DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सीधी चुनावी जंग होती है वैशाली की सीटों पर

सीधी चुनावी जंग होती है वैशाली की सीटों पर

लोकतंत्र की आदि भूमि वैशाली सीधी चुनावी जंग में विश्वास करती है। जिले की सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार खड़े तो होते हैं अनेक पर लड़ाई जमती है सिर्फ दो में। किसी-किसी सीट पर ही त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बनती है।

मतदाता काफी जागरूक हैं और यही कारण है कि वोटों का ज्यादा बिखराव नहीं हो पाता। मतदाता अपने एक-एक वोट का हिसाब रखता आया है। इस बार भी ज्यादातर सीटों पर आमने-सामने की लड़ाई की संभावना है। जिले में युवा मतदाताओं की संख्या लगभग 60 फीसदी है। अभी जो राजनीतिक हालात बन रहे हैं, उनमें युवा वोटरों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। वे आमने-सामने की लड़ाई को ज्यादा पसंद करने वाले हैं। सिर्फ वर्ष 2010 के चुनाव को ही बतौर उदाहरण लें तो यह साफ हो जाएगा कि वैशाली की सीटें उस म्यान की तरह हैं जिसमें सिर्फ दो तलवारों की ही गुंजाइश रहती है। एक तलवार विजेता की और दूसरी उपविजेता यानी निकटतम प्रतिद्वंद्वी की। शेष दलीय और निर्दलीय प्रत्याशी इस तरह लुढ़क जाते हैं कि अपनी जमानत भी नहीं बचा पाते। हाजीपुर विधान सभा सीट से तब 24 दलीय व निर्दल उम्मीदवारों ने ताल ठोंकी थी। जीत हुई भाजपा के नित्यानंद राय की और उपविजतेता बने थे लोजपा के राजेन्द्र राय। शेष 22 को अपनी जमानतें गंवानी पड़ीं। लोक सभा चुनाव में नित्यानंद राय के उजियारपुर से भाजपा सांसद चुने जाने के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा के अवधेश सिंह और जदयू के राजेन्द्र राय के बीच आमने-सामने के संघर्ष में भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई थी। निर्दल देव कुमार चौरसिया के अलावा अन्य 12 प्रत्याशियों को जमानत गंवानी पड़ीं। लालगंज विधान सभा सीट पर भी सिर्फ दो उम्मीदवारों जदयू की अन्नू शुक्ला और निर्दल राजकुमार साह के बीच संघर्ष हुआ था।

सभी सीटों पर सीधी लड़ाई की संभावना दिख रही
इस बार जो राजनीतिक हालात बनते जा रहे हैं और वोटरों की सोच बन रही है उसे देखते हुए सभी सीटों पर सीधी लड़ाई की ही संभावना दिख रही है। मतदाताओं के सामने अभी एनडीए और दूसरी तरफ राजद-जदयू-कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस का महागठबंधन है। पूर्व मुख्यामंत्री जीतनराम मांझी की हम पार्टी का एनडीए के साथ चुनावी गठबंधन की खबर आ चुकी है। किसी तीसरी शक्ति का मैदान में उतरना शेष है। फिलहाल तो दो गठबंधनों में ही जिले के मतदाता बंटे हैं। कुछ परिपक्व निर्दलीय भी चुनावी दावे के साथ मैदान में उतर सकते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Vaishali is straight on the seats of the electoral battle