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बिहार को हर हाल में मिले वाजिब हकः नीतीश

बिहार को हर हाल में मिले वाजिब हकः नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार को हर हाल में इसका वाजिब हक मिलना चाहिए। लंबे समय से राज्य सरकार विशेष दर्जे की मांग कर रही है। लगातार प्रयास और कानूनी व आर्थिक आधार को मजबूती से रखने के बाद केन्द्र विशेष सहायता देने का बाध्य हो रहा है, लेकिन आश्चर्य है कि इसके लिए आयोजित बैठक में विशेष सहायता के लिए विस्तृत प्रस्ताव देने वाली और 11 करोड़ जनता का प्रतिनिधत्व करने वाली बिहार सरकार को दरकिनार कर दिया गया। यह हमारे सारे प्रयासों को अलग कर श्रेय लेने की होड़ में किया गया।

कुमार ने कहा है कि केन्द्र सरकार राज्य सरकार के विस्तृत प्रतिवेदन को दरकिनार कर अपने स्तर से विशेष पैकेज तैयार कर रही है। पहले से चली आ रही बातों को ही नया आवरण देकर जनता को ठगने का प्रयास हो रहा है। इसमें चार वर्षों में राज्य को 24 घंटे बिजली देने की बात कही जा रही है। सबको मालूम है कि राज्य सरकार बहुत पहले से इस पर काम कर रही है। बिजली क्षेत्र में सुधार को लोग अनुभव भी कर रहे हैं। हमारी इस उपलब्धि को भी हड़पने का प्रयास हो रहा है। केन्द्र सरकार यह खुलासा करे कि वह बिजली के क्षेत्र में नया क्या करना चाह रही है।

उन्होंने कहा है जनआकांक्षाओं के अनुसार हमारा प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और निति आयोग के पास लंबित है। अगर ठोस निर्णय लेना है तो प्रस्ताव पर तुरंत विचार कर कार्रवाई हो। 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा और इस वर्ष के बजट के बाद राज्य में सर्वदलीय बैठक हुई। भाजपा को छोड़ सभी दलों के फैसले के अनुसार प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया गया। 26 मार्च को उन्होंने खुद प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया। बाद में दस अप्रैल को मुख्य सचिव ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से मिलकर विस्तृत प्रस्ताव दिया। 

बिहार सरकार के केन्द्र को दिए प्रमुख प्रस्तावः-

- बीआरजीएफ: पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि से 12 हजार करोड़ स्वीकृत हुए। लेकिन राज्य को 2014-15 तक मात्र तीन हजार सात सौ करोड़ मिले। शेष पैसे का भुगतान कर इसे आगे भी जारी रखा जाए।
- 14वें वित्त आयोग की अनुशांसा के आलोक में हुए घाटे की भरपाई हो। इसके लिए प्राथमिकता के क्षेत्र हैं-

ग्रामीण संपर्कता : 250 से अधिक आबादी वाले गांवों को सड़क से जोड़ने को 41380 किलोमीटर सड़क बनानी होगी। इसके लिए 32 हजार 600 करोड़ की जरूरत।

सड़क व पुल निर्माण : कच्ची दरगाह के पास गंगा पर छह लेन पुल बनना है। इसके लिए चार हजार 988 करोड़ की जरूरत होगी। इसके अलावा गांगा पथ के निर्माण को तीन हजार 160 करोड़ चाहिए।

कृषि :  कृषि रोड मैप को अमल में लाने को पांच वर्षों में 41 हजार 587 करोड़ मिले।

शिक्षा : तीन हजार 663 पंचायतों में उच्च माध्यमिक स्कूल खोलने को पांच हजार 732 करोड़ दिए जाएं। पांच वर्ष में एक करोड़ लोगों को रोजगारोन्मुखी कौशल देने को 12 हजार 580 करोड़ केंद्र दे।

पंचायत : छह हजार 633 पंचायतोंं में पंचायत सरकार भवन बनाने व उपस्कर के लिए सात हजार 285 करोड़ ़चाहिए।

मेट्रो :  पटना मेट्रो रेल के पहले फेज के लिए 12 हजार 500 करोड़ चाहिए।

नगर विकास : जेनुरूम का 750 करोड़ अभी लंबित हैं। राजीव आवास में 22 शहरों की डीपीआर मंजूरी के लिए लंबित है। नमामी गंगे के तहत 1231 करोड़ रुपये मिलने हैं, लेकिन मात्र 126 करोड़ रिलीज हुआ है।

पर्यटन : बौद्ध, जैन, सूफी, रामायण, सिख, शक्ति और गांधी परिपथ के लिए पांच हजार 912 करोड़ की जरूरत

ऊर्जा : चौसा, पिरपैंती और कजरा में थर्मल पावर के लिए एमओयू हुआ है। इसके लिए देववचा पश्चिम कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है। केन्द्र ऊर्जा मंत्रालालय को निर्देश दे कि इस संबंध में जल्द नीतिगत फैसला हो।

उद्योग : बरौनी रिफाइनरी का विस्तार और पेट्रोकेमिकल की स्थापना हो। इनके अलावा भी इनमें कई अन्य प्रमुख प्रस्ताव भी शामिल हैं।

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