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महाबोधि मंदिर में न फ्लैश, न स्माइल प्लीज

महाबोधि मंदिर परिसर में मंगलवार को फोटोग्राफरों की चिर-परिचित आवाज, स्माइल प्लीज... मंगलवार को किसी के कान में नहीं गूंजी। कारण: स्थानीय फोटोग्राफरों ने मान्यता पत्र का रिन्यूवल नहीं करने के विरोध में पूरे दिन फोटोग्राफी का काम ठप रखा। महाबोधि मंदिर घूमने आए पर्यटक यहां की यादें साथ ले जाना चाहते हैं। इसके लिए वे महाबोधि मंदिर के बाहर स्थानीय फोटोग्राफरों से फोटो खिंचवाते हैं। दूसरी ओर बीटीएमसी सूत्रों का कहना है कि एक दो दिनों के अंदर  इनका मान्यता पत्र का नवीनीकरण कर दिया जायेगा।

बीटीएमसी ने महाबोधि मंदिर के बाहरी क्षेत्र में फोटोग्राफी के लिए 45 स्थानीय फोटोग्राफरों को मान्यता दे रखी है। इसके बदले बीटीएमसी प्रति फोटोग्राफर हर साल 18 हजार 2 सौ की राशि वसूल करती है। फोटोग्रफरों का नेतृत्व कर रहे उज्ज्वल कुमार ने बताया कि मान्यता पत्र की अवधि अप्रैल में ही समाप्त हो चुकी है। इसके बाद बीटीएमसी ने सभी छायाकारों से लगभग तीन हजार रुपये जमा कराकर दो माह के लिए फोटोग्राफी करने की अनुमति दी थी। यह अनुमति भी 31 मई समाप्त हो गयी।

फोटाग्राफरों का कहना है कि मान्यता पत्र के नवीनीकरण के लिए बीटीएमसी कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। इस मामले में बीटीएमसी सचिव के कार्यालय सहायक गजेन्द्र कुमार ने बताया कि बीटीएमसी अध्यक्ष डीएम संजय कुमार अग्रवाल को सूचना मिली थी कि फोटोग्राफर गाइड लाइन नहीं मान रहे हैं। डीएम ने तीन सदस्यीय समिति से इसकी जांच करायी थी। जांच में डे्रस व आइ कार्ड का उपयोग न करने तथा रेट चार्ट नहीं दर्शाने जैसी कमी पायी गई। इसी को लेकर कुछ दिन के लिए नवीनीकरण कार्य रोक दिया गया। जांच के बाद फोटोग्राफरों को गाइड लाइन के तहत काम करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

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