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आपराधिक घटनाओं में वृद्धि से लोगों में दहशत

आपराधिक घटनाओं में वृद्धि से लोगों में दहशत

बढ़ते अपराध से जदिया थाना क्षेत्र कहराने लगा है। बीते छह महीनों की चर्चा करें तो शायद ही कोई ऐसा महीना होगा जिस माह में बेखौफ अपराधियों ने किसी नकिसी को अपना निशाना नहीं बनाया हो। अमूमन क्राइम के दृष्टिकोण से शांत माने जाने वाले इस जिले में अपराधिक घटनाओं में हो रही वृद्धि से लोगों में दहशत का माहौल कायम हो गया है। कभी लूट तो कभी खड़े वाहन से डीजल की चोरी की घट रही घटनाओं ने लोगों को सकते में डाल दिया है।

कोरियापट्टी बैंक लूट की घटना के बाद से ताबड़तोड़ हो रही घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। वर्ष 2015 में केवल जदिया थाना की ही यदि घटनाओं पर गौर करें तो 8 फरवरी को जोगबनी निवासी राकेश विक्रम साह से लुटेरों ने पिस्तौल की नोंक पर बघली नहर के समीप बाइक लूट ली थी। इस घटना के एक माह बाद 18 मार्च को भाजपा नेता पवन अग्रवाल से हाई स्कूल जदिया के समीप बदमाशों ने फिर पिस्तौल की नोंक पर उनकी काले रंग की पल्सर बाइक लूट ली।

19 अप्रैल के अहले सुबह अपराधियों ने परसागढ़ी चांप से किराना समान से लदे एक ट्रक को ही अगवा कर लाखों का समान लूट लिया। इस घटना के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि 20 अप्रैल को एक बार फिर बेखौफ अपराधियों ने कोपाड़ी मोड़ के समीप पिकअप वान पर सवार मवेशी व्यापारी से नगद डेढ़ लाख रुपये दिन दहाड़े लूट लिए। एक सप्ताह बाद ही 30 अप्रैल को पांडेयपट्टी गांव के समीप पिस्तौल की नोंक पर बदमाशों ने रानीगंज निवासी संतोष से नई हीरो होंडा बाइक लूट ली। फिर एक माह बाद ही 29 मई को दिन दहाड़े अपराधियों ने मवेशी व्यापारी को अपना निशाना बनाया और राजगांव-चरण पथ पर मवेशी व्यापारी को गोली मारकर घायल कर दिया तथा एक लाख नगद लूट लिया।

हालांकि ताबड़तोड़ घटी इन घटनाओं में से अब तक दो गंभीर घटनाओं का पुलिस ने दिन-रात एक कर उद्भेदन कर लिया है। लेकिन अपराध का ग्राफ घटने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके कारण लोगों में दहशत है। लोगों ने पुलिस अधीक्षक से गश्ती बढ़ाने की मांग की है। ताकि अपराध पर लगाम लग सके।

गुप्तचर का प्रयोग नहीं होने से बढ़ते हैं अपराध
इतना तो साफ है कि किसी भी अपराध को अंजाम देने के लिए अपराधी योजना बनाते हैं। भले ही योजना कितना भी गोपनीय क्यों न हो। जानकारों की माने तो प्राइवेट गुप्तचर को कम से कम पचास फीसदी मामलों का पता चल ही सकता है। लेकिन इसके लिए पुलिस तंत्र को ईमानदारी के साथ मेहनत करने की दरकार है जो बड़ी मुश्किल से देखने को मिलती है। अपराध होने के बाद पुलिस जितनी सतर्कता और मेहनत के साथ दायित्व का निर्वहन करती है उसका दस फीसदी भी अपराध से पहले कर ले तो शायद इतनी संख्या में अपराध नहीं होंगे। खास बात यह है कि घटना लूट या हत्या की हो हर मामले का उद्भेदन करना जरूरी है। ऐसा नहीं है कि अपराध के किसी भी मामले में पुलिस को उद्भेदन करने में सफलता नहीं मिली है, कई अपराधी आज भी सलाखों के पीछे है। लेकिन जरूरत है पुलिस को और अधिक सतर्क और चुस्त दुरुस्त होने की।

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  • Web Title:Increase the incidence of criminal terror