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पीएनबी से मोटरसाइकिल सवार लुटेरों ने की 10 लाख की लूट

नवीनगर प्रखंड के टंडवा थाना क्षेत्र में स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से पांच अज्ञात सशस्त्र लुटेरों ने सोमवार की दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे 10 लाख 6 हजार रुपए लूट लिए। लूट के दौरान अपराधियों ने पिस्तौल की बट से मार कर बैंक के कैशियर राघवेन्द्र कुमार को घायल कर दिया। उनका इलाज नवीनगर अस्पताल में चल रहा है।

प्राप्त सूचना के अनुसार सोमवार को बैंक में आम दिनों की तरह कामकाज चल रहा था और लगभग दो दर्जन से ज्यादा ग्राहक बैंक में मौजूद थे। इसी बीच बैंक के मुख्य गेट की अ‍ोर से पांच अपराधी हाथों में पिस्तौल और रिवाल्वर लहराते घुसे और सभी को अपनी जगह स्थिर रहने का आदेश दिया। इसके बाद उन्होने ग्राहकों को एक ओर खड़ा कर दिया और तीन लुटेरे बैंक कर्मियों के पास आ गए।

उन्होने कैशियर के साथ ही प्रभारी मैनेजर संतोष कुमार को भी गिरफ्त में ले लिया और उनसे सेफ खोलने की बात कहीं। इसपर आनाकानी करने पर कैशियर राघवेन्द्र कुमार को पिस्तौल के बट से मारकर घायल कर दिया गया। राघवेन्द्र डेहरी के निवासी हैं। इसके बाद लुटेरे उस दिन के कैश पर टूट पड़े और सारा कैश ले कर लोगों को धमकाते हुए बैंक से बाहर चले गए।

लुटेरों के जाने के कुछ देर बाद मैनेजर ने स्थानीय थाने को इसकी सूचना दी पर तब तक लुटेरे पुलिस की पकड़ से दूर हो गए थे। लुटेरों द्वारा कंप्यूटर क्षतिग्रस्त किए जाने से लूटी गई रकम के बारे में बैंक अधिकारी अभी पूरी तरह नहीं बता पा रहे। मैनेजर संतोष कुमार का कहना है कि अब तक के रिकार्ड मिलान के अनुसार लुटेरे बैंक के 10 लाख 6 हजार 962 रु तथा बैंक कर्मियों के लगभग 10 हजार रुपए और मोबाइल लूट कर ले गए। पर एसडपीपीओ अजय नारायण यादव का कहना है कि लूट की रकम चार से पांच लाख रुपए ही है। उन्होने कहा कि बैंक की सेफ सुरक्षित है और कैश ट्रांजेक्शन के लिए निकले रुपए ही लूटे गए हैं। जाते जाते लुटेरे बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरे ले गए और बैंक कर्मियों के मोबाइल के सिम निकाल कर तोड़ दिए।

एसपी ने की बैंककर्मियों और चौकीदार से पूछताछ
नवीनगर संवाद सूत्र। टंडवा पीएनबी में लूट की सूचना पर खुद एसबी बाबूराम एसडीपीओ अजय नारायण यादव और सीआरपीएफ कमांडेंट टी.एन.सिंह के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और बैंक कर्मिर्यों तथा बैंक में तैनात चौकीदार से पूछताछ की। अधिकारी उस वक्त चौंक गए जब चौकीदार रसूल खां ने बताया कि न तो उसने बैंक के बाहर कोई मोटरसाइकिल देखी न किसी संदिग्ध व्यक्ति को देखा।

