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हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि नेपाली नदियों से प्रभावित

हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि नेपाली नदियों से प्रभावित

इंडो नेपाल सीमा से लगे तीन पंचायत के कई किसानों की हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि नेपाली नदियों व जलग्रहण क्षेत्रों से प्रभावित है। एक भी फसल इन नदियों के प्रकोप से नहीं बची है।

कुनौली, कमलपुर और डगमारा पंचायत के सैकड़ों किसान एक दर्जन से अधिक नदियों के पानी का बहाव इसी क्षेत्र होकर होने से परेशान हैं। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से फसल तो बर्बाद होती है। साथ ही गांव को भी काफी क्षति होती है। तीन-तीन दिनों तक इन पंचायत के लोगों को नेपाली नदियों से आये अत्यधिक पानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन जल संसाधन विभाग द्वारा अभी तक इसके निदान के लिए बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराये गये हैं। मालूम हो कि इन तीनों पंचायत के बाढ़ से सुरक्षा के लिए इंडो नेपाल के नो मेंस लैंड से काफी हटकर कुनौली बोर्डर से शांतिवन से लेकर इंडो नेपाल के पीलर संख्या 223 तक सीमा बांध का निर्माण कराया गया है। इसी बांध को लेकर उक्त तीनों पंचायत के लोगों को कोई परेशानी नहीं होती है। लेकिन वर्ष 2004-05 में आयी भीषण बाढ़ में सीमा बांध में बनाये गये नवनिर्मित आरसीसी पुल ध्वस्त होने से यहां के लोगों की परेशानी बढ़ गयी। फसल की बर्बादी, जानमाल की क्षति सहित अनेकों प्रकार की क्षति नेपाली नदियों व जल ग्रहण क्षेत्रों से आने वाली पानी से हुआ करती है।

ग्रामीणों ने आंदोलन का दिया अल्टीमेटम
सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ से फसल व जानमाल की हो रही क्षति को देखते हुए निर्मली प्रमुख अरविंद कुमार गुप्ता, मुखिया वाशिद अहमद, राम प्रसाद राम, सुमित्रा देवी, पंचायत समिति सदस्य अवधेश सिंह, राजाराम शर्मा, वीरेन्द्र मंडल, मनोज कुमार मेहता, बुच्ची देवी, राजकुमार कामत आदि ने कहा कि विभाग सीमा विकास को नजर अंदाज कर रही है। अगर रूके हुए कार्य पुन: प्रारंभ नही किये गये तो यहां के लोग आंदोलन करने को बाध्य हो जायेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ से सुरक्षा के लिए इंडो नेपाल के नो मेंस लैंड से हटकर कुनौली बोर्डर शांतिवन से लेकर इंडो नेपाल पीलर संख्या 223 तक सीमा बांध का निर्माण कराया गया। जिससे लोगों को कोई परेशानी नहीं होती थी। लेकिन वर्ष 2004-05 में आयी भीषण बाढ़ में सीमा बांध में बनाये गये नवनिर्मित आरसीसी पुल के ध्वस्त होने से लोगों की परेशानी काफी बढ़ गयी है।

काउजवे निर्माण नहीं होने से परेशानी
मार्च 2013 में छह किमी लंबी सड़क में ग्रामीण कार्य विभाग सुपौल द्वारा काउजवे का निर्माण कराया जा रहा था। दूसरी ओर स्थानीय पंचायत द्वारा मनरेगा योजना से पाया किनारे से लेकर कब्रिस्तान तक बांध सुरक्षात्मक व सुदृढी़करण कार्य कराया जा रहा था। लेकिन इस पर नेपाली लोगों की बुरी नजर लग गयी। नेपाली नागरिकों ने भारतीय दूतावास से इसकी शिकायत की। जिसके बाद 2 मई 13 को इस कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी। 4 मई 13 को नेपाल और भारत के शीर्ष स्तरीय पदाधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। लेकिन इसका परिणाम निकालने में असफल रहे। चूंकि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व विभागीय अधिकारियों द्वारा इन नदियों के समाधान पर सर्वे व निर्णय नहीं लेना चाहते हैं। जिस वजह से बाढ़ के महीनों में यहां के लोग काफी भयभीत रहते हैं।

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  • Web Title:Thousands of acres of fertile land affected by the Nepalese rivers