।

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