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पटना में नक्सलियों के लिए बन रहा था हथियार

पटना में नक्सलियों के लिए बन रहा था हथियार

पटना में नक्सलियों को सप्लाई करने के लिए हथियार बनाया जा रहा था। उससे बड़े वारदात को अंजाम देने की तैयारी चल रही थी। बहादुरपुर हाउसिंग कॉलोनी बम बलास्ट का सरगना और प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई का बिहार संगठन प्रभारी अवधेश उर्फ अबोध उर्फ चुहवा ने यह खुलासा किया है। उसके ही इशारे पर हथियार सप्लायर सिद्धी कुमार ने पटना सिटी के धवलपुरा के सुभाष महतो को सौ हथियार बनाने का ऑर्डर दिया था। रामकृष्णानगर के खेमनीचक से गिरफ्तार अवधेश की निशानदेही पर मंगलवार को धवलपुरा में चल रहे गन फैक्ट्री को ध्वस्त किया गया।

एसएसपी जितेंद्र राणा ने बताया कि अवधेश पीएलएफआई के कार्यवाहक प्रभारी गणेश शंकर का बड़ा भाई है और बिहार प्रभारी भी है। अवधेश पर पूरे बिहार में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी थी। वह राज्यभर में लड़कों को सेट करके ट्रेनिंग देने का काम करता था। किस जगह पर कितना हथियार चाहिए, कितने लड़कों की आवश्यकता है यह सब उसके ऊपर था। 

हथियार सप्लायर और फाइनेंसर पकड़ाए
अवधेश ने ही पुलिस को हथियार सप्लायर सिद्दी कुमार के बारे में सूचना दी थी। उसकी निशानदेही पर ही सिद्धी को ट्रांसपोर्टनगर व उसके बहनोई संतोष कुमार को मसौढ़ी से गिरफ्तार किया गया है। संतोष अवधेश का रिश्तेदार है। वह संगठन के लिए फाइनेंसर का काम कर रहा था।

पटना में संगठन के विस्तार के लिए झारखंड से उसके खाते में लाखों रुपए ट्रांसफर किए जा रहे थे। वहीं पीएलएफआई को सिद्धी ने गोली से लेकर एके 47 तक हथियार सप्लाई किया है। वह धनरूआ के जहानपुर गांव का रहनेवाला है। पेशे से शिक्षक सिद्धी की वैशाली में पोस्टिंग है। उसके ऊपर बैंक डकैती, लूट, आम्र्स एक्ट आदि के 20 से अधिक मामले हैं। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में उस पर केस दर्ज हैं।

झारखंड में होती थी हथियारों की असेंबलिंग
बिहार व झारखंड में दर्जनों खूनी वारदातों को अंजाम दे चुके पीएलएफआई को सुभाष महतो लंबे समय से हथियारों की सप्लाई कर रहा था। सुभाष की अवैध गन फैक्ट्री पर मंगलवार की सुबह पुलिस ने छापेमारी कर भारी संख्या में अद्र्धनिर्मित हथियार, लेथ मशीन सहित अन्य उपकरण बरामद किये थे। हालांकि सुभाष महतो पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा था। पुलिस ने उसके बेटे सूरज को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पीएलएफआई से जुड़े तार का खुलासा हुआ।

निर्माण पटना में, असेंबलिंग झारखंड में
कुछ दिनों पहले ही सिद्धी ने सौ पिस्टल बनाने का ऑर्डर सुभाष को दिया था। पूछताछ में गिरफ्तार अपराधियों ने बताया कि सुभाष की मिनी गन फैक्ट्री में हथियारों के सभी पार्टस-पुरजे बनाये जाते थे। सुभाष पार्टस-पुरजे को बनाकर सिद्दी को दे देता था। बाद में सिद्धी उसे झारखंड में ले जाता था। वहीं हथियारों की असेंबलिंग होती थी। बाद में हथियारों को संगठन से जुड़े लोगों को बांट दिया जाता था।

बेटे के अपहरण का केस दर्ज कराया था चुहवा
पीएलएफआई के बिहार प्रभारी अवधेश ने कुछ महीने पहले रामकृष्ण नगर थाने में अपने बेटे के अपहरण का भी मामला दर्ज कराया था। मामले में उसने अपने पड़ोसी को आरोपित बनाया था। बाद में पुलिस ने जब छानबीन की तो पता चला कि अवधेश अपने बेटे को सिमडेगा स्थित भाई गणेश शंकर के पास रख दिया था। हालांकि पुलिस ने उसके पड़ोसी को जेल नहीं भेजा था। सदर डीएसपी रामाकांत प्रसाद ने बताया कि पीएलएफआई को सबसे पहले अवधेश ने ज्वाईन किया था। बाद में उसने अपने भाई गणेश शंकर को संगठन से जोड़ दिया। उसका भाई उससे भी आगे निकल गया। आज शंकर का स्थान संगठन में दिनेश गोप के बाद दूसरा है।

धंधा नहीं चला तो हथियार बनाने लगा
सुभाष पहले लेथ मशीन पर पंप मरम्मती का काम करता था। बाद में जब उसका धंधा मंदा हुआ तो वह अवैध रूप से हथियार बनाने का गण फैक्ट्री खोल दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसकी फैक्ट्री में आने वालों में नये-नये व संदिग्ध चेहरे नजर आते थे। उनके हाथों में बड़े झोले व बोरे हुआ करते थे। इसी बोरे व झोले में सुभाष की फैक्ट्री से हथियार लेकर जाते थे।

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