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पटना में नौकरी के नाम पर शोषण

पटना में नौकरी के नाम पर शोषण

राजधानी में बेरोजगार युवाओं को ठगने में कई गिरोह सक्रिय है। रोजगार देने के नाम पर ठग गिरोह बेरोजगारों को देह व्यापार के धंधे में भी धकेल रहे हैं। इसके लिए बकायदा रजिस्ट्रेशन शुल्क भी लिया जा रहा है। पिछले दिनों ऐसे दो मामले पुलिस के पास पहुंचे। जिसके बाद एसएसपी ने साइबर सेल को सक्रिय कर दिया है। ऐसे मामलों की पड़ताल करती चंदन द्विवेदी की रिपोर्ट। 

केस 1
मई में पटना में एक ऐसा ही मामला सामने आया था। एक लड़के ने पुलिस से शिकायत की थी कि नौकरी देने के बदले रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे वसूले गए। बाद में जब उसने नौकरी देने की मांग की तो उसे प्ले ब्वॉय के रूप में काम करने को कहा गया। लड़के ने काम न करने की बात कहकर जब पैसे की मांग की तो क्लब संचालक ने फोन उठाना बंद कर दिया। अंत में एक दोस्त के कहने पर लड़के ने पूरे मामले को लेकर एसएसपी जितेंद्र राणा से शिकायत की। मामले की जांच अब भी जारी है।

केस 2
गत वर्ष 10 दिसंबर को एसएसपी के पास शिकायत पहुंची कि क्लब चलाने वाले ने एक लड़के से पैसे वसूल लिए और फिर प्लेब्वॉय का काम करने का दबाव बनाया। क्लब संचालक ने कई बार उक्त लड़के को फोन भी किया। नौकरी के लिए जमा पैसे की मांग जब लड़के ने की तो क्लब संचालक ने पैसे न लौटाने की बात कही। ठगे जाने के बाद उस लड़के ने एसएसपी को पूरी बात बताई, इसके बाद एसएसपी ने साइबर सेल को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि अब भी वह क्लब लाखों की कमाई कर रहा है।

हिन्दुस्तान रिपोर्टर ने ऐसे कुछ और नंबरों की पड़ताल की तो पाया कि राजधानी में कमाई के नाम पर टेलीफोनिक रजिस्ट्रेशन का गंदा धंधा फैल रहा है। मेट्रपोलिटन सिटी की तरह देह धंधे का हाईटेक तरीका अपनाकर पटना में शातिर युवाओं से लाखों कमा रहे हैं। अखबारों व इंटरनेट पर नौकरी के विज्ञापन के जरिए बेरोजगार युवाओं को ऐसे गलत धंधे में धकेला जा रहा है।

जो युवक प्ले ब्वॉय का नाम सुनकर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने को कहते हैं, उनसे दूसरी नौकरी का झांसा देकर अकाउंट में पैसे डलवाए जाते हैं। पिछले कुछ सालों से ठग इसी बहाने पूरा कारोबार चमका रहे हैं और लोकलाज के डर से शिकायत न किए जाने से पुलिस भी लाचार है।
जब बेरोजगार युवक को फंसने का पता चलता है तब तक देर हो चुकी होती है। उसका पैसा तो डूब ही जाता है। कुछ दिनों बाद ये नंबर अपने आप बंद हो जाते हैं। तब पुलिस भी कुछ नहीं कर पाती है। लाइव रिपोर्टर ने भी जब ऐसे कुछ नंबरों पर फोन किया तो सीधे देह धंधे का ऑफर दिया गया। नंबरों को अटेंड करने वाले व्यक्ति ने तुरंत पैसे जमा करने पर सर्विस देने की बात कही। उसने बताया कि पैसा जमा कराते ही मोबाइल पर एक मैसेज आएगा और फिर रजिस्ट्रेशन पक्का। देह धंधे में इस रजिस्ट्रेशन को कारोबारी मेंबरशिप नाम देते हैं।

कोड-मोबाइल नंबर से पहचान
इस धंधे में कोड के जरिए सारा खेल होता है। पैसा अकाउंट में जमा कराने के कुछ देर बाद मोबाइल पर एक कोड आता है। मैडम से मिलने की जगह तय की जाती है और फोन का इंतजार करने को कहा जाता है। एक कस्टमर को दूसरे कस्टमर से मिलाने के लिए पैसे जमा करने पर एक ही कोड दोनों को दिया जाता है। ऐसे में मैडम का फोन आते ही दोनों जगह तय कर मिलते हैं। बड़े शहरों की तर्ज पर राजधानी में पिछले दो-तीन वर्षों से यह गंदा खेल शातिर खेल रहे हैं।