चौकीदार ने बैंक लूट कर भागते पिस्तौलधारी लुटेरों को भी देखने से इनकार किया। चौकीदार का दावा है कि वह घटना के समय बैंक के गेट के पास नीचे मौजूद था। दूसरी ओर टंडवा थाने के एक अन्य चौकीदार का कहना है कि वह बैंक में लूट के दौरान मौजूद था और सारी घटना का चश्मदीद गवाह है। वह इस बैंक से पैसे निकालने आया था। पुलिस का मानना है कि या तो गेट पर तैनात चौकीदार ड्यूटी से गायब था या अपराधी इतने शातिर थे कि बैंक में घुसने के पहले उन्होने बाइकें सुरक्षित दूरी पर लगाई थीं और भागते समय भी इतने इत्मीनान से गए कि चौकीदार तक को संदेह नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि टंडवा थाना इस बैंक शाखा से महज कुछ सौ मीटर दूर है और यदि पुलिस को तत्काल भनक मिलती तो लुटेरों को दबोचा जा सकता था।

हर सुराग मिटाने की कोशिश की अपराधियों ने
नवीनगर संवादसूत्र। बैंक में लूट को अंजाम देने वाले लुटेरे कोई नवसिखुआ अपराधी नहीं बल्कि शातिर अपराधी लग रहे हैं। अपराधियों की कार्यशैली इतनी पेशेवराना है कि इससे पुलिस को अंदाज हो गया है कि इसके पीछे बड़ा गैंग है। इन अपराधियों ने हर सबूत मिटाने की कोशिश की है।

आम तौर बैंकों में बाइक से आने वालों को संदेह से देखा जाता है। इसलिए अपराधियों ने अपनी बाइक कुछ दूरी पर ही खड़ी कर दी ताकि यदि कोई चौकीदार आदि ड्यूटी पर हो तो उसे बाइकें देख कर कोई संदेह न हो जाए। इसीलिए संभवत: चौकीदार रसूल खां को बाइकें नजर नहीं आईं। इसके बाद अपराधी दो मंजिले बैंक भवन में पहुंचे पर बैंक में धुसने के पहले उन्होने अपने चेहरों पर कपड़े बांध लिए थे। ये उनकी पहचान छिपाने की कोशिश थी।

पुलिस का मानना है कि इस लूट में कोई स्थानीय तत्व भी होगा जिसे पहचाने जाने का भय हो। इसलिए चेहरे ढंके गए। इसके बाद अपराधी बैंक में घुसे। उनका पूरा ध्यान इस बात पर था कि कोई उनकी वीडियो क्लिप अपने मोबाइल से न बना ले। उन्होने बैंक कर्मियों से मोबाइल लिए और उनके सिम निकाल कर उन्हें दांतों से चबा कर तोड़ भी डाला ताकि लूट की सूचना तत्काल प्रसारित न हो सके। जो मोबाइल कीमती थे उन्हें अपनी जेबों के हवाले भी किया। इसके बाद उनका निशाना बने सीसीटीवी कैमरे।

उन्होने खोज खोज का कैमरे निकाले और हार्डडिस्क तक ले जाने की बात कही जा रही है। यानि अपराधी न केवल सीसीटीवी से परिचित थे बल्कि उन्हें स्टोरेज डिवायस का भी अंदाजा था। ये बिल्कुल पेशेवर अपराधी ही कर सकते हैं। ब्रांच मैनेजर संतोष बताते हैं कि लूट की पूरी कार्रवाई 15 से 20 मिनट में खत्म कर दी गई और लुटेरे पिस्तौलें लहराते निकल गए। लेकिन बैंक से बाहर आते ही लुटेरों ने पिस्तौलें छिपा लीं और आम ग्राहक बन कर निकले।

इसी वजह से बैंक के बाहर खड़े लोगों और चौकीदार को कोई संदेह नहीं हो सका। इस पूरी लूट के दौरान अपराधियों ने कोई सुराग पुलिस के लिए अब तक नहीं छोड़ा। सीसीटीवी का तार खींचने के क्रम में लुटेरों ने बैंक के कंप्यूटर भी क्षतिग्रस्त कर दिए जिससे देर शाम तक ये पता नहीं चल पाया कि आखिर लूटी गई कुल रकम कितनी है।

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