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मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ दो युवा कर रहे तुलसी की खेती 

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ दो युवा कर रहे तुलसी की खेती 

बेगूसराय में तुलसी का पौधा घर-आंगन में ही नहीं, खेतों में भी अपनी खुशबू बिखेर रहा है। जिले के कई गांवो में तुलसी की व्यापक स्तर पर खेती हो रही है। यही नहीं औषधीय पौधों जैसे कालमेघ, ब्राह्मी, कौंच आदि की भी खेती की जा रही है। यह संभव हुआ है दो युवाओं की मेहनत से, जिन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर खेती को कॅरियर के रूप में चुना। 

 अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई और फिर मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी। लेकिन  नौकरी छोड़ राहुल भदुला और आलोक राय ने औषधीय पौधों की खेती करने की ठानी। आज उनके प्रयास का ही फल है कि किसान अपने खेतों में तुलसी की खेती कर रहे हैं। 

बेगूसराय के हैं आलोक 

राहुल भदुला उत्तराखंड के मूल निवासी हैं जबकि 30 वर्षीय आलोक राय बेगूसराय जिले के हैं। उन्होंने औषधीय पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया। उनके उत्पाद की मार्केटिंग करना सिखाया। 

चप्पल उतार खेत में घुसते हैं किसान 

 शुरुआती दौर में तुलसी के पौधों की खेती में धार्मिक भावनाओं के आहत होने का हवाला देकर किसानों ने परेशानी जतायी थी। लेकिन अब वही किसान खेत में घुसने से पहले चप्पल उतार कर खेत को प्रणाम करते हैं और तब पौधों की देखभाल करते हैं। 

किसानों तक पहुंच रहे वितरक 

बेगूसराय जिले में उपज रहे औषधीय पौधे की मांग बाहर के राज्यों में बढ़ी है। विपणन के लिए किसानों को कहीं भटकना नहीं पड़ता। कंपनी के प्रतिनिधि खुद खेत तक पहुंचते हैं और वहीं से उत्पाद खरीद कर ले जाते हैं। परंपरागत खेती की तुलना में औषधीय पौधों की खेती से उन्हें अधिक मुनाफा मिल रहा है। 

आसपास के जिलों में भी हो रही खेती 

औषधीय पौधों की खेती की ओर आसपास के किसानों का भी रुझान बढ़ रहा है।   कम समय में अधिक लाभ मिलने के चलते समीपवर्ती जिले के किसान भी बेगूसराय के किसानों से औषधीय पौधों के तौर-तरीके पूछने के लिए पहुंच रहे हैं। 

चार महीने में लेते हैं तीन कटाई

जून के प्रथम सप्ताह में औषधीय पौधों की रोपाई की जाती है। उसके बाद तीन बार निकौनी और पटवन करना पड़ता है। सितंबर तक तीन कटाई ली जाती है। बेगूसराय जिले के सफापुर गांव के युवा किसान विपिन सिंह ने बताया कि ढ़ाई बीघा खेत में दो साल से वे तुलसी के पौधों की खेती कर रहे हैं। पहले सोयाबीन की खेती करते थे तो उन्हें 45 हजार की बचत होती थी और अब तुलसी के पौधे से 80 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। तुलसी के पौधे से पर्यावरण व सेहत को तो फायदा होता ही है, खेत के आसपास तुलसी के पौधों की महक लोगों को बरबस ही आकर्षित करती है। 

 खम्हार के मुकेश सिंह ढ़ाई बीघे में, बागवारा के रामविलास चौधरी ढ़ाई बीघे में, मोहनपुर में अरविन्द सिंह 15 कट्ठे में, मुजफ्फरा के धर्मेन्द्र कुमार चार बीघा, आलापुर के अनिल चौधरी व श्यामनंदन पाण्डेय पांच बीघे में, राजकुमार, वशिष्ठ कुमार, रामनंदन साहु, श्रवण कुमार, सुभाष कुमार, बरौनी हाजीपुर के राजेश कुमार सवा बीघे में, संजात के मनटुन कुमार ढ़ाई बीघे में औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा समीपवर्ती जिले लखीसराय के ओलीपुर निवासी किसान शत्रुघ्न   कुमार ने इस साल से आठ बीघे में औषधीय पौधों की खेती शुरू की है। 

 

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  • Web Title:farming of basil leaves in begusarai