टेलीफोन पर हुई बातचीत:
तारीख:
7 जून,
समय: 1 बजे(हिन्दुस्तान संवाददाता ने नौकरी के लिए एक अखबार में छपे विज्ञापन वाले नंबर 9931045 पर फोन किया।)
रिपोर्टर:  हैलो, ये कहां का नंबर है। यहां कोई नौकरी मिलती है क्या? अगर ऐसा है तो कुछ डिटेल बताइए।
क्लब संचालक: हां जी, मिलती है। नाम क्या है आपका? किस शहर से बात कर रहे हैं?
रिपोर्टर: जी, हम रमेश (बदला नाम) बोल रहे हैं। आपका नाम क्या है?
क्लब संचालक: मैं संजय सिंह बोल रहा हूं। यहां काम देने से पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। पहले रजिस्ट्रेशन करा लीजिए।
रिपोर्टर: काम क्या है?
क्लब संचालक: बता देंगे, प्ले ब्वॉय का काम है। यह काम करेंगे तो आपको अच्छी आमदनी होगी।
रिपोर्टर: मैं समझा नहीं?
क्लब संचालक: अरे, मैडम से मिलना है। खुश कर सको तो एक मीटिंग के दस हजार रुपए तक मिल जाएंगे। 
रिपोर्टर: कहां है आपका ऑफिस और पैसे कैसे जमा होंगे?
क्लब संचालक: मेंबरशिप ले लो तो ऑफिस आने की झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। अकाउंट नंबर तुम्हारे मोबाइल पर आ जाएगा। पैसे जमा कर देना 17 सौ या फिर 25 सौ। एक कोड जाएगा मोबाइल पर। फिर मैडम का फोन। लोकेशन बता दिया जाएगा, मैडम रास्ते से ही उठा लेंगी। बस, एक बार मैडम खुश हो जाएं, तो तेरी कमाई पक्की। वैसे ऑफिस बोरिंग रोड में है। कब से काम करना चाहते हो?
रिपोर्टर: अगले मंगलवार को पक्का रखते हैं। मेरा मोबाइल नंबर सेव कर लीजिए। लेकिन पुलिस का रिस्क तो नहीं है न? अगर कोई खतरा है तो पहले ही बता दीजिए। मैं किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहता हूं।
क्लब संचालक: पूरा खेल कोड से होता है। पुलिस को भनक तक नहीं लगेगी कि हो क्या रहा है। मैडम के साथ जाना है बस। वो सब मैनेज कर लेंगी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। मेंबरशिप लीजिए फिर टेंशन खत्म। कमाई होती रहेगी।
(मंगलवार के दिन का समय तय कर रिपोर्टर ने फोन काट दिया।)

ऐसे नंबरों को चेक नहीं करती पुलिस
पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि कई गिरोह फ्रेंडशिप क्लब के नाम पर देह धंधा कर रहे हैं लेकिन पुलिस खामोश है। सिटी एसपी राजीव मिश्रा ने स्वीकारा कि स्वत: संज्ञान के तहत ऐसे मामलों की जांच कम ही हो पाती है। पुलिस का यही नजरिया गिरोह के लोगों को फलने-फूलने का मौका दे रहा है। जिन मामलों में शिकायत होती है, वह भी केवल साइबर सेल को भेज कर खानापूर्ति कर ली जाती है। विज्ञापन के जरिए जारी नंबरों की जांच करने पर शातिरों को पुलिस आसानी से पकड़ सकती है।

कम ही लोग कर पाते हैं शिकायत
यह गिरोह राजधानी के कई युवाओं को अपने चंगुल में ले चुका है। लाखों का वारा न्यारा कर ये जालसाज फरार हो जाते हैं। दोस्ती के रिश्ते के नाम पर चल रहे इस खेल में पैसे लेकर युवाओं पर देह धंधे में उतरने का दबाव बनाया जाता है। धोखाधड़ी के शिकार युवक और युवतियां नाम बदनाम होने के डर से न तो एफआईआर दर्ज कराते हैं और न यह बात किसी को बताते हैं। युवाओं के इसी डर का फायदा उठाकर शातिर गलत धंधे के बाजार को और बड़ा बना रहे हैं। अगर कोई किसी अकाउंट में एक बार पैसा डाल देते हैं तो अगली बार भी पैसे देने का दबाव बनाया जाता है।

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  • Web Title:Exploitation in the name of job in Patna