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बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में जुटेंगे देश भर के विद्वान

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय 36वां महाधिवेशन 2-3 अप्रैल को  होगा। पटना के हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में आयोजित इस महाधिवेशन में देशभर के हिन्दी के विद्वान शिरकत करेंगे। उद्घाटन बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद करेंगे। हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित, पद्मश्री से सम्मानित पत्रकार व पूर्व सांसद राम बहादुर राय विशिष्ठ अतिथि होंगे। हिन्दी साहित्य के विकास और चुनौतियों पर अपना विचार रखेंगे। इसमें  विचार गोष्ठियां होंगी।

2 अप्रैल को प्रथम सत्र में ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: सामाजिक दायित्व, पत्रकारिता और साहित्य’ विषय पर प्रख्यात साहित्कार नरेंद्र कोहली, वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक और वरिष्ठ साहित्यकार व समालोचक खगेंद्र ठाकुर अपने विचार रखेंगे। दूसरे सत्र में ‘साहित्य में ग्राम्य जीवन और बिहारपर कर्नाटक पीठाधीश्वर कोलादमठ के डॉ. शांतिवीर महास्वामी, चर्चित कथाकार मिथिलेश्वर, पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र स्निग्ध सहित देश के कई विद्वान अपनी बात रखेंगे।

हिन्दी के समक्ष चुनौतियां और बिहार : 3 अप्रैल को तीसरे सत्र में ‘राज्य भाषा- हिन्दी के समक्ष चुनौतियां और बिहार’ विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार जिया लाल आर्य, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल सिद्धेश्वर प्रसाद सहित कई बुद्धिजीवी अपनी बात रखेंगे। चौथे और अंतिम सत्र में ‘हिन्दी साहित्य में महिलाओं की सहभागिता’ विषय पर गोवा की राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा, पुष्पक की संपादक डॉ. अहिल्या मिश्र, प्रख्यात कथा लेखिका पद्मश्री से सम्मानित डॉ. उषा किरण खान और डॉ मधु वर्मा सहित कई बुद्धिजीवी महिलाएं अपनी बात रखेंगी। पंचवां सत्र खुला सत्र होगा। इस सत्र का उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद करेंगे। विराट कवि सम्मेलन में कविवर गोपाल दास नीरज, कुंवर बेचैन, डॉ सीता्र सागर, चरणजीत चरण, वाहिद अली वाहिद और कवि सत्यनारायण शिरकत करेंगे।


हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हुई स्थापना: 1910 र्में ंहदी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी। 1920 में सम्मेलन का 10वां अधिवेशन बिहार में सुनिश्चित हुआ और इसी के साथ बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई। आखिरकार देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के विशेष पहल व लक्ष्मी नारायर्ण ंसह, मथुरा प्रसाद दीक्षित, बाबू वैद्यनाथ प्रसार्द ंसह, पीर मोहम्मद यूनिस, लतीफ हुसैन नटवर और पंडित दर्शन केशरी पांडेय जी के प्रयास से मुजफ्फरपुर के हिन्दू भवन में 19 अक्टूबर 1919 को जगन्नाथ प्रसाद के सभापतित्व में सार्वजनिक सभा हुई जिसमें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना का निर्णय हुआ। और आखिरकार पटना के कदमकुआं में इसके भवन का निर्माण कर इसकी यात्रा आगे बढ़ाई गई।

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