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नर्सरी-केजी से सस्ती है कॉलेजों की पढ़ाई

नर्सरी-केजी से सस्ती है कॉलेजों की पढ़ाई

भागलपुर विवि में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। उच्च शिक्षा का सपना देख रहे छात्रों के लिए यह जानकारी सुकून देने वाली होगी कि महंगी होती शिक्षा के दौर में भी सरकारी डिग्री कालेजों में पढ़ाई जेब के अनुकूल बैठती है। प्राइवेट स्कूलों के नर्सरी और केजी से भी यह खर्चा कम है।

मारवाड़ी कॉलेज और सुन्दरवती महिला कालेज में स्नातक की सालाना फीस उतनी भी नहीं जितनी किसी निजी स्कूल में कक्षा एक के लिए प्रतिमाह चुकानी पड़ती है।     

सुन्दरवती महिला कालेज में नामांकन के लिए सबसे अधिक छात्राओं की भीड़ जुटती है। यहां बीएससी, बीकॉम और बीए की सालाना फीस क्रमश: 1194, 1151 और 1131 रुपए है। इसी तरह नैक से ए ग्रेड प्राप्त मारवाड़ी कालेज में भी दाखिले के लिए मारामारी मचती है। यहां स्नातक में दाखिले का सालाना शुल्क बीए-बीकाम के लिए 1198 और बीएससी के लिए मात्र 1214 रुपए है। इसी में एडमिशन, ट्यूशन फी, लैब, मेडिकल डेवलपमेंट समेत सभी खर्चे शामिल हैं। टीएनबी कालेज की साइट पर दाखिले की प्रक्रिया की जानकारी तो दी गई है लेकिन फीस और स्कालरशिप की जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन यहां भी फीस बहुत कम है। इन कालेजों में फीस तो कम है ही, साथ में मेधावी छात्रों को छात्रवृति भी देने का प्रावधान है।

भागलपुर ही नहीं दिल्ली विवि से जुड़े कालेजों तक में स्नातक की पढ़ाई का खर्च अपेक्षाकृत बहुत कम है। दिल्ली के नामचीन कालेजों में भी यह सालाना 12-15 हजार से कम ही होता है। जेएनयू में तो यूं समझें कि छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। हां इन शिक्षण संस्थानों में दाखिला मेरिट के आधार पर होता है और देशभर के छात्रों में प्रतिस्पर्धा रहती है। डिग्री कालेजों में दाखिले की तैयारी में जुटे छात्र छात्राओं के लिए अच्छी खबर यह कि इस साल अभी तक किसी सरकारी कालेज ने फीस में बढ़ोत्तरी की कोई सूचना नहीं है। दूसरी तरफ बताने की जरूरत नहीं कि निजी स्कूलों में जहां साल दर साल फीस में अनाप शनाप बढ़ोत्तरी की जा रही वहीं नर्सरी और केजी में प्रवेश दिलाने में ही अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है। मिशनरी स्कूलों में भी यह पढ़ाई सस्ती नहीं रही। नर्सरी व केजी के दाखिले में 25-30 हजार रुपए तक लगते हैं। कुछ निजी स्कूलों में यह शुल्क और अधिक है।

इधर चार-पांच सालों से प्रतिवर्ष नामांकन के नाम पर मोटी रकम ली जाने लगी है। अगर किताब-कॉपी, ड्रेस आदि जोड़ लें तो यह खर्च और बढ़ जाता है। इसके उलट सरकारी कालेजों से इंटरमीडिएट की पढ़ाई का खर्च भी कम है। नामांकन और रजिस्ट्रेशन व परीक्षा शुल्क मिलाकर यह दो हजार से अधिक नहीं बैठता। स्नातकोत्तर कक्षाओं का खर्च भी सलाना करीब दो हजार से कम है। मेस का खर्च छोड़ दें तो हॉस्टल की फीस सिर्फ 1400 रुपए वार्षिक।

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