DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वाणसागर नहीं देगा पानी, भेजा त्राहिमाम संदेश

मध्य प्रदेश की वाणसागर परियोजना ने इंद्रपुरी बराज को पानी देने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर जल संसाधन विभाग ने सरकार को त्राहिमाम संदेश भेजा है। वाणसागर से बराज को पानी मुहैया कराने के लिए अब बिहार सरकार मध्य प्रदेश की सरकार से वार्ता करेगी। पिछले साल भी वाणसागर ने इंद्रपुरी बराज को पानी देने से इनकार कर दिया था। तब बिहार सरकार ने वाणसागर को अग्रिम राशि देकर पानी मंगवाया था। अब वाणसागर का पैसा भी बकाया नहीं है। फिर भी पानी देने से परियोजना के अधिकारी इनकार कर रहे हैं।

ऐसी स्थिति में गुरुवार को बराज में उपलब्ध 3500 क्यूसेक पानी नहरों में छोड़ दिया गया, ताकि किसान बिचड़ा डाल सकें। लेकिन, आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि जब तक 9800 क्यूसेक पानी एक साथ नहीं छोड़ा जाएगा, तब तक उक्त जिलों की नहरों तक ही पानी नहीं पहुंच सकेगा। जब नहरों के अंतिम छोर तक ही पानी नहीं पहुंच सकेगा, तो किसान बिचड़ा कैसे डाल सकेंगे? अगर बिचड़ा डाल भी लेते हैं, तो वे रोपनी कैसे कर पाएंगे, यह सवाल किसानों को सालने लगा है।

हालांकि उत्तर प्रदेश की रिहंद सागर परियोजना से गुरुवार को 3613 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो दो दिन बाद बराज में पहुंचेगा। अगर इंद्रपुरी बराज व रिहंद के पानी को जोड़ते भी हैं तो अभी भी 1687 क्यूसेक पानी की जरूरत है। लेकिन, यह आंकड़ा तो सिर्फ फस्र्ट फेज का है। अगर किसान बिचड़ा डाल भी लेते हैं, तो बराज के पानी के भरोसे रोपनी नहीं कर सकेंगे, जबकि मौसम विभाग अभी हीट वेव का खतरा बता रहा है। सिंचाई विभाग भी यह मान रहा है कि अगर समय पर बारिश नहीं हुई, तो वह नहरों को पानी आपूर्ति नहीं कर सकेगा।

इंद्रपुरी बराज से रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, पटना, जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल जिलों की करीब नौ लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। इस इलाके को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। लेकिन, समय रहते सिंचाई का प्रबंध बेहतर नहीं किया गया, तो जाहिर है किसान पंपसेट के भरोसे रोपनी नहीं कर सकेंगे। तब ‘धान का कटोरा’ खाली रह जाएगा और किसान नया चावल का माड़-भात भी नहीं खा सकेंगे। बेटियों के हाथ पीले करने और बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला कराने के उनके सपने भी अधूरे रह सकते हैं।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता रामेश्वर चौधरी ने बताया कि वाणसागर ने इंद्रपुरी बराज को पानी देने से इनकार कर दिया है। इसके लिए सरकार को पत्र भेजा गया है। बराज में पानी की कमी से भी विभाग को अवगत कराया जा चुका है। अगर प्रकृति ने साथ छोड़ा और वाणसागर से पानी नहीं मिला, तो बराज से पानी आपूर्ति नहीं की जा सकती है। रिहंद ने 3613 क्यूसेक पानी गुरुवार को छोड़ा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वाणसागर नहीं देगा पानी, भेजा त्राहिमाम संदेश