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एसिड अटैक में जख्मी को अस्पताल में बेड तक नहीं

एसिड अटैक में जख्मी को अस्पताल में बेड तक नहीं

अलीनगर प्रखंड के धमसाइन गांव में एक सप्ताह पहले एसिड अटैक की घटना में घायल परिवार इलाज के लिये दर-दर भटक रहा है। घटना के बाद डीएमसीएच लाये जाने पर डांक्टरों ने उनलोगों को बेहतर इलाज के लिये पीएमसीएच रेफर कर दिया था। पीएमसीएच के इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर पूरा परिवार सोमवार की देर रात डीएमसीएच लौट आया।

डीएमसीएच में इन लोगों को एक बेड तक नहीं मिला है। घायल उदय साह, उसकी पत्नी सोनी देवी, बेटा प्रिंस कुमार व दुधमुंहा नीतीश वार्ड में फर्श पर ही पड़े हुए हैं। उनलोगों का जख्म भी पूरी तरह नहीं भरा है। ऐसी हालत में संक्रमण होने से उनलोगों की जान को भी खतरा हो सकता है।

सोनी देवी का चेहरा और उसके शरीर का ऊपरी भाग बुरी तरह जला हुआ है। उदय, नीतीश व प्रिंस के जख्म भी अभी तक ताजे हैं। डीएमसीएच में बर्न विभाग नहीं रहने से उनलोगों की परेशानी और भी बढ़ सकती है। अपने परिवार की हालत देखकर स्वयं जख्मी उदय साह के आंखें भर आती है। वह कहता है, ‘कतो स एक पाई के मदद नेई भेटल। हम सब आब थक गेल छी। आब भगवान मालिक छथिन।’ उदय साह कहता है कि पीएमसीएच में लगभग 20 हजार रुपये की दवा बाहर से खरीदनी पड़ी। सलाइन तक अस्पताल से नहीं मिलता था।
 
अपने शरीर के जख्म दिखाते हुए सोनी देवी कहती है कि वहां दो-तीन दिन पर डांक्टर उनलोगों की सुधि लेने आते थे। खाना-पीना भी ठीक से नहीं मिलता था।

इलाज व अन्य लोगों के खाने पीने को लेकर लगभग 50 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। थक हारकर उन लोगों ने पीएमसीएच के डांक्टरों से डिस्चार्ज करने की गुहार लगाई। यहां कुछ दवा तो मिली है, लेकिन आज सुबह से ही वे लोग फर्श पर पड़े हैं। सोनी देवी ने बताया कि मामूली विवाद को लेकर उसके देवर संतोष साह ने पूरे परिवार पर तेजाब फेंक दिया था। पता नहीं किस जन्म के पाप की सजा उनलोगों को मिल रही है। गौरतलब है कि उदय साह के छोटे भाई संतोष साह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वह अभी जेल में है।

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  • Web Title:Injured in acid attack by the hospital beds