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युवा अपने हुनर का मास्टर बनें

युवा अपने हुनर का मास्टर बनें

शिक्षा में बहुत शक्ति है। इसी की बदौलत मैं सिंगापुर में खुद की कंपनी चला रही हूं। यहां अपनी माटी का मान बढ़ाने की कोशिश कर रही हूं। अब हमारा बिहार बदल रहा है। मुझे विश्वास है पुराने प्रतिष्ठित पटना विवि, नए गठित आईआईटी  और नालंदा विवि बिहार के गौरव को वापस लौटाएंगे। मैं महिलाओं को सशक्त बनाने में अपना योगदान देना चाहती हूं।
 
किसी न किसी बहाने मैं हर साल बिहार आती हूं। भले ही सिंगापुर में हूं, लेकिन रोजाना कोशिश करती हूं कि अपने देश, अपने शहर के लोगों से जुड़ाव बना रहे। मैं चाहती हूं कि बिहार आगे बढ़े। यहां की युवतियां-महिलाएं उच्च शिक्षा ग्रहण कर बिहार के विकास में सहयोग करें। यहां के बच्चे काफी होशियार हैं, लेकिन गांवों में बच्चों को शिक्षित करने की जरूरत है, क्योंकि शिक्षा से ही सशक्तीकरण संभव है।

किसी एक क्षेत्र के विशेषज्ञ बनें
मैं खुद का इनडोर प्ले ग्राउंड बिजनेस चलाती हूं। इसमें  पहले मैं हेज रिक्रूटमेंट (ऑस्ट्रेलिया की कंपनी), जेट एयरवेज, टीसीजी इंजीनियरिंग कंसल्टिंग सर्विसेज सहित कई बड़ी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं। इन कंपनियों में काम करके मुझे यह अहसास हुआ कि उच्च शिक्षा बहुत जरूरी है।

किसी खास क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए भी मेहनत करनी चाहिए। यह आपको किसी भी इंडस्ट्री में भीड़ से अलग खड़ा करती है। मेरे पापा कोल इंडिया में थे इसलिए मेरी पढ़ाई धनबाद में हुई। मैंने धनबाद के माउंट कॉरमेल स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। मिरांडा हाउस दिल्ली से स्नातक और इंदौर यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद विभिन्न कंपनियों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ।
शादी के बाद पति के साथ मैं लंदन और टोक्यो में भी रही। टोक्यो, जहां लोग एक कंपनी में पूरी जिंदगी गुजार देते हैं, वहां मेरे कई कंपनियों में काम के अनुभव को बड़ा सम्मान मिला। वहां की रिक्रूटमेंट इंडस्ट्री में मैंने अच्छा योगदान दिया। जापान के बारे में कुछ बताना चाहती हूं। वहां लोग समय के बहुत पाबंद होते हैं। इस छोटे से देश के विकास में इसका बड़ा योगदान है। दोबारा सिंगापुर आने के बाद कॅरियर और फैमिली में सामंजस्य बनाने के लिए मैंने खुद की कंपनी खोलने का निर्णय लिया और आज सफल हूं।

अपने हुनर का मास्टर बनिए
आज पूरे विश्व में सफलता का मानदंड केवल बेहतरीन गुणवत्ता है। मैं बिहार के युवाओं से कहना चाहती हूं कि आप अपने हुनर के मास्टर बनें। केवल नौकरी के चक्कर में न रहें। जब हम दूसरों को देखते हैं तो अपनी अच्छाइयां और बुराइयां साफ नजर आती हैं। युवा पीढ़ी को खुद में अच्छाइयां विकसित करने की जरूरत है, ताकि उनकी अलग पहचान बने। मुझे लगता है बिहार में लड़कियों की शिक्षा पर काम करने की जरूरत है खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। वहां सरकारी स्कूल तो हैं लेकिन उनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव है। शिक्षा में सुधार की जिम्मेवारी केवल सरकार की ही नहीं वहां के नागरिकों की भी है। अगर स्कूलों में शिक्षक हैं और पढ़ाई नहीं हो रही है तो सवाल कौन उठाएगा। सभी एक-दूसरे की ओर ताकते हैं और समस्या वर्षों से बनी हुई है। वहां के सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक रखे जाते हैं फिर भी पढ़ाई का स्तर घटिया है। मैं कई देशों में रह चुकी हूं, वहां तो ऐसा नहीं होता।

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