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वामदलों का बिहार बंद 21 जुलाई को

केंद्र और राज्य सरकार पर जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए वामदलों ने 21 जुलाई को बिहार बंद बुलाया है। इससे पूर्व 23 से 30 जून तक वामदलों की ओर से सभी प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन व घेराव किया जाएगा। बुधवार को भाकपा-माले के राज्य कार्यालय में वामदलों की संयुक्त बैठक में इसका निर्णय लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता सीपीआई के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह ने की। बैठक में सीपीआई नेता व पूर्व विधायक रामनरेश पांडे व सचिव मंडल के सदस्य रामबाबू कुमार, सीपीआईएम के राज्य सचिव अवेधश कुमार, सचिव मंडल सदस्य सर्वोदय शर्मा व अरुण मिश्र, सीपीआईएमएल के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेंद्र झा, केंद्रीय कमेटी सदस्य केडी यादव व राज्य स्थायी समिति के सदस्य राजाराम और एसयूसीआईसी के राज्य कमेटी सदस्य अरुण कुमार सिंह व सूर्यंकर जितेंद्र मौजूद थे।

बैठक के बाद वामदलों के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देशव्यापी आंदोलन के बावजूद मोदी सरकार तीसरी बार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लेकर आई है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार को जनता के अधिकारों व लोकतांत्रिक संस्थाओं की परवाह नहीं है। दूसरी ओर नीतीश कुमार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध का ढोंग रच रहे हैं।

बिहार में भागलपुर, बेगूसराय, पटना, भोजपुर आदि जिलों में किसानों से उनकी राय लिए बगैर नीतीश कुमार ने भूमि अधिग्रहण किया है। किसान मुआवजे की उचित मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों को जान तक गंवानी पड़ रही है। राज्य में भूमिहीनों को आवास के लिए तीन डिसमिल जमीन नहीं मिली। वासगीत कानून बनाने की बात अधूरी रह गई।

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