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बिहार में बनेगा मिट्टी का डिजिटल नक्शा

बिहार में बनेगा मिट्टी का डिजिटल नक्शा

राज्य में मिट्टी का डिजिटल नक्शा बनेगा। नक्शे को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। किसी भी वसुधा केन्द्र से किसान मिप्ती की संरचना की पूरी जानकारी ले सकेंगे। यहां तक कि अगर उनके पास एंड्रायड मोबाइल है, तो गांव में जाकर अपने प्लॉट की मिप्ती की संरचना भी जान सकेंगे।

इसके लिए कृषि विभाग ने ‘मिट्टी बिहार’ नाम से नया एप्लीकेशन तैयार किया है। इस एप्लीकेशन को गुगल से भी डाउनलोड किया जा सकता है। इसी आधार पर किसानों को ‘स्वायल हेल्थ कार्ड’ भी दिया जाएगा। यह काम तीन साल में पूरा होगा। नई योजना पर कृषि विभाग ने काम शुरू कर दिया है। इसमें लगभग साढ़े पांच हजार कृषि समन्वयक और किसान सलाहकारों को लगाया गया है। ये लोग हर रोज मिप्ती के कम से कम दस नमूने इकळा कर इसे एप्लीकेशन में लोड करते हैं। अभी इसके लिए उन्हीं लोगों का चयन किया गया है जिनके पास एंड्रायड फोन हो। सरकार अपनी ओर से मोबाइल नहीं देती है।

क्या है प्रक्रिया
गांव में मिट्टी का नमूना लेने वाले कर्मी के मोबाइल में ‘मिट्टी बिहार’ नामक एप्लीकेशन डाल दिया जाता है। यह अक्षांश और देशांतर के अधार पर गांवों की पहचान करता है। जैसे ही नमूना लेने वाला कर्मी जिले में प्रवेश करता है उसके मोबाइल पर गांव का नक्शा आ जाता है। गांव में मिप्ती का नमूना लेकर वह पूरा आंकड़ा उसी अक्षांश और देशांतर पर डालता है। बाद में प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच होने पर पूरी संरचना एप्लीकेशन में डाल दी जाती है।

कैसे लिए जाएंगे नमूने : सिंचित क्षेत्र के लिए दस हेक्टेयर और असिंचित क्षेत्र के लिए ढाई हेक्टेयर क्षेत्र पर एक नमूना की जांच होगी। इसके लिए उस क्षेत्र में कई जगह से नमूने संग्रह किए जाएंगे और उन्हें मिलाकर एक नमूना बना दिया जाएगा। उस नमूने की जांच के बाद उसे एप्लीकेशन में डाल दिया जाएगा। उसी आधार पर किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिया जाएगा।

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